महमूद ने राजीव गांधी को समझा नया स्टार, फिल्म साइन करने को दे दिए ₹5,000
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा के मशहूर कॉमेडियन महमूद अली की जिंदगी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा है, जब उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ आए एक युवा को भावी 'इंटरनेशनल स्टार' समझकर अपनी अगली फिल्म के लिए ₹5,000 की अग्रिम राशि थमा दी थी — और बाद में पता चला कि वह युवा कोई और नहीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र राजीव गांधी थे। यह रोचक प्रसंग लेखक हनीफ जावेरी की किताब 'महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड' में दर्ज है।
महमूद का सफर: संघर्ष से शोहरत तक
महमूद अली का जन्म 29 सितंबर 1932 को तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली अपने दौर के जाने-माने डांसर और अभिनेता थे, इसलिए घर में फिल्मी माहौल था। बावजूद इसके, महमूद का बचपन आर्थिक कठिनाइयों से भरा रहा और उन्हें छोटी उम्र से ही काम पर निकलना पड़ा।
उन्होंने 1943 की फिल्म 'किस्मत' से बाल कलाकार के रूप में बॉलीवुड में पहला कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने छोटे-मोटे काम भी किए और एक समय फिल्मकार पी.एल. संतोषी के यहाँ ड्राइवर की भूमिका भी निभाई। यह संघर्ष उनकी बाद की सफलता की नींव बना।
करियर का निर्णायक मोड़
'दो बीघा जमीन' और 'प्यासा' जैसी फिल्मों में छोटे किरदार निभाने के बाद 1958 में आई 'परवरिश' उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई, जिसमें उन्होंने राज कपूर के भाई की भूमिका अदा की। 1960 और 70 के दशक में उनकी कॉमेडी ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
'गुमनाम', 'प्यार किए जा', 'पड़ोसन', 'बॉम्बे टू गोवा', 'दो फूल', 'कुंवारा बाप' और 'सबसे बड़ा रुपैया' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। 'पड़ोसन' में उनका मास्टर पिल्लई का किरदार आज भी उनकी सबसे यादगार भूमिकाओं में गिना जाता है।
वह किस्सा जब राजीव गांधी को मिले ₹5,000
हनीफ जावेरी की किताब के अनुसार, 'बॉम्बे टू गोवा' की रिलीज से कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन दिल्ली से आए एक युवा मित्र को मुंबई लेकर आए। उस युवा को देखकर महमूद को लगा कि यह लड़का अमिताभ से भी अधिक आकर्षक और स्मार्ट है तथा आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर का सितारा बन सकता है।
महमूद ने तुरंत ₹5,000 निकाले और अपने भाई अनवर अली को देते हुए कहा कि यह राशि अमिताभ के उस दोस्त को दे दो — उनका इरादा उस युवा को अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करना था। अनवर को स्थिति समझ नहीं आई, तब उन्होंने महमूद को बताया कि वह युवा कोई नया अभिनेता नहीं, बल्कि राजीव गांधी हैं — तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र। यह सुनते ही महमूद ने पैसे वापस ले लिए और अमिताभ तथा राजीव गांधी दोनों इस बात पर खिलखिलाकर हँस पड़े।
अमिताभ की वह मजेदार टिप्पणी
बाद में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने, तो अमिताभ बच्चन ने मजाकिया लहजे में कहा था कि महमूद की बात आखिरकार सच निकली — राजीव सच में 'इंटरनेशनल स्टार' बने, लेकिन फिल्मी दुनिया में नहीं, राजनीति में। यह किस्सा महमूद की पारखी नज़र और उनके हँसमुख स्वभाव दोनों को एक साथ उजागर करता है।
विरासत और अंतिम सफर
महमूद ने अपने चार दशकों से अधिक के करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते — जिनमें 'प्यार किए जा', 'वारिस' और 'वरदान' के लिए बेस्ट कॉमेडियन का पुरस्कार शामिल था। उन्होंने कई नए कलाकारों की प्रतिभा को पहचाना, जिनमें अमिताभ बच्चन को 'बॉम्बे टू गोवा' में बड़ा मौका देना भी शामिल है।
23 जुलाई 2004 को 71 वर्ष की आयु में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में उनका निधन हो गया। हिंदी सिनेमा में कॉमेडी को जो गरिमा और गहराई महमूद ने दी, वह आज भी उनकी फिल्मों के माध्यम से जीवित है।