सरोज खान पुण्यतिथि: सुभाष घई बोले — 'हीरो' से 'कलंक' तक, मास्टरजी हमेशा याद रहेंगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सिनेमा की अविस्मरणीय कोरियोग्राफर सरोज खान की पाँचवीं पुण्यतिथि पर 3 जुलाई 2025 को फिल्म जगत ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मशहूर फिल्म निर्माता सुभाष घई ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उनके साथ अपने दशकों लंबे सफर को याद किया और कहा कि सरोज खान सिर्फ एक कोरियोग्राफर नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की एक 'इंस्टीट्यूशन' थीं।
सुभाष घई की भावुक श्रद्धांजलि
घई ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'प्रिय सरोज खान, भारतीय सिनेमा आपको हमेशा याद करेगा। आप एक ऐसी कोरियोग्राफर थीं, जिनमें गजब की सहज प्रतिभा और कलात्मक समझ थी।' उन्होंने आगे कहा कि सरोज खान हर गाने में गीतकार, संगीतकार और निर्देशक की सोच का पूरा सम्मान करती थीं। घई ने स्वीकार किया, 'हमने साथ काम किया, बहस भी की, कई बार सहमत हुए और कई बार असहमत भी, लेकिन एक निर्देशक के रूप में मेरी हर फिल्म का आप अहम हिस्सा थीं।'
गैर-डांसरों को डांसर बनाने की अद्भुत क्षमता
घई ने सरोज खान की उस विशेष प्रतिभा को रेखांकित किया जो उन्हें बाकी कोरियोग्राफरों से अलग करती थी — नए और डांस न जानने वाले कलाकारों को भी बेहतरीन डांसर बना देने की क्षमता। उन्होंने याद दिलाया कि सरोज खान ने फिल्म 'हीरो' में जैकी श्रॉफ और 'राम लखन' में माधुरी दीक्षित को किस कुशलता से तैयार किया था। गौरतलब है कि 1983 में फिल्म 'हीरो' के लिए शुरू हुए पहले फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर पुरस्कार की विजेता भी सरोज खान ही थीं।
सरोज खान का अतुलनीय करियर
प्यार से 'मास्टरजी' कहलाने वाली सरोज खान ने अपने लंबे करियर में 2,000 से अधिक गानों की कोरियोग्राफी की। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकीं इस महान कलाकार के यादगार गीतों में 'बेटा' का 'धक-धक करने लगा', 'तेजाब' का 'एक दो तीन' और 'मिस्टर इंडिया' का 'हवा हवाई' शामिल हैं। बतौर कोरियोग्राफर उनकी अंतिम फिल्म 'कलंक' थी, जिसमें माधुरी दीक्षित नज़र आई थीं।
निधन और फिल्म जगत का शोक
सरोज खान का 3 जुलाई 2020 को 71 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया था। उनके जाने पर अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान समेत फिल्म जगत की अनेक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया था। सुभाष घई ने अपनी श्रद्धांजलि में लिखा, 'आप हमेशा एक महान कोरियोग्राफर और शानदार इंसान के रूप में याद की जाएंगी।'
मुक्ता आर्ट्स के साथ विशेष रिश्ता
घई ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मुक्ता आर्ट्स के लिए सरोज खान का योगदान हमेशा यादगार रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी फिल्म उद्योग में कोरियोग्राफी की कला को उसका उचित सम्मान दिलाने की बात फिर से उठ रही है। सरोज खान ने अपने काम से यह साबित किया कि कोरियोग्राफर किसी फिल्म की आत्मा को आकार देने में उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना निर्देशक या संगीतकार।