'भमरदो': हेतल पुनीवाला बोले — 'तारे जमीन पर' जैसी भावनात्मक गहराई देगी यह गुजराती फिल्म
सारांश
मुख्य बातें
गुजराती अभिनेता हेतल पुनीवाला ने अपनी आगामी फिल्म 'भमरदो' को लेकर कहा है कि यह फिल्म दर्शकों को वही भावनात्मक अनुभव देगी जो उन्होंने आमिर खान की चर्चित फिल्म 'तारे जमीन पर' में महसूस किया था। 26 मई को मुंबई में साझा किए गए अपने अनुभवों में हेतल ने बताया कि यह गुजराती फिल्म एक बच्चे के संघर्ष और मेहनत की प्रेरणादायक कहानी है।
फिल्म की कहानी और संदेश
हेतल पुनीवाला ने बताया कि फिल्म में उनका किरदार बच्चों को 'भमरदो' नामक प्रतियोगिता के बारे में मार्गदर्शन देता है। उन्होंने कहा, 'फिल्म में मेरा किरदार 'भमरदो' नाम की प्रतियोगिता के बारे में बच्चों को समझाता है। वह बताता है कि अगर कोई बच्चा इस प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसे स्कॉलरशिप मिल सकती है।' कहानी के केंद्र में एक ऐसा बच्चा है जो शुरुआत में इस खेल से बिल्कुल अनजान है, लेकिन आर्थिक परेशानियों के बावजूद हार नहीं मानता और धीरे-धीरे प्रतियोगिता तक पहुँचने की कोशिश करता है।
किरदार की भावनात्मक गहराई
अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए हेतल ने कहा, 'शुरुआत में मुझे अंदाजा नहीं था कि यह रोल इतना भावुक होगा। फिल्म में कुछ ऐसे सीन्स हैं, जो दर्शकों को अंदर तक महसूस होंगे। इसमें वैसी ही भावनात्मक गहराई है, जैसी लोगों ने आमिर खान की 'तारे जमीन पर' जैसी फिल्मों में महसूस की थी।' उन्होंने यह भी बताया कि शूटिंग के दौरान उन्हें पूरी कहानी की जानकारी नहीं थी — केवल अपने किरदार के बारे में बताया गया था। जब उन्होंने पूरी फिल्म देखी, तभी उन्हें इसकी असली गहराई का एहसास हुआ।
बाबूभाई थेबा की भूमिका
हेतल पुनीवाला ने खुलासा किया कि वह लगभग इस फिल्म का हिस्सा बनने से चूक गए थे, क्योंकि उनकी तारीखें किसी दूसरी शूटिंग से टकरा रही थीं। ऐसे में मशहूर शख्सियत बाबूभाई थेबा ने उन्हें फोन किया और किरदार की अहमियत विस्तार से समझाई। हेतल ने कहा, 'मैं बाबूभाई पर बहुत भरोसा करता हूँ। जब उन्होंने किरदार की अहमियत और कहानी की भावना को समझाया, तो मैंने तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी।'
शूटिंग की कठिन परिस्थितियाँ
फिल्म की शूटिंग बेहद चुनौतीपूर्ण रही। हेतल ने बताया कि अधिकांश शूटिंग दिन में हुई, जब तापमान लगभग 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता था। इस भीषण गर्मी में फिल्म में काम कर रहे 2 से 3 बच्चे बीमार भी पड़ गए। इसके बावजूद पूरी टीम ने हिम्मत नहीं हारी और सभी ने मिलकर शूटिंग पूरी की।
गुजराती सिनेमा का बढ़ता कद
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में गुजराती फिल्म इंडस्ट्री ने सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों के ज़रिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। 'भमरदो' भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती नज़र आती है — एक ऐसी कहानी जो बच्चों की प्रतिभा, उनके संघर्ष और शिक्षा की शक्ति को केंद्र में रखती है। फिल्म से जुड़ी और जानकारी सामने आने पर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ने की उम्मीद है।