चंकी पांडे ने खोला डेविड धवन का राज़: 'शूटिंग में इतने डूब जाते थे कि लोगों को पकड़कर रोकना पड़ता था'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता चंकी पांडे ने दिग्गज फिल्ममेकर डेविड धवन के साथ बिताए अपने फिल्मी सफर की एक बेहद दिलचस्प और हँसाने वाली याद ताज़ा की है। उन्होंने बताया कि डेविड धवन शूटिंग के दौरान सीन में इस कदर रम जाते थे कि सेट पर मौजूद लोगों को उन्हें शाब्दिक रूप से पकड़कर पीछे रखना पड़ता था — ताकि वे कैमरे के फ्रेम में न घुस जाएँ। यह किस्सा सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के लोकप्रिय शो 'इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5' के आगामी एपिसोड में सामने आया।
मुख्य किस्सा: फ्रेम में घुसते डेविड धवन
चंकी पांडे ने बताया कि उस दौर में शूटिंग सेट पर आज जैसी तकनीक नहीं होती थी — न मॉनिटर, न डिजिटल प्लेबैक। निर्देशक को पूरा सीन अपने दिमाग़ में ही देखना और महसूस करना पड़ता था। डेविड धवन जब 'स्टार्ट, साउंड, कैमरा, एक्शन' बोलते थे, तो वे खुद भी उस सीन की ऊर्जा में इस तरह बह जाते थे कि अनजाने में कैमरे के फ्रेम की तरफ खिंचते चले जाते थे। चंकी के मुताबिक, ऐसे में सेट के लोगों को उन्हें पकड़कर पीछे खींचना पड़ता था।
चंकी ने इसे डेविड धवन के काम के प्रति असाधारण जुनून और समर्पण की निशानी बताया, न कि कोई चूक। उनके अनुसार, यही वह जज़्बा था जो डेविड की फिल्मों को भीड़ से अलग करता था।
एडिटर से निर्देशक: डेविड धवन की खास काबिलियत
चंकी पांडे ने यह भी खुलासा किया कि डेविड धवन फिल्मों में निर्देशन से पहले एक अनुभवी एडिटर रह चुके थे। इस पृष्ठभूमि का असर उनकी शूटिंग शैली पर साफ़ दिखता था — वे शूट करते वक्त ही दिमाग़ में एडिटिंग करते जाते थे। उन्हें पहले से पता होता था कि कौन-सा शॉट कहाँ कटेगा और दर्शकों पर उसका क्या असर होगा।
चंकी ने कहा कि डेविड उन सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में से एक हैं जिनके साथ उन्होंने काम किया है। उनके निर्देशन में काम करना हमेशा एक विशेष अनुभव रहा।
करिश्मा कपूर ने भी जोड़ी अपनी बात
इसी शो में अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने भी चंकी की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि डेविड धवन के दिमाग़ में पूरा सीन पहले से चलता रहता था — खासकर कॉमेडी सीन को लेकर वे मानसिक रूप से उसकी एडिटिंग पहले ही कर चुके होते थे। करिश्मा के अनुसार, यही उनकी वह खासियत थी जिसने उन्हें 1990 के दशक की कॉमेडी फिल्मों का सबसे कामयाब निर्देशक बनाया।
डेविड-चंकी की जोड़ी और यादगार फिल्में
डेविड धवन और चंकी पांडे ने कई फिल्मों में एक साथ काम किया है। 1993 में आई फिल्म 'आंखें' में दोनों नज़र आए थे, जिसमें गोविंदा और चंकी पांडे मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद 2011 में फिल्म 'रास्कल्स' में भी दोनों ने साथ काम किया।
गौरतलब है कि डेविड धवन, गोविंदा और करिश्मा कपूर की तिकड़ी ने 'राजा बाबू', 'कुली नंबर 1', 'साजन चले ससुराल', 'हीरो नंबर 1' और 'हसीना मान जाएगी' जैसी फिल्मों से दर्शकों को खूब हँसाया। इन फिल्मों ने डेविड धवन की विशिष्ट कॉमेडी शैली को बॉलीवुड में एक अलग पहचान दिलाई।
डेविड धवन की आखिरी फिल्म और आगे का सफर
डेविड धवन की आने वाली फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' में उनके बेटे वरुण धवन के साथ मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े नज़र आएंगी। डेविड पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं कि यह फिल्म उनके निर्देशन करियर की अंतिम फिल्म होगी। ऐसे में चंकी पांडे का यह किस्सा न केवल एक पुरानी यादगार पल है, बल्कि एक ऐसे फिल्मकार के सिनेमाई जुनून की झलक भी है जो पर्दे के पीछे रहकर भी हर सीन में पूरी तरह जीता था।