'गुलाबो सिताबो' के 6 साल: शूजित सरकार ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया मिर्जा-बांके का यादगार सीन
सारांश
मुख्य बातें
निर्देशक शूजित सरकार की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म 'गुलाबो सिताबो' ने 12 जून 2025 को अपनी ओटीटी रिलीज के 6 साल पूरे कर लिए। इस खास मौके पर सरकार ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक चर्चित सीन साझा किया, जिसमें अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना अपने किरदारों — कंजूस मकान मालिक मिर्जा और जिद्दी किराएदार बांके — के रूप में जोरदार बहस करते नजर आ रहे हैं। निर्देशक ने क्लिप के साथ लिखा, "फिल्म गुलाबो सिताबो के 6 साल पूरे होने का जश्न।"
फिल्म की कहानी और पात्र
साल 2020 में रिलीज हुई इस हिंदी कॉमेडी-ड्रामा की पटकथा जूही चतुर्वेदी ने लिखी थी और इसे रोनी लाहिड़ी तथा शील कुमार ने निर्मित किया था। फिल्म लखनऊ की एक सौ साल पुरानी जर्जर हवेली 'फातिमा महल' के इर्द-गिर्द बुनी गई है। 78 वर्षीय मिर्जा अपनी 95 वर्षीय बेगम फातिमा की उस हवेली का कानूनी मालिक बनने के लिए बेताब है, जबकि बांके मात्र 30-70 रुपये मासिक किराये पर वर्षों से वहाँ डटा हुआ है।
फिल्म में फर्रुख जाफर ने बेगम और विजय राज ने पुरातत्व अधिकारी की भूमिका निभाई। मिर्जा और बांके के बीच की नोंकझोंक, चालाकी और स्वार्थ से भरी इस जंग को दर्शकों ने खूब सराहा था।
ओटीटी पर रिलीज और दर्शकों की प्रतिक्रिया
कोविड-19 महामारी के चलते यह फिल्म सिनेमाघरों की बजाय सीधे अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज की गई थी — और इस तरह यह बड़े बजट की पहली हिंदी फिल्मों में से एक बनी जो ओटीटी पर सीधे उतरी। दर्शकों ने अमिताभ और आयुष्मान की जुगलबंदी को भरपूर प्यार दिया, और फिल्म आलोचकों की नज़र में भी खरी उतरी।
पुरस्कार और सम्मान
66वें फिल्मफेयर अवार्ड्स में 'गुलाबो सिताबो' को 13 श्रेणियों में नामांकन मिला और उसने 6 पुरस्कार जीते। इनमें अमिताभ बच्चन के लिए प्रतिष्ठित 'क्रिटिक्स बेस्ट एक्टर' का पुरस्कार भी शामिल था — जो इस भूमिका के लिए उनकी असाधारण अदाकारी की आलोचकीय स्वीकृति थी।
छह साल बाद भी क्यों याद है यह फिल्म
यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों की सांस्कृतिक आयु को लेकर बहस जारी है। गौरतलब है कि 'गुलाबो सिताबो' उन चुनिंदा फिल्मों में है जो महामारी के दौर में डिजिटल पर आईं और फिर भी दर्शकों के दिलों में जगह बना गईं। शूजित सरकार की यह पोस्ट इस बात की याद दिलाती है कि सिनेमा का असर सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आँकड़ों से नहीं, बल्कि किरदारों की जीवंतता से मापा जाता है।