क्या मरुआ खांसी और गले की खराश को कम करने में मददगार है, मुंह की दुर्गंध दूर करता है?
सारांश
Key Takeaways
- मरुआ खांसी और गले की खराश में राहत देता है।
- यह बच्चों के लिए फायदेमंद है।
- इसके पत्तों की चटनी पेट के कीड़ों को खत्म करने में मदद करती है।
- मरुआ का काढ़ा कफ रोगियों के लिए लाभकारी है।
- इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मरुआ एक अद्भुत आयुर्वेदिक पौधा है जो आपके शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके पत्तों में पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम और विटामिन बी6 जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे आयुर्वेद में अत्यधिक महत्व दिया गया है।
सर्दियों में आमतौर पर लोग सर्दी-जुकाम, खांसी या कफ की समस्याओं से ग्रस्त होते हैं और मरुआ इन सभी समस्याओं के समाधान में सहायक होता है। आप मरुआ की पत्तियों को चाय में मिलाकर पी सकते हैं। यदि चाहें, तो इसमें थोड़ी मुलेठी भी डाल सकते हैं, जो खांसी और गले की खराश को कम करने में बहुत प्रभावी है।
इसके अलावा, मरुआ बच्चों के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसकी चटनी पेट के कीड़ों को खत्म करने में मदद करती है। आप मरुआ की पत्तियों को पीसकर हल्की चटनी बना सकते हैं और बच्चों को दे सकते हैं। यह पेट के कीड़ों को नष्ट करने और पाचन को मजबूत करने में सहायक है। अपच की समस्या में भी मरुआ बहुत उपयोगी है। आप मरुआ के पत्तों और अदरक का मिश्रण बनाकर चटनी बना सकते हैं और इसे भोजन के साथ खा सकते हैं। इससे आपका पेट हल्का रहेगा और खाना अच्छे से पचेगा।
मरुआ कफ से ग्रस्त रोगियों के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। इसका काढ़ा पीने से गले और फेफड़ों में जमा बलगम आसानी से बाहर निकल जाता है और खांसी में राहत मिलती है। इसके अलावा, मरुआ के पत्ते मुंह की दुर्गंध और मसूड़ों की समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। इसके लिए बस पत्तियों को चबाएं और थूक दें। इससे आपके मुंह की दुर्गंध कम होगी और मसूड़ों की कमजोरी भी दूर होगी।
याद रखें, मरुआ का सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है। नियमित और सही तरीके से सेवन करने पर मरुआ आपके शरीर में पोषण बढ़ाता है, प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करता है और सर्दियों में स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक होता है।