क्या सीएम योगी के विजन ने सौर ऊर्जा से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया?

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क्या सीएम योगी के विजन ने सौर ऊर्जा से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया?

सारांश

बुंदेलखंड की महिलाएं अब सौर ऊर्जा का उपयोग करके चारा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। झांसी की प्रवेश कुमारी का यह उद्यम न केवल आर्थिक रूप से सशक्त कर रहा है, बल्कि गाँव की सामाजिक संरचना में भी बदलाव ला रहा है।

Key Takeaways

  • महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
  • सौर ऊर्जा का उपयोग आर्थिक सशक्तिकरण में मदद करता है।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
  • उद्यमिता से सामाजिक बदलाव संभव है।
  • सस्टेनेबल प्रथाएँ पर्यावरण को सुरक्षित रखती हैं।

लखनऊ, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बुंदेलखंड की भूमि अब केवल वीरता के लिए ही नहीं, बल्कि महिला उद्यमिता के प्रतीक के रूप में भी जानी जा रही है। झांसी की प्रवेश कुमारी ने चारा उत्पादन की एक यूनिट स्थापित कर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जो आज प्रदेश की अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के दृष्टिकोण को साकार करते हुए, प्रवेश ने सौर ऊर्जा का उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाले पशु चारे के उत्पादन की यूनिट स्थापित की है, जिससे न केवल उन्होंने खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।

इस उद्यम की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका ईको-फ्रेंडली होना है। योगी सरकार और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (डीए) के सहयोग से स्थापित यह यूनिट पूरी तरह से 18 केडब्ल्यू सौर ऊर्जा प्रणाली पर आधारित है, जिससे बिजली की लागत लगभग शून्य हो गई है। इस स्थिति ने चारे के उत्पादन की लागत को भी कम किया है।

स्थानीय डेयरी किसानों को सस्ता और पौष्टिक चारा मिलने से उनके पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है। प्रवेश कुमारी आज लगभग 25,000 रुपए प्रति माह की आय प्राप्त कर रही हैं। उनके इस स्टार्टअप ने गाँव की सामाजिक संरचना में भी बदलाव लाया है।

यहाँ पर आधुनिक तकनीक और मानकीकृत प्रक्रियाओं का उपयोग कर पौष्टिक चारा तैयार किया जाता है। प्रवेश केवल एक उद्यमी ही नहीं, बल्कि एक कुशल प्रबंधक भी हैं। वे कच्चे माल की खरीद से लेकर वित्तीय प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण तक सभी कार्यों की जिम्मेदारी स्वयं संभालती हैं। उनके उद्यम 'गोमाता कैटल फीड' को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

महिला उद्यमी प्रवेश कुमारी ने कहा कि यह यात्रा एक छोटे से प्रयास से शुरू हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के सहयोग ने इसे एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है। आज गाँव की महिलाएं एकजुट होकर काम कर रही हैं।

--आईएएनए

डीकेपी/

Point of View

बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। इस तरह की पहलों को प्रोत्साहित करना जरूरी है ताकि हमारे देश की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें और समाज में अपनी पहचान बना सकें।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

प्रवेश कुमारी ने अपनी यूनिट कैसे स्थापित की?
प्रवेश कुमारी ने सौर ऊर्जा की मदद से चारा उत्पादन की यूनिट स्थापित की है, जिसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का सहयोग मिला।
इस यूनिट की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
यह यूनिट पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली है और इसकी बिजली की लागत शून्य है, जिससे चारा उत्पादन की लागत कम होती है।
महिलाओं को इस उद्यम से क्या लाभ हुआ है?
महिलाओं को स्थायी आय और आर्थिक स्वतंत्रता मिली है, जिससे वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा रही हैं।
प्रवेश कुमारी की मासिक आय कितनी है?
प्रवेश कुमारी की मासिक आय लगभग 25,000 रुपए है।
इस यूनिट को कौन से पुरस्कार मिले हैं?
प्रवेश कुमारी के 'गोमाता कैटल फीड' को कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जो उनके काम की सराहना करते हैं।
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