सरोज खान: ३ साल की उम्र से बाल कलाकार, फिर बनीं बॉलीवुड की 'मदर ऑफ कोरियोग्राफी'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड की महान कोरियोग्राफर सरोज खान का जीवन संघर्ष, साधना और असाधारण प्रतिभा की वह गाथा है जिसे भारतीय सिनेमा कभी नहीं भूल सकता। 22 नवंबर 1948 को एक साधारण परिवार में जन्मी सरोज ने महज 3 वर्ष की आयु में बाल कलाकार के रूप में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर में सैकड़ों फिल्मों को अपनी कोरियोग्राफी से अमर कर दिया। 3 जुलाई 2020 को उनके निधन के बाद भी उनके द्वारा रचे गए डांस नंबर आज करोड़ों दर्शकों के दिलों में जीवित हैं।
बचपन का संघर्ष और फिल्मी दुनिया में पहला कदम
सरोज खान का बचपन आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के बोझ तले बीता। जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते हैं, उस उम्र में सरोज परिवार की मदद के लिए कैमरे के सामने खड़ी थीं। बाल कलाकार के रूप में काम समाप्त होने के बाद उन्हें अचानक इंडस्ट्री से बाहर होना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
इसके बाद उन्होंने बैकग्राउंड डांसर के रूप में अपनी यात्रा जारी रखी। फिल्म 'हावड़ा ब्रिज' में उन्हें पहला बड़ा मौका मिला, जहाँ वह बैकग्राउंड डांसर के रूप में नज़र आईं। कैमरे की रोशनी से दूर रहकर भी वह हर स्टेप को पूरी तन्मयता से महसूस करती थीं — यही उनकी असली पाठशाला बनी।
कोरियोग्राफर के रूप में उदय: 'गीता मेरा नाम' से शुरुआत
1974 में फिल्म 'गीता मेरा नाम' से सरोज खान ने कोरियोग्राफर के रूप में अपना नया अध्याय शुरू किया। यह वह मोड़ था जब वह केवल एक डांसर नहीं, बल्कि एक रचनाकार बन गईं। उनकी विशेषता यह थी कि वह डांस को महज स्टेप्स का संग्रह नहीं मानती थीं — हर गाने को वह एक भावनात्मक कहानी की तरह पर्दे पर उतारती थीं।
इसके बाद बॉलीवुड पर उनका जादू चलता ही रहा। 'मिस्टर इंडिया' का 'हवा हवाई', 'तेजाब' का 'एक दो तीन', 'बेटा' का 'धक धक करने लगा' और 'देवदास' का 'डोला रे डोला' — ये गाने केवल संगीत नहीं, बल्कि एक पूरे युग की पहचान बन गए। इन गानों ने भारतीय सिनेमा में डांस को एक नई गरिमा दी।
श्रीदेवी से माधुरी तक — हर अभिनेत्री में जगाई अलग चमक
सरोज खान की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह हर अभिनेत्री की अपनी पहचान और शारीरिक भाषा को समझकर उसके अनुरूप कोरियोग्राफी तैयार करती थीं। श्रीदेवी की अदाकारी हो, माधुरी दीक्षित की भाव-भंगिमा हो, रेखा का शास्त्रीय अंदाज़ हो या ऐश्वर्या राय की भव्यता — हर किसी के डांस में सरोज खान की अमिट छाप दिखती थी।
उनका करियर 40 से अधिक वर्षों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने सैकड़ों फिल्मों को कोरियोग्राफ किया। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से नवाज़ा गया। बाद में वह टेलीविज़न की दुनिया में भी आईं और 'झलक दिखला जा' तथा 'नच बलिए' जैसे लोकप्रिय शोज़ में जज के रूप में दर्शकों के बीच नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहीं।
निजी जीवन के उतार-चढ़ाव
सरोज खान का निजी जीवन भी उनके करियर की तरह ही उतार-चढ़ाव से भरा रहा। लगभग 13 वर्ष की आयु में उन्होंने सोहनलाल से विवाह किया, जो उनसे करीब 30 साल बड़े थे और पहले से विवाहित तथा चार बच्चों के पिता थे। इस विवाह से सरोज को 3 बच्चे हुए, लेकिन यह रिश्ता अधिक समय तक नहीं टिक सका। बाद में उन्होंने सरदार रोशन खान से विवाह किया।
इन व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने काम से कभी समझौता नहीं किया और बॉलीवुड में अपनी अलग साख बनाए रखी।
विरासत जो अमर है
3 जुलाई 2020 को सरोज खान के निधन की खबर ने पूरे फिल्म जगत को शोक में डुबो दिया। लेकिन उनकी विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है। जब भी बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ डांस नंबरों की चर्चा होती है, सरोज खान का नाम सबसे पहले लिया जाता है। आने वाली पीढ़ियों के कोरियोग्राफरों के लिए वह हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।