महिला आरक्षण विधेयक: कादंबरी जेठवानी का महत्वपूर्ण दृष्टिकोण
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना है।
- कादंबरी जेठवानी और अन्य हस्तियों ने इसे एक ऐतिहासिक कदम माना है।
- विपक्ष ने इस विधेयक के पीछे राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया है।
नोएडा, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की जानी-मानी अदाकारा कादंबरी जेठवानी ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
अभिनेत्री के अनुसार, यह पहल महिलाओं को राजनीति और देश में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के इस दृष्टिकोण को महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय करार दिया है।
महिला आरक्षण विधेयक पर बात करते हुए कादंबरी जेठवानी ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "एक डॉक्टर, फिल्म अभिनेत्री, शास्त्रीय नृत्यांगना और खिलाड़ी के नाते, मैंने भारतीय महिलाओं के अद्वितीय साहस और क्षमताओं का साक्षात्कार किया है। हम चिकित्सा, सृजन और नेतृत्व में सक्रिय हैं, फिर भी कानून बनाने के क्षेत्र में हमारी प्रतिनिधित्व की कमी रही है। यह नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। संसद और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटों का आरक्षण न केवल प्रतीकात्मक है, बल्कि महिलाओं के लिए उचित स्थान और नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करने का कदम है।"
उन्होंने आगे कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय न केवल महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उन्हें सशक्त बनाने में सहायक होगा। सबसे बड़ी चुनौती इसे लागू करना है, और मेरा मानना है कि जब महिलाएं नेतृत्व करेंगी, तो देश की प्रगति सुनिश्चित होगी।"
वहीं, इस विधेयक पर अभिनेत्री सेहरिश अली ने भी राष्ट्र प्रेस से कहा, "यह सरकार का एक सराहनीय निर्णय है और मैं इसका समर्थन करती हूं। इसे पहले ही लागू किया जाना चाहिए था। एक महिला के लिए मातृत्व का अधिकार होना आवश्यक है, और यह प्रावधान उसे अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर देता है। यह एक सकारात्मक कदम है।"
इससे पहले, हिंदी सिनेमा में खलनायक के रूप में प्रसिद्ध मुकेश ऋषि ने भी इस विधेयक को देश और महिलाओं के विकास के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यह कदम केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक भी है, क्योंकि हम वर्षों से इस दिशा में कार्यरत हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाए। उन्होंने यह भी कहा कि आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, तो राजनीति में क्यों पीछे रहें।
हालांकि, महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि बंगाल और केरल के चुनावों से पहले सरकार महिलाओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।