क्या रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने की चमक फीकी पड़ी? चांदी ने फिर से दिखाई रफ्तार!

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क्या रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने की चमक फीकी पड़ी? चांदी ने फिर से दिखाई रफ्तार!

सारांश

सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद चांदी ने दिखाई मजबूती। निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए सोने की बिक्री की। जानें आगे की स्थिति और बाजार के रुख के बारे में।

Key Takeaways

  • सोने की कीमत में गिरावट हुई है।
  • चांदी ने मजबूती दिखाई है।
  • निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की है।
  • बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
  • चांदी की डemand बढ़ रही है।

मुंबई, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सोमवार को रिकॉर्ड हाई स्तर पर पहुँचने के बाद, हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन, मंगलवार को कीमती धातुओं (सोने और चांदी) की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली। इसका कारण यह रहा कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुँचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली करना शुरू कर दिया।

इससे पहले, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख के खिलाफ कार्यवाही की खबरों के चलते सोने और चांदी के दाम बहुत बढ़ गए थे और रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गए थे।

हालांकि, बाद में चांदी ने रिकवरी की और एमसीएक्स पर इसकी कीमतों में उछाल देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक, एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत गिरकर 1,41,577 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपए की तेजी के साथ 2,70,322 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करते नजर आई।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत घटकर 1,40,482 रुपए हो गई, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,40,499 रुपए थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई थी। इसके बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में गिरावट आई।

सोने की कीमतों में तेजी की एक मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह ऐलान रहा, जिसमें उन्होंने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात कही थी। साथ ही, उन्होंने ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने कहा कि बाजार की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच पर बनी हुई है। पॉवेल ने इसे राजनीतिक दबाव बताया है, जिसका मकसद ब्याज दरों में कटौती करवाना है।

निवेशक अब अमेरिका की महंगाई से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगे की नीति की दिशा साफ हो सके। माना जा रहा है कि इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन साल के अंत तक दो बार कटौती हो सकती है।

पिछले सप्ताह आई अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने की जानकारी मिली थी। इससे यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है।

ईरान में हो रहे प्रदर्शनों, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए संकेतों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। इन कारणों से सोने की कीमतों को सहारा मिला है।

विश्लेषकों के अनुसार, सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपए के बीच सपोर्ट, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपए के स्तर पर रेजिस्टेंस मिल रहा है।

वहीं, चांदी में 2,60,810 से 2,54,170 रुपए के बीच सपोर्ट और 2,71,810 से 2,74,470 रुपए के बीच रेजिस्टेंस है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि चांदी की डemand लंबे समय में मजबूत बनी हुई है। उद्योगों और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती जरूरत और कम आपूर्ति के चलते आने वाले समय में चांदी की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

Point of View

हमें यह याद रखना चाहिए कि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य हैं। निवेशकों को चाहिए कि वे सोच-समझकर निर्णय लें और मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति बनाएं।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करना है, जो कि रिकॉर्ड हाई स्तर पर पहुँचने के बाद हुआ।
चांदी की कीमतों में तेजी क्यों आई?
चांदी की कीमतों में तेजी का कारण इसकी रिकवरी और बाजार में बढ़ती मांग है।
क्या सोने की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं?
विश्लेषकों का मानना है कि सोने की कीमतें भविष्य में बढ़ सकती हैं, खासकर जब तक बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है।
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