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ममूटी की आवाज़ में 'पंथादिक्कम': केरल के फुटबॉल जुनून की कहानी, 1 अक्टूबर से ZEE5 पर

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ममूटी की आवाज़ में 'पंथादिक्कम': केरल के फुटबॉल जुनून की कहानी, 1 अक्टूबर से ZEE5 पर

सारांश

ममूटी की आवाज़ में केरल का फुटबॉल जुनून परदे पर उतरा — 'पंथादिक्कम' सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि उस राज्य की सांस्कृतिक पहचान का दस्तावेज़ है जहाँ फुटबॉल धर्म की तरह जिया जाता है। 1 अक्टूबर से ZEE5 पर पाँच एपिसोड में।

मुख्य बातें

ममूटी ने मलयालम की पहली स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री 'पंथादिक्कम' को अपनी आवाज़ दी है।
पाँच एपिसोड की यह सीरीज 1 अक्टूबर 2026 से ZEE5 पर स्ट्रीम होगी; प्रत्येक एपिसोड लगभग 20 मिनट का।
सीरीज संतोष ट्रॉफी के सुनहरे दौर से लेकर आधुनिक प्रोफेशनल फुटबॉल तक केरल के इतिहास को कवर करती है।
भारत की पहली राष्ट्रीय एम्प्यूटी फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान वैसाख एस.आर.
की प्रेरणादायक कहानी भी शामिल।
निर्देशन नाइक्स लोपेज , निर्माण डॉ.
संगीता जनचंद्रन (स्टोरीज सोशल), कहानी गीतार्थ एआर ।

मलयालम सिनेमा के महानायक ममूटी ने केरल की पहली मलयालम स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'पंथादिक्कम' को अपनी आवाज़ दी है — एक ऐसी श्रृंखला जो केरल और फुटबॉल के अटूट रिश्ते को पाँच एपिसोड में उकेरती है। 1 अक्टूबर 2026 से यह सीरीज ZEE5 पर स्ट्रीम होगी और हर एपिसोड लगभग 20 मिनट का होगा।

सीरीज में क्या दिखेगा

'पंथादिक्कम' केरल में फुटबॉल की ऐतिहासिक जड़ों से लेकर क्लब फुटबॉल के शुरुआती दौर, संतोष ट्रॉफी के सुनहरे वर्षों और आधुनिक प्रोफेशनल फुटबॉल तक की यात्रा को कवर करती है। इसमें क्लब प्रतिद्वंद्विताओं, स्थानीय परंपराओं और फुटबॉल के प्रति दर्शकों की दीवानगी को नज़दीक से दर्शाया गया है।

सीरीज में ब्राज़ील और अर्जेंटीना की टीमों के लिए केरल के लोगों की अनूठी दीवानगी को भी जगह दी गई है — कैसे अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ियों का प्रभाव राज्य की गलियों और घरों तक पहुँचा, यह दिखाया जाएगा।

वैसाख एस.आर. की प्रेरक कहानी

डॉक्यूमेंट्री में भारत की पहली राष्ट्रीय एम्प्यूटी फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान वैसाख एस.आर. की जीवनगाथा भी शामिल है। संघर्ष, हिम्मत और फुटबॉल के प्रति अदम्य जुनून से भरी उनकी यात्रा इस सीरीज को एक गहरा मानवीय आयाम देती है।

ममूटी ने क्या कहा

ममूटी ने डॉक्यूमेंट्री के बारे में कहा, "केरल में फुटबॉल एक खेल से कहीं बढ़कर है। यह एक ऐसा जज़्बा है जो लोगों को साथ लाता है। गलियों और लोकल मैदानों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मैच देखने के उत्साह तक, इस खेल के लिए लोगों का जुनून ऐसी चीज़ है, जिसकी मैंने हमेशा सराहना की है। 'पंथादिक्कम' केरल और फुटबॉल के इस खास रिश्ते को सामने लाती है और उन कहानियों, जश्न और यादों को दिखाती है, जो इसे इतना खास बनाती हैं।"

निर्माण और प्रसारण विवरण

यह सीरीज स्टोरीज सोशल के तहत डॉ. संगीता जनचंद्रन ने प्रोड्यूस की है। इसका निर्देशन नाइक्स लोपेज ने किया है, जिन्होंने सीरीज का संगीत भी तैयार किया है। कहानी गीतार्थ एआर ने लिखी है।

ZEE5 के तमिल, तेलुगु और मलयालम बिज़नेस हेड लॉयड सी जेवियर ने कहा, "प्लेटफॉर्म का मकसद ऐसी कहानियाँ सामने लाना है, जो मलयाली दर्शकों की पसंद, संस्कृति और पहचान से जुड़ी हों। केरल के लोगों के दिलों में फुटबॉल की खास जगह है और 'पंथादिक्कम' इसी गहरे रिश्ते को सेलिब्रेट करती है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री केरल की दो बड़ी पसंद — ममूटी और फुटबॉल — को एक ही स्क्रीन पर लाती है।

आगे क्या

'पंथादिक्कम' के 1 अक्टूबर 2026 से ZEE5 पर उपलब्ध होने के साथ, यह सीरीज न केवल केरल के फुटबॉल प्रेमी दर्शकों को आकर्षित करेगी, बल्कि मलयालम स्पोर्ट्स कॉन्टेंट की एक नई श्रेणी की शुरुआत का संकेत भी देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस सांस्कृतिक खाई को पाटने की कोशिश है जो मलयालम OTT कॉन्टेंट में स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री के अभाव की वजह से बनी थी। ममूटी जैसे प्रतिष्ठित नाम का जुड़ना दर्शकों की विश्वसनीयता तो बढ़ाता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सीरीज क्लिशे से आगे जाकर केरल के फुटबॉल इकोसिस्टम की जटिलताओं — क्लब राजनीति, संसाधनों की कमी, स्थानीय प्रतिभाओं की उपेक्षा — को भी उजागर करती है। वैसाख एस.आर. जैसी कहानियाँ संकेत देती हैं कि निर्माताओं का इरादा सतह से नीचे उतरने का है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'पंथादिक्कम' डॉक्यूमेंट्री क्या है?
'पंथादिक्कम' मलयालम की पहली स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री सीरीज है, जो केरल और फुटबॉल के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक रिश्ते को पाँच एपिसोड में दर्शाती है। इसे सुपरस्टार ममूटी ने अपनी आवाज़ दी है और यह 1 अक्टूबर 2026 से ZEE5 पर उपलब्ध होगी।
'पंथादिक्कम' कब और कहाँ देख सकते हैं?
यह सीरीज 1 अक्टूबर 2026 से ZEE5 पर स्ट्रीम होगी। प्रत्येक एपिसोड लगभग 20 मिनट का है और कुल पाँच एपिसोड हैं।
ममूटी की इस डॉक्यूमेंट्री में क्या भूमिका है?
ममूटी ने 'पंथादिक्कम' को नैरेशन यानी अपनी आवाज़ दी है। उन्होंने कहा है कि केरल में फुटबॉल एक खेल से बढ़कर एक जज़्बा है, और इस रिश्ते को दर्शाना उन्हें बेहद खास लगा।
'पंथादिक्कम' में कौन कौन सी कहानियाँ शामिल हैं?
सीरीज में केरल में फुटबॉल की शुरुआत, संतोष ट्रॉफी का स्वर्णिम युग, क्लब प्रतिद्वंद्विताएँ और ब्राज़ील अर्जेंटीना के प्रति केरल की दीवानगी शामिल है। इसके अलावा भारत की पहली राष्ट्रीय एम्प्यूटी फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान वैसाख एस.आर. की प्रेरणादायक कहानी भी दिखाई जाएगी।
डॉक्यूमेंट्री के निर्माता और निर्देशक कौन हैं?
डॉक्यूमेंट्री को स्टोरीज सोशल के तहत डॉ. संगीता जनचंद्रन ने प्रोड्यूस किया है। निर्देशन नाइक्स लोपेज ने किया है, जिन्होंने संगीत भी तैयार किया है, जबकि कहानी गीतार्थ एआर ने लिखी है।
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