क्या मेरी तुलना ओम पुरी से करना संभव है? 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' में कैमियों को लेकर अभिषेक बनर्जी का बयान

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क्या मेरी तुलना ओम पुरी से करना संभव है? 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' में कैमियों को लेकर अभिषेक बनर्जी का बयान

सारांश

अभिषेक बनर्जी ने ओम पुरी को समर्पित अपने छोटे से रोल पर बात की। ओम पुरी की अदाकारी का प्रभाव और 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' में उनके किरदार का महत्व। इस कहानी में व्यक्तिगत दुख और सामाजिक जटिलताओं का गहरा संबंध है।

मुख्य बातें

ओम पुरी का अभिनय हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
अभिषेक बनर्जी ने अपने रोल को ओम पुरी को समर्पित किया।
'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' में विभाजन के समय की जटिलताएं दिखायी गई हैं।
छोटे रोल भी बड़ा असर छोड़ सकते हैं।
अभिनय में हर किरदार की अपनी महत्ता है।

मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय फिल्म उद्योग ने कई महान कलाकारों को जन्म दिया है, जिनकी कला और योगदान भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बने रहेंगे। उनमें से एक हैं ओम पुरी, जिन्हें उनके अद्भुत अभिनय और सच्चे सिनेमा प्रेम के लिए हमेशा याद किया जाएगा। ओम पुरी ने कभी भी किसी भी भूमिका की महत्ता को नहीं देखा, बल्कि हर किरदार में जान डालने का प्रयास किया। इसी बीच, अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपने एक छोटे से रोल को ओम पुरी को समर्पित किया।

अभिषेक बनर्जी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "ओम पुरी मेरे लिए हमेशा प्रेरणा रहे हैं; उनका काम अद्भुत था। उनके करियर में निभाए गए किरदार असली नायकों के समान हैं। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि भूमिका बड़ी है या छोटी, बल्कि इस पर जोर दिया कि किरदार को कैसे निभाया जाए। यही सोच मैंने अपनी कैमियो भूमिका में अपनाई।"

'फ्रीडम एट मिडनाइट' सीरीज में अभिषेक का किरदार एक ऐसे व्यक्ति का है जो अपनी गर्भवती पत्नी को सांप्रदायिक हिंसा में खो देता है। उसका किरदार बदला लेने की भावना से भरा है, लेकिन कहानी उसे अंततः महात्मा गांधी के सामने आत्मसमर्पण की ओर ले जाती है। यह कहानी व्यक्तिगत दुख से परे जाकर भारत और पाकिस्तान के विभाजन की धार्मिक और सामाजिक जटिलताओं को भी दिखाती है।

यह किरदार ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी भावना ओम पुरी द्वारा फिल्म 'गांधी' (1982) में निभाए गए किरदार को दर्शाती है। इस फिल्म में बेन किंग्सले मुख्य भूमिका में थे और इसका निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया था।

अभिषेक ने कहा, "जब निर्देशक निखिल ने मुझे यह रोल ऑफर किया, तो मैंने तुरंत हां कर दी। मुझे विश्वास है कि इंडस्ट्री की असली भावना यह है कि कलाकार को हमेशा अपनी भूमिका निभाने का मौका मिलना चाहिए, चाहे वह भूमिका छोटी ही क्यों न हो।"

अभिषेक ने कहा, "मेरी ओम पुरी से तुलना करना संभव नहीं है। ओम पुरी एक सिनेमा के आइकॉन हैं, और उनके नक्शेकदम पर चलना अपने आप में एक सम्मान है। छोटे रोल कभी-कभी सबसे बड़ा असर छोड़ देते हैं, और 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' के रिलीज के बाद मुझे सोशल मीडिया पर दर्शकों की ओर से काफी प्रशंसा मिली।"

सीरीज के दूसरे सीजन में विभाजन के बाद की अशांति, सांप्रदायिक हिंसा, शरणार्थियों की समस्या, रियासतों का विलय और नेताओं के बीच राजनीतिक तनाव को भी दर्शाया गया है।

'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' सोनी लिव पर स्ट्रीम हो रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ हर भूमिका की अपनी एक महत्ता होती है। यह न केवल व्यक्तिगत अभिनय का मामला है, बल्कि एक समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक पहचान का भी है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी का ओम पुरी के प्रति क्या सम्मान है?
अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि उनकी तुलना ओम पुरी से करना संभव नहीं है, क्योंकि ओम पुरी एक सिनेमा के आइकॉन हैं।
'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' का मुख्य विषय क्या है?
'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' विभाजन के समय की धार्मिक और सामाजिक जटिलताओं को दर्शाता है।
किस फिल्म में ओम पुरी ने मुख्य भूमिका निभाई थी?
ओम पुरी ने फिल्म 'गांधी' (1982) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अभिषेक का किरदार किस तरह की भावनाओं से भरा है?
अभिषेक का किरदार बदले की भावना से भरा है, जो अंत में महात्मा गांधी के सामने आत्मसमर्पण की ओर ले जाता है।
'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' कब रिलीज हुआ?
'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' हाल ही में सोनी लिव पर स्ट्रीम हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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