क्या मकर संक्रांति पर बचपन की यादें ताज़ा होती हैं?

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क्या मकर संक्रांति पर बचपन की यादें ताज़ा होती हैं?

सारांश

मकर संक्रांति पर रंग-बिरंगी पतंगों की उड़ान और तिल-गुड़ की मिठास के साथ, सन नियो के कलाकारों ने अपने बचपन की यादें साझा की हैं। यह त्योहार न केवल खुशियों का प्रतीक है, बल्कि नए शुरुआत का भी। जानिए इस खास दिन के बारे में उनके अनुभव और भावनाएँ।

Key Takeaways

  • मकर संक्रांति एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो सकारात्मकता का संदेश देता है।
  • बचपन की यादें हमेशा हमारे दिल में बसी रहती हैं।
  • त्योहारों का महत्व परिवार और दोस्तों के साथ जुड़ने में है।
  • सादगी और अपनापन इस खास दिन को और खास बनाते हैं।
  • पतंग उड़ाना उत्सव का एक अभिन्न हिस्सा है।

मुंबई, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ठंडी सर्दियों की धूप और आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें मकर संक्रांति के उत्सव की पहचान हैं। इस अवसर पर सभी अपने प्रियजनों के साथ समय बिताते हैं, खुशियाँ बांटते हैं और नए साल के लिए सकारात्मक सोच को अपनाते हैं। इस संदर्भ में सन नियो के कलाकारों ने मकर संक्रांति के महत्व को समझाया और अपने बचपन के अनुभव साझा किए।

‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ में दिव्या का किरदार निभा रहीं मेघा रे ने कहा, "मकर संक्रांति मेरे लिए हमेशा विशेष रही है। यह त्योहार मिठाई खाने या पतंग उड़ाने के अलावा खुशियों, उम्मीदों और परिवार के साथ जुड़ने का अवसर है। मेरा बचपन पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ बांटने में बीता। ये यादें आज भी मेरे दिल में बसी हुई हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "इस वर्ष भी काम की व्यस्तता के बावजूद, मैं अपने सेट पर अपनी टीम के साथ त्योहार मनाने का प्रयास करूंगी और मिठाइयाँ बाँटूंगी। मकर संक्रांति हमें सिखाती है कि नकारात्मकता को छोड़कर, विश्वास, कृतज्ञता और खुशी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मेरी तरफ से सभी को रंगों से भरी और खुशहाल मकर संक्रांति की शुभकामनाएं।"

‘सत्या साची’ में साची की भूमिका निभा रहीं भाग्यश्री मिश्रा ने भी अपने बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा, "मेरे लिए मकर संक्रांति नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। जब मैं रंगीन पतंगें उड़ाती थी और कटी हुई पतंगों के पीछे दौड़ती थी, वो पल आज भी दिल को खुश कर देते हैं। समय के साथ बड़े होने और व्यस्तताओं के कारण त्योहार मनाने का अवसर कम मिलता है, लेकिन अगर मुझे काम के बीच में मौका मिला, तो मैं सेट पर पतंग उड़ाकर अपने सहकर्मियों के साथ खुशी के पल बिताऊंगी। मेरा मानना है कि त्योहार केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन में उमंग और ऊर्जा का संदेश भी लेकर आता है।"

‘बींदणी’ में घेवर का किरदार निभा रहीं गौरी शेलगांवकर ने मकर संक्रांति को सादगी और अपनापन से जोड़ा। उन्होंने कहा, "यह त्योहार परिवार के साथ समय बिताने, स्वादिष्ट खाना खाने और सीखने का अवसर होता है। बचपन में बड़े मुझे तिल-गुड़ देकर कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो। इस साल मैं सादगी से त्योहार मनाऊंगी, अपने प्रियजनों को फोन करूंगी और उनके प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद दूंगी।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं अपनी मां के हाथों से बने तिल के लड्डू सेट पर ले जाऊंगी और सबके साथ बाँटूंगी। बचपन में पापा के साथ पतंग उड़ाना खास अनुभव था और यह दिन मेरे दिल में हमेशा जीवित रहेगा।"

‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ शाम 7:30 बजे, ‘सत्या साची’ शाम 8:00 बजे और ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ रात 9:00 बजे सन नियो चैनल पर प्रसारित होते हैं।

Point of View

बल्कि यह परिवार, एकता और सकारात्मकता का प्रतीक है। कलाकारों के अनुभव हमें यह बताते हैं कि कैसे ये छोटे-छोटे पल हमारे जीवन में खुशियाँ लाते हैं।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाई जाती है, जो नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
इस दिन क्या विशेष पकवान बनते हैं?
इस दिन तिल और गुड़ से बने विभिन्न पकवान जैसे लड्डू और चिउड़े विशेष रूप से बनाए जाते हैं।
पतंग उड़ाने का क्या महत्व है?
पतंग उड़ाना इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो खुशी और उत्साह का प्रतीक है।
बच्चों के लिए यह त्योहार क्यों खास है?
बच्चों के लिए यह त्योहार पतंगबाजी और मिठाइयों का आनंद लेने का एक सुनहरा मौका है।
मकर संक्रांति पर कौन-कौन से खेल खेले जाते हैं?
इस दिन पतंगबाजी के अलावा, कई खेल जैसे रस्सा खींचना और सांप-सीढ़ी भी खेले जाते हैं।
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