क्या बीना राय बॉलीवुड की 'लेडी बॉस' थीं, जो 1.5 लाख रुपये फीस लेती थीं?

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क्या बीना राय बॉलीवुड की 'लेडी बॉस' थीं, जो 1.5 लाख रुपये फीस लेती थीं?

सारांश

बीना राय, हिंदी सिनेमा की एक अद्वितीय नायिका, जिन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा में एक नया अध्याय लिखा। उनका सफर, चुनौतियाँ, और सफलता की कहानी आज भी प्रेरणा देती है। जानिए उनके जीवन के अनकहे किस्से और अदाकारी की गहराई।

मुख्य बातें

बीना राय का असली नाम कृष्णा सरीन था।
उन्होंने फिल्म 'अनारकली' में टाइटल रोल निभाया।
बीना राय ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मेहनत से पहचान बनाई।
उनकी फीस उस समय की तुलना में बेहद उच्च थी।
उन्होंने 1952 में अभिनेता प्रेमनाथ से शादी की।

नई दिल्ली, 12 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की प्रमुख नायिकाओं में से एक, बीना राय, जो अपने खूबसूरत रूप के लिए जानी जाती थीं, एक फिल्म के लिए डेढ़ लाख रुपए तक की फीस लेती थीं। 13 जुलाई 1931 को लाहौर में जन्मी यह अदाकारा पर्दे पर जितनी सौम्य थीं, उनके अभिनय में उतनी ही गहराई थी। उन्होंने 1950 के दशक में अपने अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया—विशेष रूप से फिल्म 'अनारकली' (1953) में। इसके गाने और उनकी अदायगी आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। इस फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी है।

उनके छोटे बेटे कैलाश नाथ ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें मुगल-ए-आजम का ऑफर भी मिला था, लेकिन उन्होंने इसे करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, "एक छाप लग चुकी है और मैं उसे दोहराऊंगी नहीं।" बाद में यह रोल मधुबाला को मिला, जिनसे उनके पति प्रेमनाथ शादी करना चाहते थे।

वो समय ऐसा था जब एक फिल्म के लिए हीरो को पचास हजार से एक लाख रुपए मिलते थे, लेकिन बीना राय जैसी एक्ट्रेस को 1.5 लाख रुपए दिए जाते थे। उस समय यह सिर्फ एक फीस नहीं थी, बल्कि यह इंडस्ट्री में एक बदलाव का प्रतीक था। अपनी मेहनत से बीना राय ने अपना स्टारडम बनाया। उनके नाम पर फिल्में बनतीं और बिकतीं थीं।

बीना राय का असली नाम कृष्णा सरीन था। उनके पिता रेलवे में अधिकारी थे। भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद उनका परिवार कानपुर आ गया और उन्होंने वहीं से अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के इसाबेला थोबर्न कॉलेज में दाखिला लिया। यहीं से उनके अंदर अभिनय की रुचि बढ़ने लगी। वह कॉलेज के नाटकों में भाग लेने लगीं और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा।

एक दिन उन्होंने अखबार में एक विज्ञापन देखा, जिसमें लिखा था कि निर्देशक किशोर साहू अपनी फिल्म के लिए नई अभिनेत्री की तलाश कर रहे हैं और इसके लिए एक टैलेंट कॉन्टेस्ट रखा गया है। बीना राय ने इस कॉन्टेस्ट में भाग लेने का फैसला किया, लेकिन उनके परिवार वाले इसके खिलाफ थे। उस समय फिल्म इंडस्ट्री को लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता था, लेकिन बीना राय ने हार नहीं मानी और भूख हड़ताल पर चली गईं। उनकी जिद के आगे परिवार को झुकना पड़ा और वह मुंबई चली गईं।

बीना राय ने टैलेंट कॉन्टेस्ट जीतकर 25,000 रुपए का इनाम जीता, जो उस समय बड़ी राशि मानी जाती थी। साथ ही उन्हें फिल्म 'काली घटा' के लिए साइन किया गया। इस फिल्म में उनकी खूबसूरती और अदायगी ने सभी का ध्यान खींचा। लेकिन उन्हें असली पहचान 1953 में आई फिल्म 'अनारकली' से मिली, जिसमें उन्होंने टाइटल रोल निभाया। फिल्म की सफलता ने बीना राय को रातों-रात स्टार बना दिया। फिल्म के गाने, संवाद और उनकी अदाकारी इतनी नेचुरल थीं कि लोग उन्हें असली अनारकली मानने लगे।

'अनारकली' की सफलता के बाद के. आसिफ ने अपनी फिल्म 'मुगल-ए-आजम' का ऑफर दिया, लेकिन बीना राय ने यह रोल करने से मना कर दिया। बाद में यह रोल मधुबाला को मिला, जिसने फिल्म को ऐतिहासिक बना दिया। इसके बाद उन्होंने 'घूंघट' (1960), 'ताजमहल' (1963), 'चंगेज खान', 'प्यार का सागर' और 'शगूफा' जैसी कई शानदार फिल्मों में काम किया। फिल्म 'घूंघट' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।

बीना राय का फिल्मी करियर लगभग 15 साल का रहा। जब उनका करियर अपने चरम पर था, तब उन्होंने शादी और परिवार बसाने का निर्णय लिया। उन्होंने मशहूर अभिनेता प्रेमनाथ से 1952 में विवाह किया। शादी के बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली और परिवार को प्राथमिकता दी। उनके दो बेटे हुए, जिनमें से एक, प्रेम किशन, बाद में खुद भी फिल्मों में नजर आए।

बीना राय ने 6 दिसंबर 2009 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

1950 के दशक में, जब फिल्म इंडस्ट्री पुरुषों के इशारों पर चलती थी, तब बीना राय ने अपनी शर्तों पर काम किया और अपने अभिनय से लोगों के दिलों पर राज किया। यही वजह है कि आज भी लोग उन्हें याद करते हैं। उन्होंने अभिनेत्री के रूप में ब्लैक एंड व्हाइट जमाने में भी रंग भर दिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीना राय का फिल्मी करियर कब समाप्त हुआ?
उन्होंने 2009 में इस दुनिया को अलविदा कहा।
राष्ट्र प्रेस
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