क्या इंडस्ट्री महासागर की तरह है, जिसमें समय, धैर्य और मेहनत की जरूरत है? हरलीन कौर रेखी से जानें
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अभिनय की दुनिया में कदम रखना किसी भी व्यक्ति के लिए सरल नहीं होता। इसके लिए धैर्य, मेहनत और सीखने की इच्छा की आवश्यकता होती है। इस संदर्भ में अभिनेत्री हरलीन कौर रेखी ने राष्ट्र प्रेस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अपने करियर, अनुभव और नए प्रोजेक्ट्स के बारे में खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे थिएटर से शुरुआत करते हुए उन्होंने स्क्रीन पर पहचान बनाई और कैसे हर किरदार से उन्हें कुछ नया सीखने को मिला।
उनकी यात्रा कई उतार-चढ़ाव और सीखों से भरी रही है, जो न केवल उनके करियर को आकार देती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी प्रेरणादायक है।
राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए हरलीन कौर रेखी ने कहा, "मेरे लिए हर साल और हर भूमिका कुछ नया लेकर आती है। थिएटर के दिनों में मैं बहुत नर्वस महसूस करती थी। मेरा कोई भी कनेक्शन फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में नहीं था। इसलिए उस समय मेरे मन में सवाल हमेशा उठते रहते थे कि अगला कदम क्या होगा, किससे मिलना चाहिए, और अच्छा काम कैसे मिलेगा। श्रीराम सेंटर में ट्रेनिंग पूरी करना मेरे लिए अहम मोड़ साबित हुआ। यह समय करियर की नींव तैयार करने वाला और सीखने का अनुभव था।"
अनुभव और उम्र के साथ हरलीन कौर रेखी का दृष्टिकोण बदल गया। उन्होंने कहा, ''अब मुझे अभिनय और इंडस्ट्री की बेहतर समझ है। एक्टिंग की ओर झुकाव कॉलेज के दिनों में बढ़ना शुरू हुआ था, जब मैं अपने माता-पिता के साथ टीवी शो देख रही थी। अचानक मैंने अपनी मां से कहा कि मुझे लगता है कि मैं भी एक्टिंग कर सकती हूं। मां ने पूछा कि क्या मैं एक्टिंग को लेकर गंभीर हूं, इस पर मैंने आत्मविश्वास से हां में जवाब दिया। मुझे अपने परिवार का समर्थन हमेशा मिला।''
शुरुआती संघर्ष को लेकर उन्होंने बताया, ''मैंने सोचा था कि कुछ नाटक करके जल्दी मुंबई पहुंच जाएंगे। इसमें केवल कुछ महीने लगेंगे। लेकिन वास्तविकता में मैंने महसूस किया कि इंडस्ट्री महासागर की तरह है, जिसमें समय, धैर्य और मेहनत की जरूरत होती है। मैंने कई साल दिल्ली में विज्ञापन और शॉर्ट फिल्म्स में काम किया और आखिर में यह समझा कि अब मुंबई जाने का सही समय है।''
उन्होंने बताया, ''मैंने जल्दी ही ऑडिशन पास कर लिया। लेकिन केवल एक सीन से किसी भी चरित्र की पूरी प्रस्तुति नहीं आ जाती। वर्कशॉप में टीम ने मुझे समझाया कि लगातार एक ही टोन में अभिनय करना बोरिंग लग सकता है। तब मैंने सीखा कि परिस्थिति के अनुसार अपने अभिनय को बदलना कितना जरूरी है, कभी हल्का, कभी तीव्र, कभी संयमित। इस सीख ने सेट पर मेरे प्रदर्शन को बदला।''