नकुल मेहता ने 'इश्कबाज' के 10 साल पर किया खुलासा — कैसे बना 'शिवाय' का यादगार किरदार
सारांश
Key Takeaways
- नकुल मेहता ने 24 अप्रैल 2025 को 'इश्कबाज' के 10 साल पूरे होने पर इंस्टाग्राम पर भावुक पोस्ट शेयर की।
- शो की शूटिंग 23 अप्रैल 2016 को मुंबई में 200 लोगों की टीम के साथ शुरू हुई थी।
- शिवाय ओबेरॉय का किरदार महीनों की अवचेतन तैयारी और बारीक मेहनत का नतीजा था।
- जयपुर की एक फ्लाइट में प्रशंसकों ने नकुल को शो की 10वीं वर्षगांठ की बधाई दी।
- नकुल ने बताया कि इन 10 वर्षों में टीम ने खुशियां मनाईं, लेकिन इस साल एक प्रिय सदस्य को भी खोया।
- ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर 'इश्कबाज' आज भी नए और पुराने दर्शकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।
मुंबई, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। टेलीविजन के चर्चित अभिनेता नकुल मेहता ने अपने आइकॉनिक धारावाहिक 'इश्कबाज' के 10 साल पूरे होने पर सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट शेयर की। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल 2016 को मुंबई की तपती गर्मी में इस शो की शूटिंग शुरू हुई थी, और उस पहले दिन का एहसास आज भी उनके जेहन में ताजा है। इश्कबाज ने न केवल नकुल को घर-घर में पहचान दिलाई, बल्कि दर्शकों के लिए 'प्यार' के मायने भी बदल दिए।
जयपुर की फ्लाइट में मिली बधाई ने जगाई पुरानी यादें
नकुल मेहता ने इंस्टाग्राम पर 'इश्कबाज' की पुरानी तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा कि जयपुर जाने वाली एक फ्लाइट में कुछ प्रशंसकों ने उन्हें शो के 10 साल पूरे होने की बधाई दी। उन प्रशंसकों ने कहा कि इस धारावाहिक ने उनके जीवन में प्यार को एक नया अर्थ दिया।
अभिनेता के लिए यह मुलाकात भावनात्मक रूप से गहरी रही। उन्होंने स्वीकार किया कि जब भी कोई 'इश्कबाज' से जुड़ी कोई कहानी उन्हें सुनाता है, तो उनका दिल खुशी से भर जाता है।
पहले दिन की शूटिंग और आत्मविश्वास का किस्सा
नकुल ने लिखा कि शूटिंग के पहले दिन 200 लोगों की टीम के साथ काम शुरू हुआ था। उन्होंने वैन में घंटों इंतजार किया क्योंकि उनका शॉट आधी रात को शेड्यूल था। बावजूद इसके वे उस दिन असाधारण रूप से आत्मविश्वास से भरे हुए थे।
उन्होंने बताया कि शो का पायलट एपिसोड पहले ही शूट हो चुका था, जिसके बाद वे महीनों तक अवचेतन रूप से 'शिवाय' के किरदार को जीते रहे। यह तैयारी किसी रात भर की मेहनत का नतीजा नहीं थी।
'शिवाय' बनने की बारीक तैयारी
नकुल मेहता ने खुलासा किया कि शिवाय ओबेरॉय के किरदार को जीवंत करने के लिए उन्होंने हर छोटी-बड़ी बारीकी पर काम किया — चाहे वह किरदार का चलने का अंदाज हो, चेहरे के भाव हों, बात करने की लय हो, या यहां तक कि फोन पकड़ने का तरीका।
उन्होंने बताया कि जब पहले दिन तीनों ओबेरॉय भाइयों के एक साथ चलने का शॉट मॉनिटर पर देखा गया, तो पूरी टीम को एहसास हो गया था कि कुछ जादुई बनने वाला है। यह वह पल था जब एक साधारण शो असाधारण बनने की राह पर चल पड़ा।
ओटीटी युग में भी 'इश्कबाज' की अमिट छाप
नकुल ने कहा कि आज ओटीटी और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने पुराने टीवी शोज को नई जिंदगी दे दी है। 'इश्कबाज' आज भी नए दर्शकों को आकर्षित करता है और पुराने प्रशंसक इसे बार-बार देखते हैं।
उनके अनुसार शो की सफलता का राज केवल मजबूत स्क्रिप्ट नहीं थी, बल्कि कास्ट और क्रू के बीच का अटूट आपसी तालमेल और जुनून था, जिसने इसे दर्शकों के लिए एक 'घर' जैसा बना दिया।
10 साल का सफर — खुशियां भी, गम भी
इन दस वर्षों के सफर पर बात करते हुए नकुल मेहता भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि इस दौरान टीम के कई सदस्यों की शादियां हुईं, कई माता-पिता बने — लेकिन इस साल टीम ने अपने एक प्रिय सदस्य को भी खो दिया।
इन तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद एक चीज हमेशा स्थिर रही — दर्शकों का अटूट प्यार। नकुल ने लिखा कि यही प्यार उनकी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा है।
आने वाले समय में नकुल मेहता ओटीटी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करते नजर आएंगे, लेकिन 'इश्कबाज' की विरासत उनके करियर का सबसे चमकदार अध्याय बनी रहेगी।