29 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महमूद ने राजीव गांधी को समझा नया स्टार, फिल्म साइन करने को दे दिए ₹5,000

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महमूद ने राजीव गांधी को समझा नया स्टार, फिल्म साइन करने को दे दिए ₹5,000

सारांश

हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडियन महमूद ने एक बार राजीव गांधी को नया फिल्मी सितारा समझकर ₹5,000 थमा दिए थे। यह किस्सा उनकी पारखी नज़र और हँसमुख स्वभाव का जीवंत प्रमाण है — और अमिताभ बच्चन की वह टिप्पणी कि 'राजीव सच में इंटरनेशनल स्टार बने, पर राजनीति में' इसे यादगार बना देती है।

मुख्य बातें

महमूद अली ने 'बॉम्बे टू गोवा' की रिलीज से पहले राजीव गांधी को नया अभिनेता समझकर ₹5,000 की अग्रिम राशि देने की कोशिश की थी।
यह किस्सा लेखक हनीफ जावेरी की किताब 'महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड' में दर्ज है।
महमूद का जन्म 29 सितंबर 1932 को मुंबई में हुआ था; उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया।
उन्होंने चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते और अमिताभ बच्चन को 'बॉम्बे टू गोवा' में बड़ा मौका दिया।
23 जुलाई 2004 को 71 वर्ष की आयु में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में उनका निधन हुआ।

हिंदी सिनेमा के मशहूर कॉमेडियन महमूद अली की जिंदगी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा है, जब उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ आए एक युवा को भावी 'इंटरनेशनल स्टार' समझकर अपनी अगली फिल्म के लिए ₹5,000 की अग्रिम राशि थमा दी थी — और बाद में पता चला कि वह युवा कोई और नहीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र राजीव गांधी थे। यह रोचक प्रसंग लेखक हनीफ जावेरी की किताब 'महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड' में दर्ज है।

महमूद का सफर: संघर्ष से शोहरत तक

महमूद अली का जन्म 29 सितंबर 1932 को तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली अपने दौर के जाने-माने डांसर और अभिनेता थे, इसलिए घर में फिल्मी माहौल था। बावजूद इसके, महमूद का बचपन आर्थिक कठिनाइयों से भरा रहा और उन्हें छोटी उम्र से ही काम पर निकलना पड़ा।

उन्होंने 1943 की फिल्म 'किस्मत' से बाल कलाकार के रूप में बॉलीवुड में पहला कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने छोटे-मोटे काम भी किए और एक समय फिल्मकार पी.एल. संतोषी के यहाँ ड्राइवर की भूमिका भी निभाई। यह संघर्ष उनकी बाद की सफलता की नींव बना।

करियर का निर्णायक मोड़

'दो बीघा जमीन' और 'प्यासा' जैसी फिल्मों में छोटे किरदार निभाने के बाद 1958 में आई 'परवरिश' उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई, जिसमें उन्होंने राज कपूर के भाई की भूमिका अदा की। 1960 और 70 के दशक में उनकी कॉमेडी ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

'गुमनाम', 'प्यार किए जा', 'पड़ोसन', 'बॉम्बे टू गोवा', 'दो फूल', 'कुंवारा बाप' और 'सबसे बड़ा रुपैया' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। 'पड़ोसन' में उनका मास्टर पिल्लई का किरदार आज भी उनकी सबसे यादगार भूमिकाओं में गिना जाता है।

वह किस्सा जब राजीव गांधी को मिले ₹5,000

हनीफ जावेरी की किताब के अनुसार, 'बॉम्बे टू गोवा' की रिलीज से कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन दिल्ली से आए एक युवा मित्र को मुंबई लेकर आए। उस युवा को देखकर महमूद को लगा कि यह लड़का अमिताभ से भी अधिक आकर्षक और स्मार्ट है तथा आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर का सितारा बन सकता है।

महमूद ने तुरंत ₹5,000 निकाले और अपने भाई अनवर अली को देते हुए कहा कि यह राशि अमिताभ के उस दोस्त को दे दो — उनका इरादा उस युवा को अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करना था। अनवर को स्थिति समझ नहीं आई, तब उन्होंने महमूद को बताया कि वह युवा कोई नया अभिनेता नहीं, बल्कि राजीव गांधी हैं — तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र। यह सुनते ही महमूद ने पैसे वापस ले लिए और अमिताभ तथा राजीव गांधी दोनों इस बात पर खिलखिलाकर हँस पड़े।

अमिताभ की वह मजेदार टिप्पणी

बाद में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने, तो अमिताभ बच्चन ने मजाकिया लहजे में कहा था कि महमूद की बात आखिरकार सच निकली — राजीव सच में 'इंटरनेशनल स्टार' बने, लेकिन फिल्मी दुनिया में नहीं, राजनीति में। यह किस्सा महमूद की पारखी नज़र और उनके हँसमुख स्वभाव दोनों को एक साथ उजागर करता है।

विरासत और अंतिम सफर

महमूद ने अपने चार दशकों से अधिक के करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते — जिनमें 'प्यार किए जा', 'वारिस' और 'वरदान' के लिए बेस्ट कॉमेडियन का पुरस्कार शामिल था। उन्होंने कई नए कलाकारों की प्रतिभा को पहचाना, जिनमें अमिताभ बच्चन को 'बॉम्बे टू गोवा' में बड़ा मौका देना भी शामिल है।

23 जुलाई 2004 को 71 वर्ष की आयु में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में उनका निधन हो गया। हिंदी सिनेमा में कॉमेडी को जो गरिमा और गहराई महमूद ने दी, वह आज भी उनकी फिल्मों के माध्यम से जीवित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर राजनीति में' — इस किस्से को महज मनोरंजन से ऊपर उठाकर उस युग के सामाजिक ताने-बाने की झलक देती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर महमूद को सिर्फ कॉमेडी के खाँचे में रखती है, जबकि वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अमिताभ जैसे सितारों को मौका दिया और नई प्रतिभा को पहचानने की गज़ब की क्षमता रखते थे।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महमूद ने राजीव गांधी को ₹5,000 क्यों दिए थे?
महमूद ने राजीव गांधी को एक संभावित फिल्मी अभिनेता समझकर अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करने की नीयत से ₹5,000 देने की कोशिश की थी। जब उनके भाई अनवर अली ने बताया कि वह युवा दरअसल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी हैं, तो महमूद ने पैसे वापस ले लिए।
यह किस्सा किस किताब में दर्ज है?
यह प्रसंग लेखक हनीफ जावेरी की किताब 'महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड' में दर्ज है। किताब में महमूद की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प किस्से संकलित हैं।
महमूद अली कौन थे और उनका बॉलीवुड में क्या योगदान रहा?
महमूद अली हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडियन थे, जिनका जन्म 29 सितंबर 1932 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया, चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते और 'पड़ोसन' में मास्टर पिल्लई जैसे यादगार किरदार निभाए। उन्होंने अमिताभ बच्चन को 'बॉम्बे टू गोवा' में बड़ा मौका भी दिया था।
महमूद का निधन कब और कहाँ हुआ?
महमूद का निधन 23 जुलाई 2004 को 71 वर्ष की आयु में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में हुआ था। वे अपने पीछे हिंदी सिनेमा में कॉमेडी की एक समृद्ध विरासत छोड़ गए।
अमिताभ बच्चन ने राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर क्या कहा था?
जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने, तो अमिताभ बच्चन ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि महमूद की बात सच निकली — राजीव गांधी सच में 'इंटरनेशनल स्टार' बने, लेकिन फिल्मी दुनिया में नहीं, राजनीति में।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले