प्रतीक सहजपाल का बड़ा बयान: 'सिचुएशनशिप' प्यार नहीं, महज टाइम पास है
सारांश
मुख्य बातें
बिग बॉस 15 के रनर-अप और अभिनेता प्रतीक सहजपाल ने 23 अगस्त को मुंबई में आधुनिक रिश्तों पर बेबाकी से अपनी राय साझा की — और साफ कहा कि 'सिचुएशनशिप' को वह प्यार की श्रेणी में नहीं रखते। उनके मुताबिक, यह रिश्ते का नहीं बल्कि महज वक्त गुज़ारने का तरीका है।
सिचुएशनशिप पर सीधा रुख
प्रतीक ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो जब मॉडर्न रिश्तों की बात आती है तो मैं 'सिचुएशनशिप' भी नहीं कह सकता। मुझे लगता है कि ये बहुत बड़ी-बड़ी बातें हैं। इसमें प्यार जैसा कुछ नहीं है। इसे प्यार नहीं कह सकते। यह सिर्फ टाइम पास है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज कई लोग ऐसे रिश्तों में सहज हैं जहाँ वे एक दिन किसी के साथ होते हैं और अगले दिन किसी और के साथ आगे बढ़ जाते हैं।
हालाँकि प्रतीक ने इसे गलत नहीं ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया, 'मैं इसे गलत नहीं कह रहा हूं। बस मेरे मुताबिक, यह आज की पीढ़ी की सोच और बदलती जिंदगी का हिस्सा है और हर व्यक्ति अपनी पसंद के हिसाब से जीने के लिए स्वतंत्र है।'
समाज में रिश्तों की बदलती परिभाषा
प्रतीक ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि रिश्तों को लेकर समाज की सोच हमेशा से बदलती रही है। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में ग्रुप मैरिज जैसा कॉन्सेप्ट होता है और बाद में यह अलग रूप में आगे बढ़ता है।' यह बदलाव उन्हें परेशान नहीं करता, लेकिन वे खुद इस तरह के रिश्तों में विश्वास नहीं रखते।
नए शो 'दिल से दीवानगी तक' में किरदार
प्रतीक इन दिनों अपने नए शो 'दिल से दीवानगी तक' में शिवाय का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बताया, 'शो में रिश्तों को कुछ अलग तरीके से दिखाया गया है। शिवाय अपनी भावनाओं को लेकर थोड़ा उलझा हुआ है — उसके अंदर प्यार है, लेकिन वह अपनी भावनाओं को समझने और उनके साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।' उन्होंने कहा कि किरदार की आँखों में यह साफ दिखेगा कि वह वास्तव में किससे प्यार करता है।
प्यार की व्यापक परिभाषा
प्रतीक ने प्यार को केवल रोमांटिक रिश्तों तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा, 'प्यार का मतलब यह जरूरी नहीं है कि मेरे सामने कोई लड़की हो और मैं लड़का हूं, तो मैं कहूं कि मैं उस लड़की से प्यार करूंगा। मैं इस पौधे से भी प्यार कर सकता हूं। मुझे यह कैमरा भी बहुत पसंद है और मैं इससे भी बहुत प्यार करता हूं।' यह नज़रिया उनकी उस सोच को दर्शाता है जो प्यार को एक व्यापक और समावेशी भावना के रूप में देखती है।