'बंटवारा 1947': राजकुमार संतोषी बोले — जेनजी शेर की तरह पीछे हटती है, फिर ऊंची छलांग लगाती है
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी ने 12 अगस्त को कोलकाता में अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'बंटवारा 1947' को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने फिल्म की पटकथा, 1947 के विभाजन की मानवीय पीड़ा और आज की युवा पीढ़ी (जेनजी) की देश में भूमिका पर अपने विचार साझा किए। 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली यह फिल्म करीब तीन दशक बाद सनी देओल और संतोषी की जोड़ी को एक बार फिर एक साथ लेकर आई है।
नाटक से पर्दे तक का सफर
संतोषी ने बताया कि 'बंटवारा 1947' प्रसिद्ध नाटककार असगर वजाहत के चर्चित नाटक 'जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई' पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'फिल्म पूरी तरह नाटक की कॉपी नहीं है। फिल्म में करीब 25 प्रतिशत हिस्सा नाटक से लिया गया है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत कहानी को सिनेमा की जरूरत के हिसाब से दोबारा लिखा गया है।' संतोषी ने यह भी बताया कि पटकथा और संवाद लिखने की पूरी प्रक्रिया में असगर वजाहत स्वयं टीम के साथ जुड़े रहे, ताकि नाटक की मूल भावना अक्षुण्ण रहे।
इंसानियत की कहानी, बंटवारे की पृष्ठभूमि
निर्देशक ने फिल्म के केंद्रीय विचार को रेखांकित करते हुए कहा, 'यह फिल्म मूल रूप से इंसानियत की कहानी है। बंटवारे का दौर ऐसा समय था, जब इंसान के भीतर की अच्छाई और बुराई दोनों सामने आईं। कहीं इंसान बहुत नीचे गिरा तो कहीं उसने मुश्किल हालात में भी इंसानियत को जिंदा रखा।' उन्होंने जोर दिया कि फिल्म का मकसद महज इतिहास बताना नहीं, बल्कि उस दौर के इंसानी जज्बे को दर्शकों तक पहुंचाना है।
स्टारकास्ट और निर्माण
फिल्म में सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल, अभिमन्यु सिंह और करण देओल अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। संतोषी ने बताया कि सनी देओल का किरदार उनकी चर्चित फिल्म 'गदर' के तारा सिंह से बिल्कुल अलग है। फिल्म का संगीत ए. आर. रहमान ने तैयार किया है और गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। निर्माण की जिम्मेदारी आमिर खान प्रोडक्शंस ने संभाली है। संतोषी ने कहा, 'यह हमारी खुशकिस्मती है कि उन्हें कहानी पसंद आई।'
जेनजी पर भरोसा और शिक्षा व्यवस्था
छात्रों के प्रदर्शनों और जेनजी की भूमिका पर पूछे गए सवाल पर संतोषी ने कहा, 'जेनजी के हाथों में देश का भविष्य है। आज के युवाओं में गुस्सा, हिम्मत और ताकत है। अगर वे किसी वजह से दो कदम पीछे भी हटते हैं तो वे शेर की तरह पीछे हटेंगे और फिर बड़ी छलांग लगाएंगे।' उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी टिप्पणी की — 'जेनजी ने साफ कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।'
संतोषी का सिनेमाई सफर
अपने करियर पर बात करते हुए संतोषी ने 'घायल', 'दामिनी' और 'अजब प्रेम की गजब कहानी' जैसी फिल्मों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहता है कि फिल्मों को पूरी ईमानदारी से बनाया जाए। गौरतलब है कि 'बंटवारा 1947' करीब तीन दशक बाद सनी देओल और संतोषी की जोड़ी की वापसी है — एक ऐसी फिल्म के साथ जो मनोरंजन से आगे जाकर सामाजिक चेतना को छूने का दावा करती है।