'वॉइसेस ऑफ द लैंड': आदर्श गौरव बोले — पर्यावरण-सचेत विकास ही एकमात्र सुरक्षित भविष्य
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता आदर्श गौरव जल्द ही आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'वॉइसेस ऑफ द लैंड' में नज़र आएंगे, जो पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी समुदायों की संस्कृति, संगीत और पारंपरिक मौखिक इतिहास को केंद्र में रखती है। इस सीरीज की शूटिंग के दौरान उन्हें नॉर्थ-ईस्ट के आदिवासियों के साथ प्रत्यक्ष समय बिताने और उनकी भाषाओं, परंपराओं तथा जीवन-दर्शन को करीब से जानने का दुर्लभ अवसर मिला।
शूटिंग का अनुभव: एक आम टूरिस्ट से कहीं आगे
आदर्श ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'ये ऐसे गहरे अनुभव हैं, जिसका मौका हर किसी को नहीं मिलता। एक आम टूरिस्ट को शायद कभी भी वैसी पहुँच और समझ न मिल पाए, जैसी मुझे मिली।' उन्होंने बताया कि शूटिंग के हर दिन ने उन्हें कुछ नया सिखाया — चाहे वह स्थानीय भाषा हो, लोकगीत हो या पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएँ।
माजुली की बाढ़ और जिजीविषा
माजुली में शूटिंग के दौरान एक स्थानीय गाइड ने आदर्श को बताया कि मानसून के महीनों में ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि भयंकर बाढ़ आ जाती है — पानी घरों के भीतर घुस जाता है और लोग जमीन पर पैर तक नहीं रख पाते। रोज़मर्रा के काम नावों के ज़रिये होते हैं।
इन कठिनाइयों के बावजूद वहाँ के लोगों की सकारात्मकता ने आदर्श को गहरे प्रभावित किया। उन्होंने कहा, 'उनकी जिंदगी यकीनन मुश्किलों भरी है, फिर भी उनकी सकारात्मकता, लोगों के बारे में जानने की उत्सुकता और अजनबियों के प्रति अपनापन कमाल का है — ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें हम में से कई लोग अक्सर भूल जाते हैं।'
आदिवासी ज्ञान और शहरी विस्मृति
आदर्श गौरव का मानना है कि जंगलों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक दुनिया को लेकर आदिवासी समुदायों के पास जो पारंपरिक और व्यावहारिक ज्ञान है, वह शहरों में तेज़ी से लुप्त होता जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारे पूर्वजों को प्रकृति की बहुत गहरी समझ थी — उन्हें पता था कि किस पौधे की पत्ती से त्वचा या शरीर की बीमारियों का उपचार हो सकता है। इस तरह के पारंपरिक ज्ञान के अनगिनत उदाहरण हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक चिकित्सा और जैव-विविधता संरक्षण को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य जैव-विविधता के दृष्टिकोण से विश्व के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में गिने जाते हैं।
पर्यावरण-सचेत विकास की पुकार
अभिनेता ने चिंता जताते हुए कहा कि शहरी समाज पर्यावरण से कट चुका है। उनके अनुसार, 'विकास जरूरी है, लेकिन सोच-समझकर और पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया गया विकास ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही और सुरक्षित रास्ता है। हमें अपनी हरियाली का सम्मान करना होगा।' उन्होंने ज़ोर दिया कि इन समुदायों से सीखकर प्रकृति के साथ तालमेल भरा रिश्ता बनाए रखना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
'वॉइसेस ऑफ द लैंड' कब प्रसारित होगी, इसकी आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन इस सीरीज से पूर्वोत्तर भारत की अनकही कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने की उम्मीद है।