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ईशा कोप्पिकर का बॉलीवुड पर तीखा सवाल: 'पुरुषों की उम्र अनुभव, महिलाओं की उम्र समस्या क्यों?'

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ईशा कोप्पिकर का बॉलीवुड पर तीखा सवाल: 'पुरुषों की उम्र अनुभव, महिलाओं की उम्र समस्या क्यों?'

सारांश

ईशा कोप्पिकर का यह सवाल सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं — यह उस सोच पर चोट है जो पुरुष की उम्र को 'अनुभव' और महिला की उम्र को 'समस्या' बताती है। इंस्टाग्राम वीडियो के ज़रिए उठाई गई यह आवाज़ उस पुरानी लकीर को चुनौती देती है जो परदे पर और समाज में महिलाओं को उनकी उम्र से परिभाषित करती है।

मुख्य बातें

ईशा कोप्पिकर ने 3 जुलाई 2026 को इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर बॉलीवुड में उम्र के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि पुरुष कलाकारों की बढ़ती उम्र को 'अनुभव' और महिलाओं की बढ़ती उम्र को 'समस्या' माना जाता है।
'दे दे प्यार दे' , 'टीकू वेड्स शेरू' और 'आप जैसा कोई' जैसी फिल्मों में उम्रदराज हीरो और कम उम्र की हीरोइन की जोड़ियों को उदाहरण के तौर पर उद्धृत किया गया।
ईशा ने कहा — 'सम्मान की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती और आत्मविश्वास की भी कोई उम्र नहीं होती।' पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा कि असली खूबसूरती का उम्र से कोई संबंध नहीं।

बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने 3 जुलाई 2026 को अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की उम्र को लेकर बरते जाने वाले दोहरे मापदंड पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जहाँ बड़ी उम्र के पुरुष कलाकारों का अपने से कहीं कम उम्र की अभिनेत्रियों के साथ रोमांस करना 'सामान्य' माना जाता है, वहीं उम्रदराज महिला को उसकी उम्र की याद दिलाई जाती है।

क्या कहा ईशा कोप्पिकर ने

अभिनेत्री ने अपने वीडियो में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह बहुत अजीब बात है कि एक पुरुष की बढ़ती उम्र को अनुभव कहा जाता है, जबकि एक महिला की बढ़ती उम्र को समस्या बना दिया जाता है। फिल्मों में हम अक्सर देखते हैं कि हीरो अपनी आधी उम्र की लड़कियों के साथ रोमांस करते हैं और इसे पूरी तरह सामान्य माना जाता है।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'लेकिन अगर कोई महिला स्टाइलिश हो, अपनी बात खुलकर रखे और अपनी पहचान को जीती है, तो उससे कहा जाता है कि 'अब आपकी उम्र हो गई है, अपनी उम्र के हिसाब से व्यवहार कीजिए।' जबकि सच यह है कि समय के साथ महिला कमजोर नहीं होती, बल्कि और ज़्यादा समझदार बनती है। उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। उसकी खूबसूरती सिर्फ चेहरे में नहीं, बल्कि उसके जीवन के सफर में दिखाई देती है। चेहरे की झुर्रियाँ सिर्फ उम्र नहीं बतातीं, बल्कि उसके संघर्ष, अनुभव और जीवन की कहानी भी बयाँ करती हैं।'

बॉलीवुड में उम्र का दोहरा मापदंड

गौरतलब है कि बॉलीवुड में हाल के वर्षों में कई ऐसी फिल्में आई हैं जिनमें उम्रदराज पुरुष कलाकारों को उनसे कहीं कम उम्र की अभिनेत्रियों के साथ रोमांटिक जोड़ी के रूप में पेश किया गया। 'दे दे प्यार दे' में अजय देवगन और रकुल प्रीत सिंह, 'टीकू वेड्स शेरू' में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और अवनीत कौर तथा 'आप जैसा कोई' में आर. माधवन और फातिमा सना शेख की जोड़ियाँ इसी बहस के केंद्र में रही हैं।

आलोचकों का कहना है कि यह चलन न केवल परदे पर महिलाओं की भूमिकाओं को सीमित करता है, बल्कि समाज में उम्र को लेकर एक विकृत नज़रिया भी स्थापित करता है।

महिला सम्मान पर ईशा का संदेश

ईशा ने अपने वीडियो में कहा, 'आपकी माँ, पत्नी, बहन, बेटी और एक दिन आप खुद भी उम्रदराज होंगे। हर किसी की उम्र बढ़ती है। इसलिए बढ़ती उम्र को अपमान का कारण मत बनाइए। हर उम्र की महिला का सम्मान कीजिए। उसकी उम्र नहीं, बल्कि उसके जीवन के सफर को देखिए। उसकी त्वचा नहीं, बल्कि उसकी ताकत को पहचानिए। याद रखिए, सम्मान की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती और आत्मविश्वास की भी कोई उम्र नहीं होती।'

अपने पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'दुनिया ने बहुत लंबे समय तक खूबसूरती को उम्र से जोड़कर देखा है। शायद असली खूबसूरती का उम्र से कभी कोई संबंध था ही नहीं।'

इंडस्ट्री में बदलाव की माँग

यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में महिलाओं की भूमिका, उनकी उम्र और उनके प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज़ हो रही है। ईशा कोप्पिकर जैसी अभिनेत्रियों की आवाज़ें इस बहस को एक नई दिशा देती हैं — जहाँ माँग है कि परदे पर और परदे के पीछे दोनों जगह महिलाओं के साथ बराबरी का व्यवहार हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सामान्य मानते रहना इंडस्ट्री की एक चुनी हुई चुप्पी है। जब कोई स्थापित अभिनेत्री इस पर खुलकर बोलती है, तो बहस ज़रूरी हो जाती है। असली सवाल यह है कि क्या इंडस्ट्री सिर्फ सोशल मीडिया पर सहमति जताएगी या स्क्रिप्ट और कास्टिंग में बदलाव लाएगी? जब तक निर्माता और निर्देशक इस ढाँचे को तोड़ने का जोखिम नहीं उठाते, तब तक ये आवाज़ें गूँजती रहेंगी — लेकिन परदे पर कुछ नहीं बदलेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईशा कोप्पिकर ने बॉलीवुड के दोहरे मापदंड पर क्या कहा?
ईशा कोप्पिकर ने कहा कि पुरुष कलाकारों की बढ़ती उम्र को 'अनुभव' माना जाता है जबकि महिलाओं की बढ़ती उम्र को 'समस्या' बना दिया जाता है। उन्होंने यह बात 3 जुलाई 2026 को इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में कही।
ईशा कोप्पिकर ने किन फिल्मों का उदाहरण दिया?
'दे दे प्यार दे' में अजय देवगन-रकुल प्रीत सिंह, 'टीकू वेड्स शेरू' में नवाजुद्दीन सिद्दीकी-अवनीत कौर और 'आप जैसा कोई' में आर. माधवन-फातिमा सना शेख की जोड़ियों को उम्र के असंतुलन के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया गया। ये सभी जोड़ियाँ उम्र में बड़े पुरुष कलाकार और कम उम्र की अभिनेत्री की थीं।
ईशा कोप्पिकर का महिला सम्मान पर क्या संदेश था?
उन्होंने कहा कि हर उम्र की महिला का सम्मान होना चाहिए और बढ़ती उम्र को अपमान का कारण नहीं बनाना चाहिए। उनके शब्दों में — 'सम्मान की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती और आत्मविश्वास की भी कोई उम्र नहीं होती।'
बॉलीवुड में महिलाओं की उम्र को लेकर यह बहस क्यों अहम है?
बॉलीवुड में लंबे समय से उम्रदराज पुरुष कलाकारों को युवा अभिनेत्रियों के साथ रोमांटिक भूमिकाओं में दिखाया जाता रहा है, जबकि उम्रदराज महिला कलाकारों को मुख्य भूमिकाएँ मिलना कम हो जाता है। आलोचकों का कहना है कि यह चलन समाज में महिलाओं के प्रति एक संकुचित नज़रिए को बढ़ावा देता है।
ईशा कोप्पिकर ने अपने इंस्टाग्राम कैप्शन में क्या लिखा?
उन्होंने कैप्शन में लिखा — 'दुनिया ने बहुत लंबे समय तक खूबसूरती को उम्र से जोड़कर देखा है। शायद असली खूबसूरती का उम्र से कभी कोई संबंध था ही नहीं।' यह संदेश उनके वीडियो के मुख्य विचार का सार था।
राष्ट्र प्रेस
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