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अनुराधा पौडवाल का 70वाँ जन्मदिन: 'आशिकी' की आवाज़ ने बॉलीवुड छोड़ भक्ति संगीत क्यों चुना?

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अनुराधा पौडवाल का 70वाँ जन्मदिन: 'आशिकी' की आवाज़ ने बॉलीवुड छोड़ भक्ति संगीत क्यों चुना?

सारांश

80-90 के दशक में 'आशिकी' और 'राम लखन' जैसी फिल्मों से घर-घर पहुँची अनुराधा पौडवाल ने करियर के शिखर पर फिल्मी दुनिया छोड़ भक्ति संगीत को अपनाया। 27 अक्टूबर को 70वाँ जन्मदिन मना रहीं इस पद्मश्री सम्मानित गायिका की यात्रा शोहरत से आत्मिक संगीत तक की एक विरल मिसाल है।

मुख्य बातें

अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को हुआ; वे 2026 में अपना 70वाँ जन्मदिन मना रही हैं।
उन्होंने वर्ष 1973 में फिल्म 'अभिमान' से पार्श्वगायन की शुरुआत की।
फिल्म 'आशिकी' (1990) में नदीम-श्रवण के संगीत ने उन्हें शीर्ष पार्श्वगायिकाओं की पंक्ति में स्थापित किया।
करियर के चरम पर उन्होंने फिल्मी गानों से दूरी बनाकर भक्ति संगीत को प्राथमिकता दी।
उन्हें चार फिल्मफेयर पुरस्कार , एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2017 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

पार्श्वगायिका अनुराधा पौडवाल 27 अक्टूबर 2024 को अपना 70वाँ जन्मदिन मना रही हैं — वही आवाज़ जिसने 80 और 90 के दशक में हिंदी सिनेमा के रोमांटिक गीतों को एक नई पहचान दी। 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं' और 'बेटा' जैसी फिल्मों के ज़रिए घर-घर पहुँची इस गायिका ने अपने करियर के शिखर पर एक ऐसा फ़ैसला लिया, जिसने उनकी पूरी कलात्मक दिशा बदल दी — और वह था भक्ति संगीत की राह पर चल पड़ना।

शुरुआत: मुंबई से फिल्मी दुनिया तक

अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को हुआ और उनका बचपन मुंबई में बीता। बचपन से ही फ़िल्मों और संगीत के प्रति गहरी रुचि रखने वाली अनुराधा ने वर्ष 1973 में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन अभिनीत फिल्म 'अभिमान' से अपने पार्श्वगायन की पारी की शुरुआत की। इसके बाद फिल्म 'आप बीती' में उन्हें पहला एकल गीत गाने का अवसर मिला, और धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मी जगत में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई।

करियर का स्वर्णिम दौर: 'हीरो' से 'आशिकी' तक

अनुराधा के करियर में निर्णायक मोड़ तब आया जब संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनकी जुगलबंदी फिल्म 'हीरो' की सफलता के बाद परवान चढ़ी। इसके बाद 'मेरी जंग', 'राम लखन' और 'तेजाब' जैसी फिल्मों में उनके गाए गीत श्रोताओं की ज़ुबान पर चढ़ गए।

90 के दशक में संगीत निर्देशक जोड़ी नदीम-श्रवण के संगीत से सजी फिल्म 'आशिकी' (1990) ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 'नजर के सामने', 'धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना' और 'जाने जिगर जानेमन' जैसे गाने आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद में शामिल हैं। उस दौर में कई श्रोता उनकी आवाज़ की तुलना दिग्गज गायिका लता मंगेशकर से करते थे — यह तुलना उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण मानी जाती है।

वह फ़ैसला जिसने दिशा बदली

यह ऐसे समय में हुआ जब अनुराधा पौडवाल हिंदी फिल्म संगीत की सबसे माँग वाली पार्श्वगायिकाओं में गिनी जा रही थीं। उनकी आवाज़ में वह मिठास थी जो रोमांटिक गीतों से लेकर भावुक धुनों तक में समान रूप से प्रभावशाली थी। फिर भी, अपने करियर के चरम पर उन्होंने फिल्मी गानों से दूरी बनाने का निर्णय लिया — एक ऐसा कदम जो उस समय बॉलीवुड को चकित कर गया था। गौरतलब है कि ऐसे मोड़ पर किसी भी कलाकार के लिए फ़िल्मी दुनिया को पीछे छोड़ना असामान्य है।

अनुराधा ने इस बदलाव के बाद भक्ति संगीत को अपनी कला का केंद्र बना लिया। उनके गाए भजन, देवी गीत और पूजा-पाठ के गीत देश भर में अत्यंत लोकप्रिय हुए। नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा के अवसरों पर उनके भक्ति गीत आज भी अनगिनत घरों और पूजा स्थलों की आवाज़ बने हुए हैं।

पुरस्कार और सम्मान

संगीत के प्रति उनके समर्पण को देश ने भी खुले दिल से सराहा। अनुराधा पौडवाल को चार फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है। वर्ष 2017 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया — यह मान्यता उनके दशकों के सांगीतिक योगदान की स्वीकृति है।

विरासत और आगे की राह

अनुराधा पौडवाल की कहानी केवल एक गायिका की सफलता की गाथा नहीं है — यह उस कलाकार की कहानी है जिसने व्यावसायिक शोहरत के बजाय अपनी आत्मिक प्रेरणा को प्राथमिकता दी। उनका भक्ति संगीत की ओर यह सफर भारतीय संगीत जगत में एक विरल उदाहरण है कि कैसे एक कलाकार अपनी शर्तों पर अपना रास्ता चुन सकता है। 70 वर्ष की आयु में भी उनकी आवाज़ की गूँज करोड़ों श्रोताओं के दिलों में ताज़ा बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भक्ति संगीत की ओर उनका झुकाव उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत आस्था में गहरे जड़ा था। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इस निर्णय ने भारत में भक्ति संगीत की व्यावसायिक संभावनाओं को भी एक नई वैधता दी — आज उनके भजन कैसेट-युग से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तक सफ़र कर चुके हैं। 70 वर्ष की उम्र में उनकी विरासत यह साबित करती है कि बाज़ार की माँग से ऊपर उठकर भी एक कलाकार अपनी प्रासंगिकता बनाए रख सकता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुराधा पौडवाल कौन हैं और उनकी उम्र कितनी है?
अनुराधा पौडवाल हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध पार्श्वगायिका हैं जिनका जन्म 27 अक्टूबर 1954 को मुंबई में हुआ था। 2026 में वे अपना 70वाँ जन्मदिन मना रही हैं। उन्हें 'आशिकी', 'राम लखन' और 'दिल है कि मानता नहीं' जैसी फिल्मों के गानों के लिए जाना जाता है।
अनुराधा पौडवाल ने बॉलीवुड छोड़कर भक्ति संगीत क्यों अपनाया?
अपने करियर के शिखर पर अनुराधा पौडवाल ने फिल्मी गानों से दूरी बनाते हुए भक्ति संगीत को प्राथमिकता दी। उनके गाए भजन और देवी गीत नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा जैसे अवसरों पर आज भी घरों और पूजा स्थलों में सुनाई देते हैं।
अनुराधा पौडवाल के सबसे मशहूर फिल्मी गाने कौन से हैं?
अनुराधा पौडवाल के सबसे लोकप्रिय गानों में 'नजर के सामने', 'धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना' और 'जाने जिगर जानेमन' (फिल्म 'आशिकी', 1990) शामिल हैं। इसके अलावा 'मेरी जंग', 'राम लखन' और 'तेजाब' के गाने भी उनकी पहचान बने।
अनुराधा पौडवाल को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
अनुराधा पौडवाल को चार फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्ष 2017 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से भी नवाज़ा।
अनुराधा पौडवाल ने अपने करियर की शुरुआत किस फिल्म से की थी?
अनुराधा पौडवाल ने वर्ष 1973 में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की फिल्म 'अभिमान' से अपने पार्श्वगायन की शुरुआत की थी। इसके बाद फिल्म 'आप बीती' में उन्हें पहला एकल गीत गाने का अवसर मिला।
राष्ट्र प्रेस
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