'मैंने प्यार किया' में पहले चुने गए थे फराज खान, बीमारी ने छीना मौका — मुश्किल घड़ी में सलमान बने सहारा
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता फराज खान की ज़िंदगी की कहानी उन अनकही दास्तानों में से एक है, जो सिनेमा के चमकते परदे के पीछे छुपी रह जाती हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि 1989 में आई सुपरहिट फिल्म 'मैंने प्यार किया' के लिए सबसे पहले फराज खान को ही चुना गया था, लेकिन शूटिंग से पहले ही बीमारी ने उनका यह सपना छीन लिया। वही भूमिका बाद में सलमान खान को मिली और उनका करियर सितारों की बुलंदी पर पहुँच गया। इस कहानी का एक और मार्मिक पहलू यह है कि दशकों बाद, जब फराज खान जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे थे, तब सलमान खान ही उनकी मदद के लिए आगे आए।
फराज खान: पृष्ठभूमि और शुरुआती सफर
फराज खान का जन्म 27 मई 1970 को मुंबई में हुआ था। वह अभिनेता यूसुफ खान के बड़े बेटे थे, जो फिल्म इंडस्ट्री में 'जिबिस्को' के नाम से जाने जाते थे और कई फिल्मों में अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज करा चुके थे। फिल्मी माहौल में पले-बढ़े फराज का बचपन से ही अभिनय की दुनिया में कदम रखने का सपना था।
'मैंने प्यार किया' और वह अधूरा मौका
जब निर्देशक सूरज बड़जात्या अपनी फिल्म 'मैंने प्यार किया' के लिए नए चेहरे की तलाश कर रहे थे, तब ऑडिशन में सलमान खान और दीपक तिजोरी समेत कई युवा अभिनेता शामिल हुए थे। बताया जाता है कि बड़जात्या को फराज खान सबसे अधिक पसंद आए और उन्हें लगभग चुन भी लिया गया था। लेकिन शूटिंग शुरू होने से पहले ही फराज को पीलिया हो गया। लंबे इलाज के कारण वह इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन सके, और यह भूमिका सलमान खान को मिल गई — जो उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुई।
बॉलीवुड में देर से आगमन और मिली-जुली सफलता
फराज खान ने आखिरकार 1996 में फिल्म 'फरेब' से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म में सुमन रंगनाथन और मिलिंद गुनाजी भी थे, और गाना 'तेरी आंखें झुकी-झुकी' खासा लोकप्रिय हुआ। इसके बाद वह 'पृथ्वी' में सुनील शेट्टी के साथ नज़र आए।
1998 में आई फिल्म 'मेहंदी' ने उन्हें पहचान दिलाई, जिसमें रानी मुखर्जी उनके साथ थीं। दहेज जैसी सामाजिक समस्या पर आधारित इस फिल्म में फराज ने एक लालची पति का किरदार निभाया, जो उस दौर में काफी चर्चित रहा। हालाँकि यह पहचान उनके करियर को आगे नहीं ले जा सकी। 'दुल्हन बनूं मैं तेरी', 'दिल ने फिर याद किया' और 'चांद बुझ गया' जैसी फिल्मों में काम करने के बावजूद बड़ी सफलता उनसे दूर रही। धीरे-धीरे फिल्मों में काम कम होने पर उन्होंने टेलीविज़न की ओर रुख किया और 'लिपस्टिक', 'अचानक 37 साल बाद' तथा 'श्श्श्श...कोई है' जैसे शोज़ में नज़र आए।
बीमारी और सलमान खान की मदद
2020 में फराज खान की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। वह न्यूरोलॉजिकल बीमारी और सीने के संक्रमण से जूझ रहे थे। उन्हें बेंगलुरु के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ वह वेंटिलेटर पर रहे। परिवार को इलाज के लिए आर्थिक मदद की ज़रूरत पड़ी। अभिनेत्री पूजा भट्ट ने सोशल मीडिया पर मदद की अपील की, जिसके बाद सलमान खान ने आगे आकर फराज के मेडिकल बिल भरे। इस जानकारी को अभिनेत्री कश्मीरा शाह ने सोशल मीडिया पर साझा किया था।
निधन और विरासत
डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद फराज खान को नहीं बचाया जा सका। 4 नवंबर 2020 को उनका निधन हो गया। उनकी कहानी बॉलीवुड की उस कड़वी सच्चाई की याद दिलाती है, जहाँ किस्मत का एक मोड़ पूरे करियर की दिशा बदल देता है — और जहाँ कभी-कभी इंसानियत, शोहरत से बड़ी साबित होती है।