रणदीप हुड्डा का खुलासा: राम गोपाल वर्मा के वादे पर तीन साल घर बैठे, हर महीने मिले ₹35,000
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता रणदीप हुड्डा हिंदी सिनेमा में अपने बेबाक अभिनय और चुनौतीपूर्ण किरदारों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके करियर की शुरुआत उतनी आसान नहीं थी जितनी आज दिखती है। खुद रणदीप ने एक इंटरव्यू में यह किस्सा साझा किया था कि किस तरह निर्देशक राम गोपाल वर्मा के एक वादे पर भरोसा करके वह करीब तीन साल तक घर पर बैठे रहे — और इस दौरान उन्हें हर महीने ₹35,000 मिलते रहे।
कैसे शुरू हुआ इंतजार का यह दौर
रणदीप के अनुसार, राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी किसी फिल्म में लॉन्च करने का भरोसा दिलाया था। वर्मा ने उनसे पूछा कि उन्हें हर महीने कितने रुपयों की ज़रूरत है, और रणदीप ने जवाब दिया — ₹35,000। इसके बाद यह रकम उन्हें नियमित रूप से मिलती रही। लेकिन जिस फिल्म का इंतजार था, वह प्रोजेक्ट उस तरह आगे नहीं बढ़ा जैसा उन्होंने सोचा था। तीन साल का यह इंतजार उनके करियर का सबसे अनिश्चित दौर रहा।
रोहतक से ऑस्ट्रेलिया तक का सफर
रणदीप हुड्डा का जन्म 20 अगस्त 1976 को हरियाणा के रोहतक में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर थे और माँ समाज सेवा से जुड़ी थीं। माता-पिता के विदेश में रहने के कारण उनका बचपन अधिकतर अपनी दादी के साथ बीता। बचपन से ही अभिनय के प्रति उनका झुकाव था — स्कूल में अंग्रेजी फिल्में देखते हुए वह खुद को पर्दे के हीरो की जगह रखकर सोचते थे।
उच्च शिक्षा के लिए वह ऑस्ट्रेलिया गए, जहाँ पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने कई तरह के काम किए — यहाँ तक कि टैक्सी भी चलाई। उन्होंने बताया था कि एक बार महान क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स भी उनकी कैब में सवार हुए थे। इस सबके बावजूद अभिनय की चाहत कभी कम नहीं हुई और आखिरकार वह भारत लौटे।
थिएटर ने निखारा अभिनय
साल 2001 में निर्देशक मीरा नायर की फिल्म 'मानसून वेडिंग' से उन्हें पहली बड़ी पहचान मिली। हालाँकि फिल्म के बाद भी करियर में तत्काल गति नहीं आई। रणदीप ने स्वीकार किया था कि उन्हें लगा कि अभिनय अभी ठीक से आता ही नहीं है। इसके बाद उन्होंने थिएटर का रास्ता चुना और दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करके अभिनय की बारीकियाँ सीखीं। थिएटर ने उनके भीतर के कलाकार को एक नई धार दी।
करियर में पहचान दिलाने वाली फिल्में
राम गोपाल वर्मा वाले उस दौर के बाद धीरे-धीरे रणदीप को सशक्त भूमिकाएँ मिलने लगीं। 'डी', 'रिस्क', 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई', 'साहेब बीवी और गैंगस्टर' और 'जन्नत 2' जैसी फिल्मों ने उनकी अलग पहचान बनाई। 2014 में 'हाईवे' में उनके द्वारा निभाए महाबीर भाटी के किरदार को दर्शकों और आलोचकों दोनों ने सराहा।
2016 में 'सरबजीत' में उन्होंने सरबजीत सिंह की भूमिका के लिए उल्लेखनीय शारीरिक परिवर्तन किया, जिसकी व्यापक चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'एक्सट्रैक्शन' में क्रिस हेम्सवर्थ के साथ काम करके अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दस्तक दी।
निर्देशन में भी कदम
रणदीप ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की भी जिम्मेदारी उठाई। फिल्म 'स्वतंत्र वीर सावरकर' में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाने के साथ निर्देशन भी किया और इस तरह एक अभिनेता-निर्देशक के रूप में नई पहचान अर्जित की। तीन साल के उस लंबे इंतजार से शुरू हुआ सफर आज एक बहुआयामी करियर में तब्दील हो चुका है।