रणदीप हुड्डा: '25 साल के करियर में बार-बार खुद को तोड़ा, इसीलिए आज भी नए किरदार मिलते हैं'

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रणदीप हुड्डा: '25 साल के करियर में बार-बार खुद को तोड़ा, इसीलिए आज भी नए किरदार मिलते हैं'

सारांश

25 साल के करियर में बार-बार खुद को नए सिरे से गढ़ने वाले रणदीप हुड्डा का मानना है कि यही बदलाव की भूख उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाए रखती है। 'इंस्पेक्टर अविनाश' सीजन 2 की चर्चा के बीच उन्होंने अभिनय, घुड़सवारी और पितृत्व के बाद आई जीवन में स्थिरता की चाहत पर खुलकर बात की।

मुख्य बातें

रणदीप हुड्डा इन दिनों वेब सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश' के दूसरे सीजन को लेकर चर्चा में हैं।
उन्होंने कहा कि 25 साल के करियर में बार-बार खुद को बदलने की आदत ने उन्हें विविध किरदार दिलाए।
हुड्डा राष्ट्रीय स्तर के घुड़सवार भी रह चुके हैं और अभिनय व घुड़सवारी में एक जैसी 'लय' देखते हैं।
करियर में कई उतार-चढ़ाव के बावजूद हर बार मजबूत होकर वापसी की — यही उनकी पहचान बनी।
पिता बनने के बाद जीवन में शांत और स्थिर रिदम बनाए रखने की चाहत जागी।

बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा इन दिनों अपनी चर्चित वेब सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश' के दूसरे सीजन को लेकर सुर्खियों में हैं। दर्शकों और आलोचकों दोनों की ओर से इस सीजन को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। हाल ही में हुड्डा ने एक विशेष बातचीत में अपने 25 साल लंबे अभिनय सफर, घुड़सवारी के जुनून और खुद को लगातार बदलते रहने की अपनी फितरत पर खुलकर बात की।

अभिनय और घुड़सवारी — दोनों में एक ही लय

रणदीप हुड्डा अभिनय के साथ-साथ एक कुशल घुड़सवार भी हैं और कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। जब उनसे पूछा गया कि दोनों क्षेत्रों में तालमेल की कितनी अहमियत है, तो उन्होंने कहा, 'जिंदगी के हर काम में एक लय होती है। जैसे घुड़सवारी में घोड़े की चाल, सांस और शरीर का संतुलन जरूरी होता है, वैसे ही अभिनय में भी डायलॉग्स बोलने, भाव दिखाने और सांस लेने का अपना तरीका होता है।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'हर किरदार की अपनी अलग गति और सोच होती है। एक अभिनेता को उसी हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है। मैं अभिनय करते समय इन चीजों पर बहुत ज्यादा सोचता नहीं हूं, लेकिन यह सब अपने आप अभिनय का हिस्सा बन जाता है।'

खुद की सीमाएँ तोड़ना — एक आदत बन गई

हुड्डा ने माना कि उन्होंने अपने करियर में कभी एक ही ढर्रे पर नहीं चले। उन्होंने कहा, 'मैंने कई बार खुद अपनी बनी हुई सीमा को तोड़ा है। मैं कभी भी एक जैसे काम में लंबे समय तक नहीं रह पाता। मैंने खुद को बार-बार नए तरीके से आजमाया और अब यह मेरी आदत बन गई।'

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब बॉलीवुड में कई अभिनेता एक ही तरह के किरदारों तक सीमित रह जाते हैं। हुड्डा का यह दृष्टिकोण उन्हें उद्योग में अलग पहचान देता है।

उतार-चढ़ाव और वापसी की कहानी

अपने 25 साल के करियर पर नजर डालते हुए रणदीप ने कहा, 'पिछले करीब 25 सालों के अभिनय करियर में मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कई बार ऐसा समय भी आया जब मुझे फिर से शुरुआत करनी पड़ी। हर बार मैंने खुद को मजबूत बनाकर वापसी की। इसी बदलाव और संघर्ष ने मेरे अंदर हमेशा आगे बढ़ने की भूख बनाए रखी।'

गौरतलब है कि हुड्डा ने 'सरबजीत', 'हाईवे' और 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई' जैसी फिल्मों में बेहद विविध किरदार निभाए हैं, जो उनकी इसी सोच का प्रमाण हैं।

विविधता ही क्यों है अभिनेता की असली ताकत

हुड्डा ने कहा, 'खुद को बदलते रहने की वजह से निर्देशक और फिल्म निर्माता मुझे अलग-अलग तरह के किरदारों में देखना पसंद करते हैं। अगर कोई अभिनेता हमेशा एक जैसे रोल करता रहे, तो दर्शकों के लिए उसमें नया कुछ नहीं बचता। इसलिए कलाकार को समय-समय पर खुद को चुनौती देते रहना चाहिए।'

पिता बनने के बाद बदला नजरिया

निजी जिंदगी का जिक्र करते हुए रणदीप ने बताया कि पितृत्व ने उनकी सोच को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा, 'पिता बनने के बाद मेरे सोचने का तरीका बदला है। अब मैं जिंदगी को थोड़ा शांत तरीके से जीना चाहता हूं। पहले जहां मैं हर समय कुछ नया और अलग करने के पीछे रहता था, वहीं अब मैं कुछ समय तक अपने काम और जिंदगी में एक स्थिर रिदम बनाए रखना चाहता हूं।'

यह बदलाव उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स में किस तरह झलकेगा, यह देखना दिलचस्प होगा — लेकिन 'इंस्पेक्टर अविनाश' सीजन 2 की सफलता बताती है कि रणदीप हुड्डा का जादू अभी थमा नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह उनके इसी दर्शन का प्रमाण है। हालांकि, यह भी देखने वाली बात होगी कि पितृत्व के बाद आई 'स्थिर रिदम' की चाहत उनकी जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करती है या नहीं — क्योंकि हुड्डा की असली पूंजी यही बेचैनी रही है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रणदीप हुड्डा की वेब सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश' का दूसरा सीजन कैसा है?
'इंस्पेक्टर अविनाश' का दूसरा सीजन दर्शकों और आलोचकों दोनों की ओर से सराहा जा रहा है। रणदीप हुड्डा ने इस किरदार में अपनी दमदार अभिनय शैली से एक बार फिर अलग छाप छोड़ी है।
रणदीप हुड्डा ने 25 साल के करियर में खुद को कैसे बदला?
रणदीप हुड्डा ने अपने 25 साल के करियर में हमेशा एक जैसे किरदारों से परहेज किया और बार-बार नई विधाओं में खुद को आजमाया। उनके अनुसार, यही बदलाव की भूख उन्हें निर्देशकों और निर्माताओं के लिए आकर्षक बनाए रखती है।
क्या रणदीप हुड्डा असल जिंदगी में घुड़सवार भी हैं?
हाँ, रणदीप हुड्डा पेशेवर घुड़सवार रह चुके हैं और कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। वे अभिनय और घुड़सवारी दोनों में एक जैसी 'लय और संतुलन' की जरूरत देखते हैं।
पिता बनने के बाद रणदीप हुड्डा की सोच में क्या बदलाव आया?
रणदीप हुड्डा ने बताया कि पिता बनने के बाद वे जिंदगी को अधिक शांत और स्थिर तरीके से जीना चाहते हैं। पहले वे हर वक्त कुछ नया करने की तलाश में रहते थे, अब काम और जिंदगी में एक संतुलित रिदम बनाए रखना चाहते हैं।
रणदीप हुड्डा के अनुसार एक अभिनेता को सफल करियर के लिए क्या करना चाहिए?
रणदीप हुड्डा का मानना है कि एक अभिनेता को समय-समय पर खुद को चुनौती देते रहना चाहिए। उनके अनुसार, विविधता और बदलाव ही किसी कलाकार को दर्शकों के लिए हमेशा नया और प्रासंगिक बनाए रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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