सुभाष घई ने ओशो को बताया जीवन का सबसे बड़ा गुरु: '1975 से आज तक उनकी शिक्षाएँ मेरे साथ हैं'
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई ने आध्यात्मिक गुरु ओशो (आचार्य रजनीश) के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है, यह कहते हुए कि ओशो की शिक्षाओं ने उन्हें आत्म-ज्ञान, आंतरिक शक्ति और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की क्षमता दी। 29 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की गई एक तस्वीर और पोस्ट के ज़रिए घई ने यह भावनात्मक स्वीकारोक्ति की।
इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या कहा घई ने
सुभाष घई ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मुझे गुरु की कीमत समझने में 50 साल लग गए। 1975 में मैंने ओशो को पढ़ा, जिन्होंने आज तक मुझे अपने बारे में, लोगों के बारे में और अंतिम सत्य के बारे में लगातार ज्ञान दिया। उन्होंने मुझे अपने अंदर की शक्ति को पहचानने और हर स्तर पर आगे बढ़ने की ताकत दी।'
उन्होंने आगे लिखा, 'मैं इस महान गुरु ओशो के प्रति अपनी कृतज्ञता कैसे व्यक्त करूं, जिन्होंने मुझे आज तक एक खुशहाल और शांतिपूर्ण जीवन दिया। धन्यवाद कहना भी बहुत छोटा शब्द है।' तस्वीर में घई ओशो की छवि वाले एक प्रचार-पोस्टर के सामने खड़े नज़र आ रहे हैं।
ओशो मूवमेंट की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ओशो मूवमेंट की नींव 1970 के दशक में रखी गई थी, जो आगे चलकर एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में पहचाना गया। इस आंदोलन में ध्यान, आत्म-जागरूकता, मानसिक शांति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया। ओशो की विचारधारा पारंपरिक धार्मिक सोच से भिन्न थी, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर विमर्श का विषय बनाया — समर्थन और विवाद, दोनों का।
बॉलीवुड और ओशो का पुराना नाता
सुभाष घई अकेले फिल्मी हस्ती नहीं हैं जिनका ओशो से गहरा जुड़ाव रहा है। दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना भी ओशो के प्रमुख अनुयायियों में शामिल रहे। अपने करियर के शीर्ष पर रहते हुए उन्होंने फिल्मों से किनारा कर अमेरिका के ओरेगन स्थित ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में जाने का निर्णय लिया था।
यह फैसला उस दौर में बॉलीवुड के लिए अप्रत्याशित था, क्योंकि विनोद खन्ना उस समय उद्योग के शीर्षस्थ सितारों में गिने जाते थे। आश्रम में उन्होंने ध्यान के साथ-साथ बागवानी और दैनिक कार्यों में भी सहभागिता की। कई वर्षों बाद भारत लौटने पर उन्होंने फिल्मी करियर पुनः शुरू किया।
घई की आध्यात्मिक यात्रा का संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक जीवन में मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-जागरूकता पर बातचीत तेज़ हो रही है। घई की यह स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि सफलता के शिखर पर पहुँचे व्यक्ति भी आंतरिक मार्गदर्शन की तलाश करते हैं। उनकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।