शिवांगी जोशी का खुलासा: 'लॉकअप-2' में बोलीं — चेहरे और मेकअप पर मज़ाक सुनकर बहुत तकलीफ होती है
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री शिवांगी जोशी ने वेब रियलिटी शो 'लॉकअप-2' में अपनी स्किन संबंधी परेशानियों और लुक्स पर मिलने वाले कमेंट्स को लेकर दिल की बात खुलकर साझा की। उन्होंने स्वीकार किया कि जब लोग उनके चेहरे और मेकअप का मज़ाक उड़ाते हैं, तो यह उन्हें गहरे तक आहत करता है। टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में लीड रोल निभा चुकीं शिवांगी पहले भी मुंहासे के निशानों को लेकर ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार हो चुकी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
शो में कंटेस्टेंट श्रेया कालरा ने शिवांगी को बार-बार 'ऐनाबेला' कहा, जिससे अभिनेत्री आहत हुईं। इस मसले पर शिवांगी ने अभिनेता राम कपूर से बातचीत की और बताया कि लुक्स से जुड़े कमेंट किसी इंसान की मानसिक स्थिति पर कितना गहरा असर डाल सकते हैं।
शिवांगी की आपबीती
शिवांगी ने कहा, 'जब श्रेया के चेहरे पर एलर्जी हो गई थी, तो मैंने पूरी कोशिश की थी कि वे सहज महसूस करें, क्योंकि मैं अच्छे से जानती हूँ कि हर कोई कितना असुरक्षित महसूस कर सकता है... मुझे तो ज़िंदगी भर मुंहासे और स्किन की प्रॉब्लम रही है। मैं जानती हूँ कि इन सब चीज़ों को लेकर मैं कितनी असुरक्षित महसूस करती थी।'
उन्होंने आगे कहा, 'जो चेहरे को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं, मैं उनकी परेशानी को अच्छी तरह समझ सकती हूँ। फिर लोग मेरे चेहरे और मेकअप का मज़ाक उड़ाते हैं — यह सुनकर बहुत बुरा लगता है।'
डेली सोप कमेंट पर नाराज़गी
शिवांगी ने शो में श्रेया और शिल्पा द्वारा धारावाहिकों पर किए गए कमेंट पर भी अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा, 'जब वे हर्षद और डेली सोप एक्टिंग की बात कर रही थीं, तो मेरे मन में यह ख्याल आया कि आप भी तो वहीं से आए हो — और एक बार श्रेया ने खुद बताया था कि उन्होंने सीरियल्स के लिए ऑडिशन दिए थे, लेकिन काम नहीं मिला था।'
ट्रोलिंग का पुराना दर्द
गौरतलब है कि 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में लीड रोल के दौरान शिवांगी जोशी को उनके चेहरे पर मुंहासे के निशानों को लेकर व्यापक ऑनलाइन ट्रोलिंग झेलनी पड़ी थी। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटीज़ के बॉडी शेमिंग और लुक्स-शेमिंग की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
क्या होगा आगे
'लॉकअप-2' में शिवांगी का यह भावनात्मक खुलासा दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उनकी यह बेबाकी न केवल शो की गतिशीलता को प्रभावित कर सकती है, बल्कि स्किन पॉज़िटिविटी की बहस को भी नई दिशा दे सकती है।