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कसूर से पहचान, कैंसर से जीत: लीजा रे की प्रेरणादायक कहानी

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कसूर से पहचान, कैंसर से जीत: लीजा रे की प्रेरणादायक कहानी

सारांश

लीजा रे की कहानी न केवल उनकी सफलता की गाथा है, बल्कि यह संघर्ष और साहस की मिसाल भी है। कैंसर से जूझते हुए उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि सरोगेसी से माता बनने का सफर भी तय किया।

मुख्य बातें

संघर्ष और साहस का अनुपम उदाहरण कैंसर से जीतने की प्रेरणा सरोगेसी के माध्यम से मातृत्व का अनुभव फिल्मी करियर में महत्वपूर्ण उपलब्धियां सोशल मीडिया पर सक्रियता

मुंबई, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री और मॉडल लीजा रे की कहानी केवल सफलता की नहीं है, बल्कि हौसले, संघर्ष और जीवन से कभी हार न मानने की प्रेरणा है। कनाडा की इस अद्भुत एक्ट्रेस ने मॉडलिंग के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की, बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई, घातक कैंसर को मात दी और सरोगेसी के माध्यम से दो प्यारी जुड़वा बेटियों की मां बनीं।

लीजा रे का जन्म 4 अप्रैल 1972 को कनाडा के टोरंटो में हुआ था। उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। वर्ष 1996 में, नुसरत फतेह अली खान के प्रसिद्ध गाने 'आफरीन-आफरीन' में उन्होंने पहली बार स्क्रीन पर धमाल मचाया। इसके पश्चात, उन्होंने तमिल फिल्म 'नेताजी' से अभिनय की शुरुआत की। वर्ष 2001 उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना, जब उन्होंने आफताब शिवदासानी के साथ हिंदी फिल्म 'कसूर' में कदम रखा। इस थ्रिलर फिल्म में उनकी अभिनय और खूबसूरती दोनों को खूब सराहा गया।

गानों में भी वे काफी प्रभावशाली नजर आईं। इसके बाद 2004 में दीपा मेहता की फिल्म 'वॉटर' आई, जो ऑस्कर के लिए नामांकित हुई। इस फिल्म ने लीजा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और उनकी अभिनय कौशल को नई ऊंचाई दी।

लीजा रे की जिंदगी आसान नहीं रही। वर्ष 2009 में उन्हें मल्टीपल मायलोमा नामक रक्त कैंसर का पता चला। यह बीमारी बहुत खतरनाक होती है और ज्यादातर लोग इससे हार मान लेते हैं। लेकिन लीजा ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने इलाज करवाया और वर्ष 2010 में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कराकर इस बीमारी पर विजय प्राप्त की। कैंसर से उबरने के बाद भी वे दवाइयों पर निर्भर रहीं, लेकिन अपनी जिंदगी को नई दिशा देने में व्यस्त रहीं।

कैंसर पर काबू पाने के बाद लीजा ने बॉलीवुड में वापसी की। वर्ष 2015-2016 में रिलीज हुई फिल्म 'इश्क फॉरएवर' से उन्होंने फिर से दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके अलावा उन्होंने 'वीरप्पन' जैसी फिल्म में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी मेहनत और सकारात्मक सोच के चलते वे आज भी इंडस्ट्री में सक्रिय हैं।

निजी जिंदगी में भी लीजा ने कई चुनौतियों का सामना किया। कैंसर के इलाज के कारण उनकी प्राकृतिक मातृत्व क्षमता प्रभावित हो गई थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2012 में उन्होंने जेसन देहनी से शादी की। इसके बाद दंपति ने सरोगेसी का रास्ता चुना। वर्ष 2018 में जॉर्जिया के टिबिलिसी में सरोगेसी के जरिए उनकी दो जुड़वा बेटियां हुईं, जिनका नाम उन्होंने सूफी और सोलेल रखा।

लीजा ने खुद इंस्टाग्राम पर इस खुशी को साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि मां बनने की खुशी शब्दों में नहीं कह सकते। आज लीजा अपनी दोनों बेटियों के साथ खुशहाल जिंदगी बिता रही हैं। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और अक्सर बच्चों और परिवार के साथ अपनी तस्वीरें साझा करती रहती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह एक साहसी महिला की कहानी है, जिसने जीवन के कठिनतम हालात का सामना किया। उनका संघर्ष और सफलता हमें यह सिखाता है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लीजा रे का जन्म कब हुआ?
लीजा रे का जन्म 4 अप्रैल 1972 को कनाडा के टोरंटो में हुआ।
लीजा रे ने कैंसर से कैसे निपटा?
लीजा ने कैंसर का इलाज करवाया और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कर के इस बीमारी पर विजय प्राप्त की।
लीजा रे की जुड़वा बेटियों के नाम क्या हैं?
लीजा रे की जुड़वा बेटियों के नाम सूफी और सोलेल हैं।
लीजा ने बॉलीवुड में कब कदम रखा?
लीजा ने 2001 में फिल्म 'कसूर' से बॉलीवुड में कदम रखा।
लीजा रे किस प्रसिद्ध गाने में नजर आईं?
लीजा रे ने नुसरत फतेह अली खान के गाने 'आफरीन-आफरीन' में पहली बार स्क्रीन पर नजर आईं।
राष्ट्र प्रेस
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