प्रियंका चोपड़ा की मिस इंडिया यात्रा: माँ ने शैंपेन के साथ पिता को मनाया, बदल गई ज़िंदगी
सारांश
मुख्य बातें
प्रियंका चोपड़ा आज हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों में एक स्थापित नाम हैं, लेकिन उनके करियर की नींव रखने वाला पहला कदम — मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लेना — एक साधारण लंच ब्रेक के दौरान आई फोन कॉल और उनकी माँ की एक चतुर योजना से शुरू हुआ था। प्रियंका ने अपनी आत्मकथा 'अभी बाकी है सफर' में इस अनसुने किस्से को विस्तार से साझा किया है।
फेमिना की वह फोन कॉल जिसने सब बदल दिया
साल 2000 में जब प्रियंका महज 17 साल की थीं और अपनी पढ़ाई में व्यस्त थीं, तब स्कूल और ट्यूशन के बीच लंच के दौरान उन्हें फेमिना मैगजीन से एक फोन आया। उन्हें बताया गया कि उनका चयन मिस इंडिया पैजेंट के नॉर्थ इंडिया राउंड के लिए हुआ है और उन्हें दिल्ली में होने वाले शुरुआती ऑडिशन में शामिल होना है।
पहले प्रियंका को लगा कि बरेली में उनकी लोकप्रियता की वजह से उन्हें चुना गया होगा। उन्होंने मासूमियत से सोचा कि 'मैं बरेली में इतनी पॉपुलर हूँ कि मिस इंडिया वालों को भी पता है।' लेकिन बाद में उनकी माँ डॉ. मधु चोपड़ा ने खुलासा किया कि उन्होंने ही प्रियंका की तरफ से आवेदन भेजा था।
पिता को मनाने की चुनौती
प्रियंका का जन्म 18 जुलाई 1982 को जमशेदपुर में हुआ था। उनके माता-पिता — कैप्टन डॉ. अशोक चोपड़ा और डॉ. मधु चोपड़ा — भारतीय सेना में चिकित्सक थे और परिवार में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी। उस समय प्रियंका के प्री-बोर्ड एग्जाम नज़दीक थे और उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें।
ऐसे माहौल में ब्यूटी पेजेंट में भाग लेने की बात उठाना आसान नहीं था। यह काम डॉ. मधु चोपड़ा ने अपने अंदाज़ में संभाला।
माँ की 'शैंपेन वाली' रणनीति
डॉ. मधु चोपड़ा ने प्रियंका को समझाया कि जब पिता घर आएँ तो माहौल खुशनुमा रखें, कोई बहस न करें। इसके बाद उन्होंने कहा — 'मैं शैंपेन के साथ उनसे बात करूँगी।' सही समय और सही तरीके से रखी गई इस बात का असर हुआ और प्रियंका के पिता मान गए। हालाँकि उन्होंने एक शर्त रखी — प्रियंका अकेले नहीं जाएंगी, उनकी माँ साथ जाएंगी।
दिल्ली का पहला ऑडिशन और नया अनुभव
इसके बाद प्रियंका और डॉ. मधु चोपड़ा ट्रेन से दिल्ली रवाना हुईं और मिस इंडिया के शुरुआती राउंड में पहुँचीं। वहाँ पहुँचकर प्रियंका हैरान रह गईं — कई प्रतिभागी पहले से मॉडलिंग और फैशन की दुनिया से जुड़ी थीं। यह उनके लिए एक बिल्कुल नई दुनिया थी।
गौरतलब है कि प्रियंका ने कभी नहीं सोचा था कि वह इस प्रतियोगिता में इतना आगे जाएंगी — लेकिन यही अनुभव उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
मिस इंडिया से मिस वर्ल्ड तक का सफर
प्रियंका ने 2000 में मिस इंडिया वर्ल्ड का खिताब जीता और उसी साल मिस वर्ल्ड का ताज भी अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में कदम रखा और आज वह एक अंतरराष्ट्रीय अभिनेत्री, निर्माता, उद्यमी और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचानी जाती हैं। एक माँ की समझदारी और एक बेटी की हिम्मत — यही वह असली कहानी है जिसने एक वैश्विक सितारे को जन्म दिया।