5 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अंकिता लोखंडे की नानी का 84वाँ जन्मदिन: 'कभी मत कहो कम है' — जिंदगी बदलने वाला सबक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अंकिता लोखंडे की नानी का 84वाँ जन्मदिन: 'कभी मत कहो कम है' — जिंदगी बदलने वाला सबक

सारांश

अंकिता लोखंडे ने नानी का 84वाँ जन्मदिन एक भावुक पोस्ट से मनाया। आंशिक लकवे के बावजूद आत्मनिर्भर नानी से मिला सबक — 'कभी मत कहो कम है' — अभिनेत्री ने बताया कि यही वह सोच है जिसने उनकी जिंदगी को आकार दिया।

मुख्य बातें

अंकिता लोखंडे ने 2 जून को नानी का 84वाँ जन्मदिन मनाने की झलकियाँ इंस्टाग्राम पर साझा कीं।
नानी आंशिक पैरालिसिस से पीड़ित हैं, फिर भी पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं।
अंकिता ने बताया कि वह छह महीने की उम्र से नानी की गोद में पली-बढ़ी हैं — नानी उनके लिए माँ समान हैं।
नानी से मिला सबसे बड़ा सबक: 'कभी मत कहो कि हमारे पास कम है।' नानी ने एक छोटे घर में चार बेटियों की परवरिश प्यार और अपनेपन से की।

टेलीविजन अभिनेत्री अंकिता लोखंडे ने मंगलवार, 2 जून को अपनी नानी के 84वें जन्मदिन समारोह की भावुक झलकियाँ इंस्टाग्राम पर साझा कीं। अंकिता ने बताया कि उनकी नानी आंशिक पैरालिसिस (लकवा) से पीड़ित होने के बावजूद पूरी आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जी रही हैं — और यही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है।

इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या था खास

अंकिता ने पीले रंग की साड़ी पहनकर अपनी नानी का हाथ थामे उन्हें कार्यक्रम स्थल तक ले जाते हुए एक वीडियो साझा किया। वीडियो में परिवार के अन्य सदस्य भी नजर आए। समारोह के दौरान अभिनेत्री भावुक भी दिखीं।

पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, 'आज मेरी आजी (नानी मां) का 84वाँ जन्मदिन है' — साथ ही यह भी जोड़ा कि उनकी नानी ने अपने जीवन में 1,000 पूर्ण चंद्रमा देखने का विशेष पड़ाव पूरा किया है।

नानी से मिला जिंदगी का सबसे बड़ा सबक

अंकिता ने खुलासा किया कि जब वह महज छह महीने की थीं, तभी से उनकी नानी ने उन्हें अपनी गोद में पाला। इसीलिए वह उन्हें सिर्फ नानी नहीं, बल्कि माँ के समान मानती हैं।

उन्होंने अपनी नानी से सीखे चार मूल्यों का उल्लेख किया — भगवान पर विश्वास, रिश्तों की कद्र, घर को प्यार से संभालना और पैसे की अहमियत समझना। लेकिन जो सबक सबसे गहरा उतरा, वह था: 'कभी यह मत कहो कि हमारे पास कम है, हमेशा कहो कि हमारे पास बहुत कुछ है।'

एक छोटे घर में चार बेटियों की परवरिश

अंकिता ने लिखा कि उनकी नानी ने एक छोटे से घर में चार बेटियों की परवरिश इतने प्यार और अपनेपन से की कि उनके घर से कोई भी कभी भूखा नहीं लौटा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोग अक्सर कहते हैं कि वह अपनी नानी जैसी दिखती हैं — और यह उनके लिए सबसे खास तारीफ है।

नानी के लिए भावभीनी शुभकामनाएँ

पोस्ट के अंत में अंकिता ने लिखा, 'मां आजी, मुझे इतना प्यार देने, हमेशा मुझ पर भरोसा करने और मुझे बेहतर इंसान बनाने के लिए आपका दिल से धन्यवाद।' उन्होंने ईश्वर से नानी के लिए लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की कामना की।

अंकिता लोखंडे की यह पोस्ट पारिवारिक मूल्यों और सकारात्मक सोच की एक मार्मिक याद दिलाती है — जो उनके लाखों प्रशंसकों के दिल को छू गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ 'कम में भी बहुत कुछ है' वाली सोच एक ज़रूरी प्रतिसंतुलन है। यह पोस्ट इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि यह दर्शाती है कि शारीरिक चुनौतियाँ हौसले को नहीं तोड़ सकतीं — एक संदेश जो किसी भी उम्र के दर्शक के लिए मायने रखता है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकिता लोखंडे ने नानी के जन्मदिन पर क्या शेयर किया?
अंकिता लोखंडे ने 2 जून को इंस्टाग्राम पर नानी के 84वें जन्मदिन समारोह का एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें वह पीली साड़ी में नानी का हाथ थामे नजर आईं। साथ ही उन्होंने एक लंबी पोस्ट में नानी से मिले जीवन के सबक साझा किए।
अंकिता लोखंडे की नानी की क्या स्वास्थ्य स्थिति है?
अंकिता की नानी आंशिक पैरालिसिस (लकवा) से पीड़ित हैं, लेकिन अभिनेत्री के अनुसार वह आज भी पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहतीं। उनका यह हौसला अंकिता के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।
अंकिता लोखंडे ने नानी से कौन सा जीवन का सबक सीखा?
अंकिता ने बताया कि उनकी नानी ने उन्हें सिखाया — 'कभी यह मत कहो कि हमारे पास कम है, हमेशा कहो कि हमारे पास बहुत कुछ है।' इसके अलावा भगवान पर विश्वास, रिश्तों की कद्र, घर को प्यार से संभालना और पैसे की अहमियत समझना भी उनसे मिले मूल्य हैं।
अंकिता लोखंडे और उनकी नानी का रिश्ता कैसा है?
अंकिता ने बताया कि वह जब महज छह महीने की थीं, तभी से उनकी नानी ने उन्हें पाला-पोसा। इसलिए वह उन्हें सिर्फ नानी नहीं, बल्कि माँ के समान मानती हैं।
नानी ने 1,000 पूर्ण चंद्रमा देखने का पड़ाव क्या होता है?
भारतीय परंपरा में जीवन में 1,000 पूर्णिमाएँ देखना एक विशेष आयु-पड़ाव माना जाता है, जो लगभग 83 वर्ष की उम्र में पूरा होता है। अंकिता ने अपनी पोस्ट में बताया कि उनकी नानी ने 84वें जन्मदिन पर यह दुर्लभ उपलब्धि हासिल की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 7 महीने पहले
  2. 8 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले