मुश्ताक खान की प्रार्थना सभा में भावुक हुए अंजन श्रीवास्तव, बोले — 'वह परिवार के सदस्य थे, बहुत जल्दी चले गए'
सारांश
मुख्य बातें
दिवंगत अभिनेता मुश्ताक खान के निधन के बाद मुंबई में आयोजित प्रार्थना सभा में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकार और उनके प्रियजन अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुँचे। इस शोक-सभा में दिग्गज अभिनेता अंजन श्रीवास्तव मुश्ताक खान को याद करते हुए गहरे भावुक हो गए और उनकी आँखें नम हो गईं। मुश्ताक खान का निधन 24 सितंबर 2026 को मुंबई में हुआ था।
अंजन श्रीवास्तव का भावभीना बयान
अंजन श्रीवास्तव ने बताया कि उनका और मुश्ताक खान का रिश्ता महज़ पेशेवर नहीं था — दोनों एक-दूसरे के परिवार का अभिन्न हिस्सा बन चुके थे। उन्होंने कहा, 'हमने इतने सालों तक साथ काम किया। हमारे बीच परिवार जैसा रिश्ता था। मेरी पत्नी भी उन्हें श्रद्धांजलि देने यहाँ आई हैं। हम साथ खाना खाते थे और साथ समय बिताते थे, वह परिवार के सदस्य की तरह थे। अब वह बहुत दूर चले गए हैं। वह हमें बहुत जल्दी छोड़कर चले गए।'
उनके इस बयान ने वहाँ मौजूद तमाम कलाकारों और दर्शकों को भी भावुक कर दिया। श्रीवास्तव की पत्नी का प्रार्थना सभा में उपस्थित होना दर्शाता है कि यह दोस्ती पर्दे के उस पार भी उतनी ही गहरी थी।
दशकों की साझा फिल्मी विरासत
अंजन श्रीवास्तव और मुश्ताक खान ने कई दशकों तक बॉलीवुड में कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। दोनों ने 1981 की फिल्म 'सज़ाय-ए-मौत', 1992 की 'चमत्कार', 1994 की 'जज़्बात', 1995 की 'अकेले हम अकेले तुम' और 2002 की 'एक और विस्फोट' सहित अनेक फिल्मों में एक साथ स्क्रीन साझा की।
गौरतलब है कि फिल्मों के अलावा दोनों कलाकारों ने लोकप्रिय टीवी सीरीज़ 'वागले की दुनिया' में भी साथ काम किया था। इस शो में अंजन श्रीवास्तव ने श्रीनिवास वागले का आइकॉनिक किरदार निभाया, जबकि मुश्ताक खान मनोहर की भूमिका में नज़र आए। इस धारावाहिक ने दोनों को हिंदी दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई।
मुश्ताक खान का समृद्ध सिनेमाई सफर
मुश्ताक खान ने कई दशक लंबे करियर में 'आशिकी', 'हम हैं राही प्यार के', 'हेरा फेरी', 'जोड़ी नंबर 1', 'मुझसे शादी करोगी', 'गदर: एक प्रेम कथा' और 'वेलकम' जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय शैली ने उन्हें दर्शकों का चहेता बनाया।
यह ऐसे समय में है जब बॉलीवुड ने हाल के वर्षों में कई वरिष्ठ चरित्र अभिनेताओं को खोया है, और मुश्ताक खान का जाना इंडस्ट्री के लिए एक और गहरे नुकसान की तरह है।
अंजन श्रीवास्तव का बहुआयामी योगदान
अंजन श्रीवास्तव ने भी हिंदी सिनेमा को 'गोलमाल', 'सलाम बॉम्बे!', 'मिसिसिपी मसाला', 'खुदा गवाह', 'कभी हाँ कभी ना', 'पुकार', 'चक दे! इंडिया' और 'युवराज' जैसी यादगार फिल्में दी हैं। थिएटर और टीवी में भी उनकी सक्रियता दशकों से बनी रही है।
प्रार्थना सभा में उनकी उपस्थिति और भावुक विदाई संदेश इस बात का प्रमाण है कि मुश्ताक खान ने इंडस्ट्री में जो रिश्ते बनाए, वे स्क्रीन से कहीं अधिक गहरे थे। इंडस्ट्री के साथी अब उनकी यादों को जीवित रखने का संकल्प ले रहे हैं।