अमीषा पटेल का ट्रोलिंग कल्चर पर वार: 'भारत में एक्टर्स को अपने ही लोग सबसे ज़्यादा ट्रोल करते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री अमीषा पटेल ने 18 मई 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए भारत के ट्रोलिंग कल्चर पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कलाकारों को उनके अपने देशवासी हॉलीवुड सितारों की तुलना में कहीं अधिक बुरी तरह ट्रोल करते हैं, और यह स्थिति उनके लिए 'बेहद दुखद और शर्मनाक' है। मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में यह बयान तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया।
ट्रोलिंग पर क्या बोलीं अमीषा
अमीषा ने एक्स पर लिखा, 'भारत में एक्टर्स को अपने ही लोग, हॉलीवुड सितारों की तुलना में उनके अपने देश में ज़्यादा बुरी तरह ट्रोल करते हैं, जो बहुत दुख की बात है।' उन्होंने बड़े आयोजनों में सितारों के लुक और पहनावे को लेकर फैलने वाली नकारात्मकता पर भी नाराज़गी जताई। उनके अनुसार, भारतीय मानसिकता अब दूसरों को नीचे गिराने की प्रवृत्ति की ओर बढ़ रही है।
पीआर गेम पर तीखा निशाना
यह पहली बार नहीं है जब अमीषा पटेल इस तरह के मुद्दों पर खुलकर बोली हैं। उन्होंने एक्स पर युवा अभिनेत्रियों पर निशाना साधते हुए लिखा कि जिन्होंने अब तक कोई 200 करोड़ क्लब की फिल्म नहीं दी है, वे पीआर टीम को पैसे देकर खुद को 'नंबर 1' और 'नंबर 2' बता रही हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'खुद को सुपरस्टार तभी कहो, जब तुमने कोई ऐसा काम किया हो जो इतिहास रच दे। पीआर के खेल खेलना बंद करो।'
अपनी उपलब्धियों का किया ज़िक्र
अमीषा ने अपनी बात को पुख्ता करते हुए अपनी फिल्मों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने 'कहो ना प्यार है', 'गदर 1' और 'गदर 2' जैसी तीन सबसे बड़ी सोलो ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। आज भी ये मेरे को-स्टार्स की सबसे बड़ी हिट फिल्में हैं। लेकिन मेरी पीआर मशीनरी फ़र्ज़ी नहीं है, इसलिए कमज़ोर है।' उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि असली काम और मीडिया इमेज के बीच की खाई उन्हें लंबे समय से खलती रही है।
मुंबई में पैपराज़ी से भी बोलीं
मुंबई में पैपराज़ी से बातचीत के दौरान अमीषा ने अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा, 'सही तो कहा मैंने। आजकल सभी अपने आप को नंबर वन समझते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोई भी कलाकार ग्लोबल सुपरस्टार तभी बनता है जब वह दुनिया भर में बड़ी हिट फिल्में देता है — महज़ पीआर अभियानों से नहीं।
आगे क्या
अमीषा पटेल के इस बयान ने बॉलीवुड में पीआर संस्कृति और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उनकी यह टिप्पणी उस व्यापक सवाल की ओर ध्यान खींचती है कि क्या डिजिटल युग में सार्वजनिक हस्तियों के प्रति आलोचना और ट्रोलिंग के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है।