29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुभाष घई ने ओशो को बताया जीवन का सबसे बड़ा गुरु: '1975 से आज तक उनकी शिक्षाएँ मेरे साथ हैं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुभाष घई ने ओशो को बताया जीवन का सबसे बड़ा गुरु: '1975 से आज तक उनकी शिक्षाएँ मेरे साथ हैं'

सारांश

बॉलीवुड के दिग्गज निर्माता सुभाष घई ने 50 साल बाद खुलकर कहा — ओशो ने उनकी ज़िंदगी बदली। 1975 से शुरू हुआ यह आध्यात्मिक सफर आज भी जारी है। विनोद खन्ना की तरह घई भी उन फिल्मी हस्तियों में शामिल हैं जिन पर ओशो की विचारधारा का गहरा असर रहा।

मुख्य बातें

सुभाष घई ने 29 जुलाई को इंस्टाग्राम पर ओशो के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
घई ने कहा कि उन्होंने 1975 में ओशो को पढ़ा और तब से उनकी शिक्षाएँ उनके जीवन का हिस्सा हैं।
उनके अनुसार ओशो ने उन्हें आत्म-ज्ञान, आंतरिक शक्ति और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की क्षमता दी।
दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना भी ओशो के अनुयायी रहे और करियर के शीर्ष पर अमेरिका के ओरेगन स्थित आश्रम रजनीशपुरम चले गए थे।
ओशो मूवमेंट की शुरुआत 1970 के दशक में हुई, जो बाद में वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन बना।

फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई ने आध्यात्मिक गुरु ओशो (आचार्य रजनीश) के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है, यह कहते हुए कि ओशो की शिक्षाओं ने उन्हें आत्म-ज्ञान, आंतरिक शक्ति और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की क्षमता दी। 29 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की गई एक तस्वीर और पोस्ट के ज़रिए घई ने यह भावनात्मक स्वीकारोक्ति की।

इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या कहा घई ने

सुभाष घई ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मुझे गुरु की कीमत समझने में 50 साल लग गए। 1975 में मैंने ओशो को पढ़ा, जिन्होंने आज तक मुझे अपने बारे में, लोगों के बारे में और अंतिम सत्य के बारे में लगातार ज्ञान दिया। उन्होंने मुझे अपने अंदर की शक्ति को पहचानने और हर स्तर पर आगे बढ़ने की ताकत दी।'

उन्होंने आगे लिखा, 'मैं इस महान गुरु ओशो के प्रति अपनी कृतज्ञता कैसे व्यक्त करूं, जिन्होंने मुझे आज तक एक खुशहाल और शांतिपूर्ण जीवन दिया। धन्यवाद कहना भी बहुत छोटा शब्द है।' तस्वीर में घई ओशो की छवि वाले एक प्रचार-पोस्टर के सामने खड़े नज़र आ रहे हैं।

ओशो मूवमेंट की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ओशो मूवमेंट की नींव 1970 के दशक में रखी गई थी, जो आगे चलकर एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में पहचाना गया। इस आंदोलन में ध्यान, आत्म-जागरूकता, मानसिक शांति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया। ओशो की विचारधारा पारंपरिक धार्मिक सोच से भिन्न थी, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर विमर्श का विषय बनाया — समर्थन और विवाद, दोनों का।

बॉलीवुड और ओशो का पुराना नाता

सुभाष घई अकेले फिल्मी हस्ती नहीं हैं जिनका ओशो से गहरा जुड़ाव रहा है। दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना भी ओशो के प्रमुख अनुयायियों में शामिल रहे। अपने करियर के शीर्ष पर रहते हुए उन्होंने फिल्मों से किनारा कर अमेरिका के ओरेगन स्थित ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में जाने का निर्णय लिया था।

यह फैसला उस दौर में बॉलीवुड के लिए अप्रत्याशित था, क्योंकि विनोद खन्ना उस समय उद्योग के शीर्षस्थ सितारों में गिने जाते थे। आश्रम में उन्होंने ध्यान के साथ-साथ बागवानी और दैनिक कार्यों में भी सहभागिता की। कई वर्षों बाद भारत लौटने पर उन्होंने फिल्मी करियर पुनः शुरू किया।

घई की आध्यात्मिक यात्रा का संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक जीवन में मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-जागरूकता पर बातचीत तेज़ हो रही है। घई की यह स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि सफलता के शिखर पर पहुँचे व्यक्ति भी आंतरिक मार्गदर्शन की तलाश करते हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ उनका आंदोलन विवादों से भी घिरा रहा है। बॉलीवुड में घई और विनोद खन्ना जैसे नाम यह दर्शाते हैं कि ओशो का प्रभाव सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं था। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सेलेब्रिटी कनेक्शन की भावनात्मक परत पर रुक जाती है — लेकिन असली सवाल यह है कि इन अनुभवों ने उनकी रचनात्मकता और फैसलों को किस हद तक आकार दिया।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुभाष घई ने ओशो के बारे में क्या कहा?
सुभाष घई ने कहा कि 1975 से ओशो की शिक्षाएँ उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं और उन्होंने उन्हें आत्म-ज्ञान व आंतरिक शक्ति दी। उन्होंने ओशो को 'महान गुरु' कहते हुए उनके प्रति कृतज्ञता जताई और कहा कि 'धन्यवाद' भी बहुत छोटा शब्द है।
ओशो मूवमेंट क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
ओशो मूवमेंट की शुरुआत 1970 के दशक में आचार्य रजनीश (ओशो) के नेतृत्व में हुई थी। यह आंदोलन ध्यान, आत्म-जागरूकता, मानसिक शांति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर केंद्रित था और बाद में वैश्विक स्तर पर फैला।
विनोद खन्ना का ओशो से क्या संबंध था?
अभिनेता विनोद खन्ना ओशो के प्रमुख अनुयायियों में से एक थे। अपने बॉलीवुड करियर के शीर्ष पर उन्होंने फिल्में छोड़कर अमेरिका के ओरेगन स्थित ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में जाने का फैसला किया था, जहाँ उन्होंने ध्यान और दैनिक कार्यों में हिस्सा लिया।
क्या बॉलीवुड में ओशो के अन्य अनुयायी भी रहे हैं?
हाँ, सुभाष घई और विनोद खन्ना दोनों ही ओशो की विचारधारा से प्रभावित रहे हैं। विनोद खन्ना ने तो अपना सक्रिय फिल्मी करियर कुछ समय के लिए छोड़ दिया था, जबकि घई ने ओशो को अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक बताया है।
सुभाष घई ने ओशो को कब पढ़ना शुरू किया?
सुभाष घई के अनुसार उन्होंने 1975 में पहली बार ओशो को पढ़ा। उन्होंने कहा कि गुरु की वास्तविक कीमत समझने में उन्हें 50 साल लग गए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले