10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या है प्रसून जोशी का वो गाना जिसको लिखते समय उनकी आंखों से आ गए थे आंसू?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या है प्रसून जोशी का वो गाना जिसको लिखते समय उनकी आंखों से आ गए थे आंसू?

सारांश

प्रसून जोशी, एक संवेदनशील गीतकार, ने हिंदी सिनेमा में कई दिल छू लेने वाले गाने लिखे हैं। उनके गाने सिर्फ सुनने के लिए नहीं होते, बल्कि महसूस करने के लिए होते हैं। जानें उनके सबसे प्रसिद्ध गाने 'मां' के पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

प्रसून जोशी का गाना 'मां' एक भावनात्मक ट्रिब्यूट है।
उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं।
प्रसून जोशी का लेखन हर दिल को छू जाता है।
उनका गाना सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि मां के प्रति भावनाओं का प्रदर्शन है।
गाना आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।

मुंबई, 15 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा में कुछ गाने सिर्फ सुनने के लिए नहीं होते, बल्कि महसूस करने के लिए होते हैं। ये गाने सीधे दिल में उतर जाते हैं। प्रसून जोशी एक ऐसे ही गीतकार हैं जिनकी कलम ने अनगिनत दिल छू लेने वाले गीत लिखे हैं।

16 सितंबर 1971 को जन्मे प्रसून जोशी भारतीय विज्ञापन जगत, कविता, गीत लेखन और पटकथा लेखन की दुनिया में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वे एक प्रसिद्ध कवि, लेखक, गीतकार और विचारक होने के साथ-साथ विज्ञापन उद्योग में भी अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं।

फिल्में जैसे 'तारे जमीन पर,' 'रंग दे बसंती,' 'गजनी' और 'भाग मिल्खा भाग' के लिए लिखे उनके गाने आज भी दर्शकों के दिलों में गूंजते हैं। अपनी गहरी संवेदनशीलता और प्रभावशाली लेखन शैली के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्हें 2015 में पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया था। इस समय वे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के चेयरमैन भी हैं।

प्रसून जोशी के लिखे गीत हर दिल के करीब होते हैं, लेकिन फिल्म 'तारे जमीन पर' का गाना 'मां' ऐसा है, जिसने न केवल करोड़ों लोगों को रुलाया, बल्कि इसे लिखते समय खुद प्रसून जोशी की आंखें भी नम हो गई थीं।

उन्होंने एक इंटरव्यू में इस किस्से को साझा किया था। वह बताते हैं कि जब अभिनेता आमिर खान ने उनसे यह गाना लिखने को कहा, तो उन्होंने एक बच्चे के उस दर्द को महसूस करने की कोशिश की, जो अपनी मां से दूर है। गाना लिखते-लिखते, वह अपने बचपन की यादों में खो गए।

उन्हें याद आया कि कैसे जब वह छोटे थे और किसी भी डर से घिर जाते थे, तो उनकी आंखें अनजाने में अपनी मां को ढूंढने लगती थीं। उन्होंने इसी भावना को गाने के शब्दों में पिरोया- "मैं कभी बतलाता नहीं, पर अंधेरे से डरता हूं मैं मां... यूं तो मैं दिखलाता नहीं, पर तेरी परवाह करता हूं मैं मां... तुझे सब है पता, है ना मां?"

जब प्रसून जोशी ये बोल लिख रहे थे, तो वह अपने भीतर की भावनाओं को रोक नहीं पाए। यह गाना केवल एक काम नहीं था, बल्कि अपनी मां के प्रति उन भावनाओं को व्यक्त करने का एक जरिया था, जिन्हें वह कभी शब्दों में नहीं कह पाए थे।

गाना रिलीज होने के बाद काफी हिट हुआ, लोग आज भी रील्स में इस गाने को अपनी मां को साझा करते हुए दिखाई देते हैं। यह गाना हर उस इंसान से जुड़ा है जो अपनी मां से दूर है या जो अपनी मां को अपनी ढाल मानता है। प्रसून जोशी के लिए, यह गाना केवल एक गीत नहीं था, बल्कि अपनी मां को एक ट्रिब्यूट था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक भावनात्मक यात्रा है, जो हर दर्शक के दिल को छू जाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रसून जोशी का जन्म कब हुआ था?
प्रसून जोशी का जन्म 16 सितंबर 1971 को हुआ था।
प्रसून जोशी ने कौन-कौन से प्रसिद्ध गाने लिखे हैं?
प्रसून जोशी ने 'तारे जमीन पर', 'रंग दे बसंती', 'गजनी' और 'भाग मिल्खा भाग' जैसे गाने लिखे हैं।
प्रसून जोशी को कौन सा पुरस्कार मिला है?
प्रसून जोशी को 2015 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
'मां' गाना किस फिल्म से है?
'मां' गाना फिल्म 'तारे जमीन पर' से है।
प्रसून जोशी का लेखन शैली क्या है?
प्रसून जोशी की लेखन शैली संवेदनशील और गहरी होती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले