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रणदीप हुड्डा को राम गोपाल वर्मा ने तीन साल दिए ₹35,000 महीना, फिर भी नहीं मिली फिल्म

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रणदीप हुड्डा को राम गोपाल वर्मा ने तीन साल दिए ₹35,000 महीना, फिर भी नहीं मिली फिल्म

सारांश

तीन साल, हर महीने ₹35,000 और एक ऐसी फिल्म जो कभी बनी ही नहीं — रणदीप हुड्डा का यह किस्सा बॉलीवुड के उस अनकहे संघर्ष की तस्वीर है जो कैमरे के पीछे छुपी रहती है। ऑस्ट्रेलिया में टैक्सी चलाने से लेकर हॉलीवुड तक का सफर आसान नहीं था।

मुख्य बातें

रणदीप हुड्डा ने खुद बताया कि राम गोपाल वर्मा के वादे पर करीब तीन साल तक घर पर बैठकर फिल्म का इंतजार किया।
इस दौरान उन्हें हर महीने ₹35,000 की राशि मिलती रही, लेकिन वह प्रोजेक्ट अपेक्षित रूप में आगे नहीं बढ़ा।
रणदीप का जन्म 20 अगस्त 1976 को रोहतक, हरियाणा में हुआ था; उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान टैक्सी भी चलाई।
2001 में मीरा नायर की 'मानसून वेडिंग' से फिल्मी सफर शुरू हुआ; बाद में नसीरुद्दीन शाह के साथ थिएटर से अभिनय निखारा।
'हाईवे' (2014), 'सरबजीत' (2016) और हॉलीवुड फिल्म 'एक्सट्रैक्शन' ने उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
'स्वतंत्र वीर सावरकर' में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन भी किया।

अभिनेता रणदीप हुड्डा हिंदी सिनेमा में अपनी तीव्र अदाकारी और चुनौतीपूर्ण किरदारों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके करियर का एक ऐसा दौर भी रहा जब वह लगभग तीन साल तक घर पर बैठकर एक ऐसी फिल्म का इंतजार करते रहे जो कभी बनी ही नहीं। यह किस्सा खुद रणदीप ने एक इंटरव्यू में साझा किया था। निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी फिल्म में लॉन्च करने का वादा किया था और इस दौरान हर महीने ₹35,000 की राशि दी थी।

बचपन से अभिनय का सपना

रणदीप हुड्डा का जन्म 20 अगस्त 1976 को हरियाणा के रोहतक में हुआ था। उनके पिता चिकित्सक थे और माँ समाज सेवा से जुड़ी थीं। माता-पिता के विदेश में रहने के कारण रणदीप का अधिकांश बचपन अपनी दादी के साथ बीता। स्कूल में जब अंग्रेजी फिल्में दिखाई जाती थीं, तो वह खुद को पर्दे के नायक की जगह कल्पना करने लगते थे। परिवार की इच्छा थी कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें और एक स्थिर करियर चुनें।

ऑस्ट्रेलिया में टैक्सी से विवियन रिचर्ड्स तक का सफर

उच्च शिक्षा के लिए रणदीप ऑस्ट्रेलिया गए, जहाँ पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने कई तरह के काम किए — यहाँ तक कि टैक्सी भी चलाई। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी कैब में एक बार महान क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स भी सवार हुए थे। इस पूरे दौर में अभिनय की चाहत उनके भीतर जीवित रही और अंततः वह भारत लौटकर फिल्मों में किस्मत आजमाने लगे।

मीरा नायर की फिल्म से शुरुआत, फिर थिएटर की ओर रुख

रणदीप को 2001 में निर्देशक मीरा नायर की फिल्म 'मानसून वेडिंग' में काम करने का अवसर मिला। यह एक बड़ा मौका था, लेकिन इस फिल्म के बाद भी उनका करियर तत्काल गति नहीं पकड़ सका। रणदीप ने खुद स्वीकार किया था कि उस दौर में उन्हें लगा कि अभिनय अभी ठीक से आता ही नहीं। इसके बाद उन्होंने थिएटर का रुख किया और दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करके अपनी कला को गहराई से समझा।

राम गोपाल वर्मा का वादा और तीन साल का इंतजार

थिएटर के बाद रणदीप के जीवन में एक अनोखा मोड़ आया। निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी फिल्म में लॉन्च करने का वादा किया और पूछा कि उन्हें हर महीने कितने पैसों की जरूरत है। रणदीप ने जवाब दिया — ₹35,000। इसके बाद करीब तीन साल तक उन्हें यह राशि मिलती रही और वह घर पर बैठकर उस फिल्म का इंतजार करते रहे। लेकिन वह प्रोजेक्ट उस रूप में आगे नहीं बढ़ा जैसा उन्होंने सोचा था।

संघर्ष के बाद मिली पहचान

धीरे-धीरे रणदीप को सार्थक भूमिकाएँ मिलने लगीं। 'डी', 'रिस्क', 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई', 'साहेब बीवी और गैंगस्टर' और 'जन्नत 2' जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को मजबूत किया। 2014 में आई 'हाईवे' में उन्होंने महाबीर भाटी का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। 2016 में 'सरबजीत' में उन्होंने सरबजीत सिंह की भूमिका के लिए जबरदस्त शारीरिक और मानसिक रूपांतरण किया, जो उनके करियर का एक अहम पड़ाव रहा। इसके बाद हॉलीवुड फिल्म 'एक्सट्रैक्शन' में क्रिस हेम्सवर्थ के साथ काम करके उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान भी हासिल की। फिल्म 'स्वतंत्र वीर सावरकर' में उन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी सँभाली और एक नई पहचान बनाई। रणदीप हुड्डा की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि धैर्य और कठोर परिश्रम से संघर्ष भी सफलता में बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 प्रति माह मिलना एक तरफ सुरक्षा जाल था, तो दूसरी तरफ एक सुनहरे पिंजरे जैसा भी — क्योंकि इस दौरान रणदीप अन्य अवसरों से दूर रहे। यह सवाल उठता है कि बड़े निर्माताओं और निर्देशकों के अनौपचारिक 'रिटेनर' समझौते उभरते कलाकारों के करियर को कितना प्रभावित करते हैं, और क्या इस उद्योग को अधिक पारदर्शी अनुबंध प्रणाली की जरूरत है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रणदीप हुड्डा को राम गोपाल वर्मा ने ₹35,000 महीना क्यों दिए?
राम गोपाल वर्मा ने रणदीप हुड्डा को अपनी फिल्म में लॉन्च करने का वादा किया था और इसी के तहत उन्हें हर महीने ₹35,000 दिए जाते थे। यह राशि करीब तीन साल तक मिलती रही, लेकिन वह फिल्म अपेक्षित रूप में आगे नहीं बढ़ी।
रणदीप हुड्डा की पहली फिल्म कौन सी थी?
रणदीप हुड्डा को 2001 में निर्देशक मीरा नायर की फिल्म 'मानसून वेडिंग' में काम करने का पहला बड़ा अवसर मिला था। हालाँकि इस फिल्म के बाद भी उनका करियर तुरंत गति नहीं पकड़ सका और उन्होंने थिएटर की ओर रुख किया।
रणदीप हुड्डा ने ऑस्ट्रेलिया में क्या किया?
रणदीप हुड्डा उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया गए थे, जहाँ उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ टैक्सी भी चलाई। उन्होंने बताया था कि उनकी कैब में एक बार महान क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स भी सवार हुए थे।
रणदीप हुड्डा की सबसे चर्चित फिल्में कौन सी हैं?
'हाईवे' (2014), 'सरबजीत' (2016), 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई' और हॉलीवुड फिल्म 'एक्सट्रैक्शन' रणदीप हुड्डा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हैं। 'स्वतंत्र वीर सावरकर' में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन भी किया।
रणदीप हुड्डा का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
रणदीप हुड्डा का जन्म 20 अगस्त 1976 को हरियाणा के रोहतक में हुआ था। उनके पिता चिकित्सक थे और माँ समाज सेवा से जुड़ी थीं।
राष्ट्र प्रेस
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