मनोहर श्याम जोशी: विज्ञान से साहित्य तक का अद्भुत सफर

Click to start listening
मनोहर श्याम जोशी: विज्ञान से साहित्य तक का अद्भुत सफर

सारांश

मनोहर श्याम जोशी का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें विज्ञान से साहित्य तक का सफर शामिल है। जानें किस तरह उन्होंने भारतीय टेलीविजन को नई पहचान दी और साहित्य में नई दिशा स्थापित की।

Key Takeaways

  • मनोहर श्याम जोशी का जन्म 9 अगस्त 1933 को हुआ था।
  • उन्होंने विज्ञान से साहित्य की ओर कदम बढ़ाया।
  • उनका शो 'हम लोग' भारतीय टेलीविजन का पहला नियमित धारावाहिक था।
  • उन्होंने 'बुनियाद' जैसे महाकाव्यात्मक शो भी लिखे।
  • उनके उपन्यासों में नवीनतम शब्दावली का प्रयोग किया गया।

मुंबई, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 1980 के दशक में टेलीविजन पर 'बसेसर राम' की झल्लाहट, 'भगवंती' का त्याग और दादामुनि (अशोक कुमार) की सूत्रधार वाली भूमिका... यह केवल एक टीवी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रीय जुनून था, जिसका नाम था, "हम लोग"। इस अद्भुत शो के पीछे की कलमकार कोई और नहीं, बल्कि मनोहर श्याम जोशी थे। यह भारत का पहला ऐसा धारावाहिक था जो नियमित रूप से (सप्ताह में दो बार से शुरू होकर) प्रसारित होता था।

9 अगस्त 1933 को अजमेर में जन्मे मनोहर श्याम जोशी की जड़ें उत्तराखंड के अल्मोड़ा के एक सुसंस्कृत कुमाऊंनी ब्राह्मण परिवार में थीं। दिलचस्प बात यह है कि हिंदी साहित्य के इस महान लेखक ने शुरुआत विज्ञान से की थी। लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी करने वाले जोशी में एक वैज्ञानिक की तार्किकता थी। इसलिए जब उन्होंने लिखना शुरू किया, तो उसमें भावनात्मकता के बजाय समाज का एक 'सर्जिकल विश्लेषण' था।

लखनऊ में उनके जीवन ने एक नया मोड़ लिया। वहां उनकी मुलाकात हिंदी साहित्य के दिग्गज अमृतलाल नागर ('बाबूजी') से हुई। उनके सान्निध्य में युवा मनोहर श्याम जोशी ने यह सीखा कि महान साहित्य वह नहीं है जो भारी-भरकम संस्कृत के शब्दों से भरा हो, बल्कि वह है जो सीधे आम आदमी के दिल में उतर जाए। यहीं से मनोहर श्याम जोशी के भीतर उस 'किस्सागो' का जन्म हुआ।

लेखक बनने से पहले वे एक पत्रकार थे। ऑल इंडिया रेडियो में काम करते हुए उन्होंने आवाज की ताकत को पहचाना और 'फिल्म्स डिवीजन' में वृत्तचित्र लिखते हुए 'सिनेमाई दृष्टि' पाई। उनकी पत्रकारिता का सबसे उज्ज्वल दौर तब आया जब साहित्य के शलाका पुरुष अज्ञेय जी ने उन्हें 'दिनमान' पत्रिका का सहायक संपादक बनाया। इसके बाद जब वे 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' के संपादक बने, तो उन्होंने इस पत्रिका को हिंदी पट्टी के हर घर का हिस्सा बना दिया।

अगर भारत में टेलीविजन को एक शक्तिशाली सामाजिक हथियार बनाने का श्रेय किसी एक व्यक्ति को जाता है, तो वे निर्विवाद रूप से मनोहर श्याम जोशी हैं। 1984 में 154 एपिसोड तक चले 'हम लोग' ने उन्हें 'भारतीय सोप ओपेरा का जनक' बना दिया।

अगर 'हम लोग' टीवी का रामायण था, तो 1986 में आया 'बुनियाद' उसका महाभारत। भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्द और विस्थापन को 'मास्टर हवेलीराम' और 'लाजो' की कहानी के जरिए उन्होंने जिस महाकाव्यात्मक अंदाज में पेश किया, उसने पूरे देश को रुला दिया। निर्देशक रमेश सिप्पी ने भी माना कि 'बुनियाद' की सफलता की असली बुनियाद मनोहर श्याम जोशी की कलम ही थी। इसके बाद 'कक्काजी कहिन' से लेकर 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' तक, उन्होंने टीवी पर जो व्यंग्य और मनोवैज्ञानिक हास्य रचा, उसकी मिसाल आज तक नहीं मिलती।

मनोहर श्याम जोशी हिंदी साहित्य के उस 'विद्रोही' की तरह थे जिसने तयशुदा व्याकरण को मानने से इनकार कर दिया। उनका पहला उपन्यास 'कुरु कुरु स्वाहा' (1980) आया, तो साहित्य जगत सन्न रह गया। इसमें बंबइया स्लैंग, गुजराती, कुमाऊंनी और अंग्रेजी का मिश्रण था।

उनका उपन्यास 'कसप' हिंदी की सबसे खूबसूरत और त्रासद प्रेम कथाओं में गिना जाता है। वहीं, 'क्याप' के लिए उन्हें 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। सिनेमा से उनके लगाव के कारण उनके उपन्यासों में 'कैमरा', 'साइलेंट शॉट' और 'म्यूट फेस' जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता था, मानों आप किताब नहीं पढ़ रहे बल्कि कोई फिल्म देख रहे हों। कमल हासन की ऐतिहासिक फिल्म 'हे राम' के जटिल और मनोवैज्ञानिक हिंदी संवाद भी मनोहर श्याम जोशी की ही देन हैं।

30 मार्च 2006 का दिन भारतीय साहित्य और पत्रकारिता के लिए एक मनहूस दिन साबित हुआ। 72 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में मनोहर श्याम जोशी ने अपनी अंतिम सांस ली।

तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और खुशवंत सिंह जैसे दिग्गजों ने उन्हें हिंदी का सबसे 'इनोवेटिव' (नवाचारी) लेखक माना।

Point of View

NationPress
31/03/2026

Frequently Asked Questions

मनोहर श्याम जोशी कौन थे?
मनोहर श्याम जोशी एक प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार थे, जिन्होंने भारतीय टेलीविजन और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कौन-कौन से प्रसिद्ध टीवी शो लिखे?
'हम लोग', 'बुनियाद', और 'कक्काजी कहिन' जैसे शो उनके द्वारा लिखे गए हैं।
क्या मनोहर श्याम जोशी को पुरस्कार मिले थे?
हां, उन्हें 2005 में 'क्याप' उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।
उनका पहला उपन्यास कौन सा था?
'कुरु कुरु स्वाहा' उनका पहला उपन्यास था, जिसने साहित्य जगत में हलचल मचा दी।
उनका योगदान किस क्षेत्र में था?
उनका योगदान टेलीविजन, पत्रकारिता और हिंदी साहित्य में था।
Nation Press