जीत की फिल्म 'केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डकैत' 14 अगस्त को रिलीज, अनंत सिंह की क्रांतिकारी गाथा पर्दे पर
सारांश
मुख्य बातें
बंगाली सिनेमा के स्टार जीत की बहुप्रतीक्षित बायोग्राफिकल एक्शन ड्रामा 'केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डकैत' 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। यह फिल्म महान क्रांतिकारी अनंत सिंह के जीवन पर आधारित है, जो एक समय मास्टर-दा सूर्य सेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे। निर्देशक पथिकृत बसु के निर्देशन में बनी इस फिल्म को लेकर जीत ने इसे अपने करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक बताया है।
ट्रेलर को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया
फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज किया गया, जिसे दर्शकों की ओर से जोरदार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। जीत ने कहा, 'ट्रेलर को सच में जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, जिसके लिए मैं सच में शुक्रगुजार हूँ। केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डकैत मेरे लिए शारीरिक और भावनात्मक — दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण रही है। पथिकृत बसु के दृष्टिकोण और दृढ़ इरादे ने मुझे हर कदम पर अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुझे पूरी उम्मीद है कि 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने पर दर्शक भी फिल्म को उतने ही प्यार से अपनाएँगे।'
अनंत सिंह की कहानी — सिर्फ एक जीवनी नहीं
जीत ने स्पष्ट किया कि यह फिल्म केवल अनंत सिंह की व्यक्तिगत कहानी नहीं है। उनके अनुसार, यह विचारधारा, एक नई सोच, कभी न रुकने वाले संघर्ष और उन कठिन सवालों की भी कहानी है जो इतिहास हमारे लिए छोड़ जाता है। उन्होंने जोड़ा कि समय के साथ इतिहास इन सवालों के जवाब और भी स्पष्टता से देता है।
अलीपुर जेल म्यूज़ियम में हुआ ट्रेलर लॉन्च
फिल्म का ट्रेलर ऐतिहासिक अलीपुर जेल म्यूज़ियम में लॉन्च किया गया, जो अपने आप में एक सांकेतिक चुनाव था। जीत ने कहा, 'मुझे खुशी है कि हमने ट्रेलर लॉन्च के लिए अलीपुर जेल म्यूज़ियम को चुना, क्योंकि यह इतिहास से जुड़ी वह जगह है जिसने अनगिनत क्रांतिकारियों की जिंदगी, संघर्ष और कुर्बानी देखी है। यह संघर्ष और नज़रिए का सफर है जो आज भी बेहद प्रासंगिक है।'
फिल्म की पृष्ठभूमि और महत्व
निर्देशक पथिकृत बसु की यह फिल्म बंगाली सिनेमा में ऐतिहासिक बायोपिक की परंपरा को आगे बढ़ाती है। अनंत सिंह का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उल्लेखनीय स्थान रखता है — वे मास्टर-दा सूर्य सेन के करीबी सहयोगियों में से एक थे। फिल्म का 14 अगस्त को — स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर — रिलीज होना इसके ऐतिहासिक महत्व को और गहरा बनाता है।