राजकुमार संतोषी बोले — सोशल मीडिया रिव्यू परेशान करता है, पर इससे बचना नामुमकिन
सारांश
मुख्य बातें
फिल्मकार राजकुमार संतोषी ने 20 अगस्त 2026 को मुंबई में कहा कि सोशल मीडिया रिव्यू कभी-कभी बेहद परेशान करने वाले होते हैं, लेकिन फिल्म उद्योग के पास इस नई वास्तविकता से मुँह मोड़ने का कोई विकल्प नहीं है। यह बयान उनकी हालिया फिल्म 'बंटवारा 1947' की रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर उठ रही प्रतिक्रियाओं के बीच आया है।
सोशल मीडिया पर संतोषी का नज़रिया
संतोषी ने साफ शब्दों में कहा, 'देखिए, सोशल मीडिया एक बड़ा प्लेयर बन चुका है। वह अपना काम करेगा। कई बार यह बहुत परेशान करने वाला भी हो सकता है, लेकिन हमें इसकी आदत डालनी होगी। हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। हमें सोशल मीडिया के साथ ही रहना है।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज किसी भी फिल्म के प्रचार और मार्केटिंग में सोशल मीडिया की भूमिका निर्णायक हो गई है — दर्शकों तक जानकारी पहुँचाने से लेकर उनकी दिलचस्पी बनाए रखने तक।
फिल्म 'बंटवारा 1947' का परिचय
'बंटवारा 1947' 14 अगस्त 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह एक पीरियड ड्रामा है जो असगर वजाहत के चर्चित नाटक 'जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ई नई' से प्रेरित मानी जाती है। फिल्म में सनी देओल, शबाना आज़मी, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फज़ल और अभिमन्यु सिंह प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
धार्मिक नेता ने की फिल्म की तारीफ
सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बीच इस्लामिक काउंसिल के चेयरमैन मुफ्ती मंजूर ने एक वीडियो साझा कर फिल्म की सराहना की। मुफ्ती मंजूर ने फिल्म में प्यार और इंसानियत के संदेश को विशेष बताते हुए कहा कि इसमें एक माँ के प्यार को बेहद संवेदनशील ढंग से पेश किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिस दौर में नफरत की आवाज़ें तेज़ हों, उस वक्त प्यार का संदेश देने वाली कहानी का लोगों तक पहुँचना ज़रूरी है। मुफ्ती मंजूर ने सनी देओल, शबाना आज़मी, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फज़ल और अभिमन्यु सिंह के अभिनय को भी शानदार करार दिया।
सोशल मीडिया और फिल्म उद्योग का बदलता रिश्ता
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया रिव्यू ने बॉलीवुड फिल्मों के बॉक्स-ऑफिस प्रदर्शन को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाई है। पहले के दौर में आलोचकों की समीक्षाएँ ही दर्शकों की राय बनाती थीं, लेकिन अब आम दर्शक भी रिलीज के पहले दिन से ही अपनी प्रतिक्रियाएँ ऑनलाइन साझा कर देते हैं — जिससे फिल्म की छवि तेज़ी से बनती या बिगड़ती है।
संतोषी का यह बयान उस व्यापक बहस को रेखांकित करता है जो फिल्म उद्योग में चल रही है — क्या सोशल मीडिया रिव्यू सिनेमा के लिए वरदान हैं या अभिशाप? फिलहाल, 'बंटवारा 1947' की आगे की कमाई और दर्शकों की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी हैं।