18 अगस्त 2026
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'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' का टीजर 10 लाख व्यूज़ पार, शिबोप्रसाद बोले — असली रोमांच अभी बाकी है

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'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' का टीजर 10 लाख व्यूज़ पार, शिबोप्रसाद बोले — असली रोमांच अभी बाकी है

सारांश

'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' का टीजर 10 लाख व्यूज़ पार कर चुका है — और शिबोप्रसाद मुखर्जी का कहना है कि असली रोमांच अभी बाकी है। डाकू बनाम पुलिस अधिकारी की यह कहानी मालदा की गम्भीरा लोक परंपरा के रंग में रंगी है। दुर्गा पूजा 2026 पर रिलीज़।

मुख्य बातें

'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' का टीजर 10 लाख से अधिक व्यूज़ बटोर चुका है।
शिबोप्रसाद मुखर्जी कुख्यात डाकू बिक्रम प्रमाणिक और जीशु सेनगुप्ता दृढ़निश्चयी पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं।
फिल्म में मालदा के गम्भीरा लोक कलाकारों की पारंपरिक प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।
निर्देशन नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने मिलकर किया; निर्माण विंडोज प्रोडक्शन के बैनर तले।
फिल्म दुर्गा पूजा 2026 पर रिलीज़ होने की तैयारी में है।

बंगाली सिनेमा के जाने-माने अभिनेता-फिल्मकार शिबोप्रसाद मुखर्जी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' का टीजर रिलीज होते ही 10 लाख से अधिक व्यूज़ बटोर चुका है। 18 अगस्त को जारी इस टीजर में शिबोप्रसाद और जीशु सेनगुप्ता के किरदारों के बीच तीखी भिड़ंत की झलक ने दर्शकों की उत्सुकता को नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। फिल्म दुर्गा पूजा 2026 पर बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए तैयार है।

किरदारों का टकराव — कहानी का केंद्र

फिल्म में शिबोप्रसाद मुखर्जी कुख्यात डाकू बिक्रम प्रमाणिक की भूमिका में हैं — एक ऐसा किरदार जो बदले की आग लेकर वापस लौटता है और कानून की बजाय अपने बनाए नियमों के दम पर जीता है। दूसरी तरफ जीशु सेनगुप्ता एक दृढ़निश्चयी पुलिस अधिकारी के रूप में उस डाकू का पीछा करने में जुटे हैं। दोनों किरदारों के रास्ते और मूल्य बिल्कुल विपरीत हैं, और यही विरोधाभास फिल्म के नाटकीय तनाव की रीढ़ है।

शिबोप्रसाद ने क्या कहा

शिबोप्रसाद ने बातचीत में कहा, 'टीजर को दर्शकों से जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली है, उससे पूरी टीम काफी उत्साहित है। टीजर ने 10 लाख से ज़्यादा व्यूज़ पार कर लिए हैं, लेकिन मैं कहना चाहूँगा कि यह टीजर अभी कुछ भी नहीं है — असली रोमांच अभी बाकी है, और दर्शकों को फिल्म में जिस दुनिया से रूबरू कराया जाएगा, वह उन्हें जबरदस्त रोमांच का अनुभव देगी।'

जीशु सेनगुप्ता के साथ अपने किरदार की भिड़ंत पर उन्होंने जोड़ा, 'हमारे किरदारों के बीच एक विरोधी रिश्ता है। दोनों कानून के बिल्कुल अलग-अलग पक्षों पर खड़े हैं। जीशु फिल्म में एक बेखौफ और लगातार अपराधी का पीछा करने वाले पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रहे हैं, जबकि मैं एक ऐसे कुख्यात डाकू की भूमिका में हूँ जो अपने नियमों के मुताबिक चलता है। ऐसे में हमारा आमना-सामना कहानी में तनाव और रोमांच पैदा करता है।'

बंगाल की लोक संस्कृति — फिल्म का अनूठा रंग

फिल्म की एक विशेष पहचान यह भी है कि इसमें मालदा के गम्भीरा लोक कलाकारों को शामिल किया गया है। उनके पारंपरिक गीत, मुखौटे और लोक प्रस्तुतियाँ फिल्म की दृश्यभाषा को एक अलग सांस्कृतिक गहराई देती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाली सिनेमा में लोक-संस्कृति को मुख्यधारा के कथानक से जोड़ने की प्रवृत्ति तेज़ हो रही है।

स्टारकास्ट और निर्माण

फिल्म में शिबोप्रसाद मुखर्जी, जीशु सेनगुप्ता, कौशानी मुखर्जी और सोहिनी सरकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। निर्देशन की ज़िम्मेदारी नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने साझा की है, जबकि फिल्म विंडोज प्रोडक्शन के बैनर तले बनी है। 'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' के दुर्गा पूजा 2026 पर रिलीज़ होने की तैयारी है — और अगर टीजर की प्रतिक्रिया कोई संकेत है, तो यह बंगाली सिनेमा के उत्सवी सीज़न की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो फिल्म को पर्यटन-पोस्टकार्ड से आगे ले जाता है। हालाँकि असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह लोक-आत्मा व्यावसायिक कथानक के साथ सहज रूप से घुल-मिल पाती है — या महज़ सजावट बनकर रह जाती है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' कब रिलीज़ होगी?
फिल्म को दुर्गा पूजा 2026 पर रिलीज़ करने की तैयारी है। यह बंगाली सिनेमा के सबसे बड़े उत्सवी सीज़न में से एक है।
फिल्म में शिबोप्रसाद मुखर्जी कौन-सा किरदार निभा रहे हैं?
शिबोप्रसाद मुखर्जी फिल्म में कुख्यात डाकू बिक्रम प्रमाणिक की भूमिका में हैं, जो बदले की भावना के साथ वापस लौटता है और अपने बनाए नियमों पर चलता है।
जीशु सेनगुप्ता का किरदार क्या है?
जीशु सेनगुप्ता एक बेखौफ और दृढ़निश्चयी पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं, जो डाकू बिक्रम प्रमाणिक को पकड़ने के लिए लगातार उसका पीछा करता है। दोनों किरदारों का यही विरोधी रिश्ता फिल्म के कथानक की धुरी है।
'बहुरूपी-द गोल्डन डाकू' में लोक संस्कृति का क्या महत्त्व है?
फिल्म में मालदा के गम्भीरा लोक कलाकारों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उनके पारंपरिक गीत, मुखौटे और लोक प्रस्तुतियाँ फिल्म को एक अलग सांस्कृतिक पहचान देती हैं।
फिल्म का निर्देशन और निर्माण किसने किया है?
फिल्म का निर्देशन नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने संयुक्त रूप से किया है। निर्माण विंडोज प्रोडक्शन के बैनर तले हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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