मधुर भंडारकर को फिल्म ‘कैलेंडर गर्ल्स’ बनाने का आइडिया कैसे मिला?

सारांश
Key Takeaways
- मधुर भंडारकर का फिल्म निर्माण समाज की सच्चाइयों को उजागर करता है।
- फिल्म 'कैलेंडर गर्ल्स' २०१५ में रिलीज हुई थी।
- कई मॉडल्स एक कैलेंडर शूट के बाद गुमनाम हो जाती हैं।
मुंबई, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मधुर भंडारकर, एक ऐसे फिल्म निर्माता हैं जिनकी फिल्मों में कठोर और यथार्थवादी कहानियाँ प्रस्तुत की जाती हैं। उनकी कहानियों की विशेषता यह है कि ये अक्सर वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित होती हैं और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के स्याह पहलुओं को उजागर करती हैं।
उन्होंने 'चांदनी बार', 'पेज-३', 'फैशन', और 'ट्रैफिक सिग्नल' जैसी चर्चित फिल्मों का निर्माण किया है। २६ अगस्त १९६८ को जन्मे मधुर भंडारकर को फिल्म चांदनी बार के लिए सामाजिक मुद्दों पर आधारित बेस्ट फिल्म का नेशनल अवॉर्ड प्राप्त हुआ था। उन्हें फिल्म जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
फिल्में बनाने से पहले वह एक वीडियो पार्लर में कैसेट बेचने का काम करते थे। यही वह समय था जब मधुर भंडारकर के मन में फिल्में बनाने का सपना जगा। वह दिन-रात फिल्में देखते थे। मधुर भंडारकर बांद्रा के एक सिनेमा हॉल में जाकर फिल्में देखने जाते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि अगर कोई फिल्म उन्हें पसंद आ जाती थी तो वह उसके लगातार चारों शो देख लेते थे।
मधुर भंडारकर ने कहा था कि फिल्में समाज में जो कुछ होता है, उसी का प्रतिबिंब होती हैं। वह कड़वे सच को दिखाने में पीछे नहीं हटते। उन्होंने खुलासा किया था कि फिल्म चांदनी बार में उन्होंने वास्तविक बार डांसर्स की जिंदगी को दिखाया है। इसके लिए उन्होंने बार डांसर्स की जिंदगी को करीब से देखा था।
इसी तरह, फिल्म 'हीरोइन' की कहानी भी फिल्म जगत की सच्ची घटनाओं पर आधारित थी। इसका ७० फीसदी हिस्सा उसी पर आधारित था। वह अपनी फिल्मों में सच्चाई दिखाने के लिए प्रसिद्ध हैं।
फिल्म ‘कैलेंडर गर्ल्स’ की कहानी भी मॉडल्स की वास्तविक जिंदगी पर आधारित थी। यह फिल्म २०१५ में रिलीज हुई थी। इसका आइडिया भी उन्हें अपने ऑफिस में तब आया जब एक कर्मचारी ने उनसे पुराने कैलेंडर्स के बारे में पूछा कि इनका क्या किया जाए।
वास्तव में, उद्योगपति विजय माल्या उन्हें कैलेंडर भेजा करते थे, जिसमें मॉडल्स की तस्वीरें होती थीं। जब कर्मचारी ने इन कैलेंडर्स के बारे में पूछा तो मधुर भंडारकर को इन मॉडल्स की जिंदगी पर फिल्म बनाने का आइडिया आया।
जब उन्होंने रिसर्च किया तो पाया कि ऐसे फोटोशूट में शामिल होने वाली ९९ फीसदी मॉडल्स एक कैलेंडर शूट के बाद गुमनाम हो जाती थीं। सिर्फ १ प्रतिशत ही मॉडलिंग के क्षेत्र में सफल हो पाती थीं। इसके बाद उन्होंने इस पर फिल्म बनाई, जो भले ही पर्दे पर सफल नहीं हुई, लेकिन फिल्म जगत की एक और सच्चाई लोगों के सामने जरूर आई।