'लॉक अप 2' में शिवांगी जोशी, हर्षद चोपड़ा और श्रेया कालरा ने किए बचपन के यौन उत्पीड़न के दर्दनाक खुलासे
सारांश
मुख्य बातें
रियलिटी शो 'लॉक अप: सच या सजा' के ताज़े एपिसोड में तीन कंटेस्टेंट्स — अभिनेत्री शिवांगी जोशी, टेलीविजन अभिनेता हर्षद चोपड़ा और कंटेंट क्रिएटर श्रेया कालरा — ने बचपन में हुए यौन उत्पीड़न के दर्दनाक अनुभव साझा किए, जिसने शो के मंच पर मौजूद सभी को भावुक कर दिया। तीनों ने यह खुलासे शो के 'सीक्रेट रिवील' सेगमेंट के दौरान किए।
शिवांगी जोशी का खुलासा
अभिनेत्री शिवांगी जोशी ने बताया कि बचपन में उनके पिता को व्यापार में भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिससे परिवार आर्थिक तंगी में आ गया। उस मुश्किल दौर में रिश्तेदारों ने परिवार की मदद की। शिवांगी ने बताया कि जब उन्होंने मुंबई जाकर अभिनेत्री बनने की इच्छा जताई, तब उनकी माँ के मुँह बोले भाई ने इसका फायदा उठाया।
शिवांगी के अनुसार, वह व्यक्ति उन्हें कार चलाना सिखाने के बहाने अपने पास बैठाता था। उन्होंने कहा, 'वे मुझसे कहते थे कि तुम मुंबई जाओगी, तो कार चलाना जरूर आना चाहिए। उस समय मुझे समझ नहीं आता था, लेकिन अच्छा भी नहीं लगता था।'
शिवांगी ने बताया कि एक दिन जब वे अकेली थीं, उस व्यक्ति ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में समझाने के बहाने गलत हरकत करने की कोशिश की। उन्होंने उसे धक्का दे दिया, जिस पर वह क्रोधित हो गया और उन्हें जमीन पर गिरा दिया। ठीक उसी वक्त उनके माता-पिता घर लौट आए और पिता ने आवाज़ सुनकर उन्हें बचाया। शिवांगी ने कहा कि इस घटना ने उन्हें इतना डरा दिया था कि कई दिनों तक वे घर से बाहर नहीं निकल पाईं।
श्रेया कालरा का बयान
कंटेंट क्रिएटर श्रेया कालरा ने बताया कि जब वे 13 साल की थीं, तब उनके एक चचेरे भाई ने उनके साथ छेड़छाड़ की थी। उन्होंने कहा, 'ये बात मेरे माता-पिता को नहीं पता है, सिर्फ मेरे पार्टनर ऋषभ जायसवाल को पता है।'
श्रेया ने बताया कि यह घटना उनकी नानी के घर हुई थी, जहाँ वे हॉल में सोती थीं और उस समय उन्हें पूरी तरह समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी की सहानुभूति नहीं चाहतीं, लेकिन वे यह नहीं चाहतीं कि उनकी माँ को इस बारे में पता चले — क्योंकि उस लड़के की माँ का निधन हो चुका था और उनकी माँ ने लगभग तीन साल तक उसकी देखभाल की थी।
हर्षद चोपड़ा की पीड़ा
टेलीविजन अभिनेता हर्षद चोपड़ा ने बताया कि जब वे लगभग 9-10 साल के थे, तब उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के घर रात बिताने के लिए छोड़ा गया था, जिस पर परिवार और पूरी कम्युनिटी भरोसा करती थी। हर्षद ने कहा, 'एक रात जब मैं उनके घर सो रहा था, तो मुझे एहसास हो रहा था कि कुछ गलत हो रहा है, लेकिन मैं डर गया था। मैंने ऐसा दिखाया जैसे मैं सो रहा हूँ।'
हर्षद ने बताया कि उस व्यक्ति ने उन्हें कुछ दिखाने के बहाने बालकनी में बुलाया और वहाँ भी गलत हरकत की। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस बारे में पहले कभी किसी से बात नहीं की क्योंकि वे डरे हुए थे और उन्हें समझ नहीं आया था कि क्या हुआ था।
भावुक होते हुए हर्षद ने सभी माता-पिता से अनुरोध किया कि वे अपने बच्चों को अकेला न छोड़ें और उनसे खुलकर बात करें।
समाज के लिए संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब बाल यौन उत्पीड़न के प्रति जागरूकता बढ़ाने की माँग पूरे देश में तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के व्यक्तिगत अनुभव साझा करना न केवल साहस का प्रतीक है, बल्कि उन लाखों बच्चों की आवाज़ भी बनता है जो अब तक चुप हैं। तीनों कंटेस्टेंट्स के खुलासों ने सोशल मीडिया पर व्यापक भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है और 'गुड टच-बैड टच' की शिक्षा को लेकर बहस को नई ऊर्जा दी है।