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प्रियंका चोपड़ा की मिस इंडिया यात्रा: माँ ने शैंपेन के साथ पिता को मनाया, बदल गई ज़िंदगी

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प्रियंका चोपड़ा की मिस इंडिया यात्रा: माँ ने शैंपेन के साथ पिता को मनाया, बदल गई ज़िंदगी

सारांश

17 साल की उम्र में एक फोन कॉल, माँ की शैंपेन वाली चाल और पिता की एक शर्त — यही वह पल था जिसने प्रियंका चोपड़ा को मिस इंडिया के मंच तक पहुँचाया और फिर दुनिया ने उन्हें मिस वर्ल्ड के रूप में जाना।

मुख्य बातें

प्रियंका चोपड़ा ने अपनी आत्मकथा 'अभी बाकी है सफर' में मिस इंडिया की अनसुनी कहानी साझा की है।
मधु चोपड़ा ने प्रियंका की जानकारी के बिना फेमिना मिस इंडिया के लिए आवेदन किया था।
अशोक चोपड़ा को 'शैंपेन के साथ' मनाया गया; शर्त थी कि माँ साथ जाएंगी।
प्रियंका उस समय 17 साल की थीं और प्री-बोर्ड एग्जाम की तैयारी में थीं।
साल 2000 में प्रियंका ने मिस इंडिया वर्ल्ड और फिर मिस वर्ल्ड का खिताब जीता।

प्रियंका चोपड़ा आज हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों में एक स्थापित नाम हैं, लेकिन उनके करियर की नींव रखने वाला पहला कदम — मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लेना — एक साधारण लंच ब्रेक के दौरान आई फोन कॉल और उनकी माँ की एक चतुर योजना से शुरू हुआ था। प्रियंका ने अपनी आत्मकथा 'अभी बाकी है सफर' में इस अनसुने किस्से को विस्तार से साझा किया है।

फेमिना की वह फोन कॉल जिसने सब बदल दिया

साल 2000 में जब प्रियंका महज 17 साल की थीं और अपनी पढ़ाई में व्यस्त थीं, तब स्कूल और ट्यूशन के बीच लंच के दौरान उन्हें फेमिना मैगजीन से एक फोन आया। उन्हें बताया गया कि उनका चयन मिस इंडिया पैजेंट के नॉर्थ इंडिया राउंड के लिए हुआ है और उन्हें दिल्ली में होने वाले शुरुआती ऑडिशन में शामिल होना है।

पहले प्रियंका को लगा कि बरेली में उनकी लोकप्रियता की वजह से उन्हें चुना गया होगा। उन्होंने मासूमियत से सोचा कि 'मैं बरेली में इतनी पॉपुलर हूँ कि मिस इंडिया वालों को भी पता है।' लेकिन बाद में उनकी माँ डॉ. मधु चोपड़ा ने खुलासा किया कि उन्होंने ही प्रियंका की तरफ से आवेदन भेजा था।

पिता को मनाने की चुनौती

प्रियंका का जन्म 18 जुलाई 1982 को जमशेदपुर में हुआ था। उनके माता-पिता — कैप्टन डॉ. अशोक चोपड़ा और डॉ. मधु चोपड़ा — भारतीय सेना में चिकित्सक थे और परिवार में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी। उस समय प्रियंका के प्री-बोर्ड एग्जाम नज़दीक थे और उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें।

ऐसे माहौल में ब्यूटी पेजेंट में भाग लेने की बात उठाना आसान नहीं था। यह काम डॉ. मधु चोपड़ा ने अपने अंदाज़ में संभाला।

माँ की 'शैंपेन वाली' रणनीति

डॉ. मधु चोपड़ा ने प्रियंका को समझाया कि जब पिता घर आएँ तो माहौल खुशनुमा रखें, कोई बहस न करें। इसके बाद उन्होंने कहा — 'मैं शैंपेन के साथ उनसे बात करूँगी।' सही समय और सही तरीके से रखी गई इस बात का असर हुआ और प्रियंका के पिता मान गए। हालाँकि उन्होंने एक शर्त रखी — प्रियंका अकेले नहीं जाएंगी, उनकी माँ साथ जाएंगी।

दिल्ली का पहला ऑडिशन और नया अनुभव

इसके बाद प्रियंका और डॉ. मधु चोपड़ा ट्रेन से दिल्ली रवाना हुईं और मिस इंडिया के शुरुआती राउंड में पहुँचीं। वहाँ पहुँचकर प्रियंका हैरान रह गईं — कई प्रतिभागी पहले से मॉडलिंग और फैशन की दुनिया से जुड़ी थीं। यह उनके लिए एक बिल्कुल नई दुनिया थी।

गौरतलब है कि प्रियंका ने कभी नहीं सोचा था कि वह इस प्रतियोगिता में इतना आगे जाएंगी — लेकिन यही अनुभव उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

मिस इंडिया से मिस वर्ल्ड तक का सफर

प्रियंका ने 2000 में मिस इंडिया वर्ल्ड का खिताब जीता और उसी साल मिस वर्ल्ड का ताज भी अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में कदम रखा और आज वह एक अंतरराष्ट्रीय अभिनेत्री, निर्माता, उद्यमी और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचानी जाती हैं। एक माँ की समझदारी और एक बेटी की हिम्मत — यही वह असली कहानी है जिसने एक वैश्विक सितारे को जन्म दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

चुपचाप आवेदन भेजना और फिर पति को सही समय पर मनाना — उस पीढ़ी की माँओं की सूझबूझ का प्रतीक है। यह भी उल्लेखनीय है कि सेना की पृष्ठभूमि वाले एक अनुशासित परिवार से निकलकर प्रियंका ने जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी लाखों लड़कियों के लिए एक वास्तविक प्रेरणा है — न कि महज एक प्रचार-कथा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चोपड़ा की माँ ने मिस इंडिया के लिए आवेदन कैसे किया?
डॉ. मधु चोपड़ा ने प्रियंका की जानकारी के बिना फेमिना मिस इंडिया पेजेंट के लिए उनकी तरफ से आवेदन भेजा था। प्रियंका को शुरू में लगा कि बरेली में उनकी लोकप्रियता की वजह से उनका चयन हुआ है, लेकिन बाद में माँ ने सच बताया।
प्रियंका चोपड़ा के पिता ने मिस इंडिया की अनुमति क्यों नहीं दी थी?
प्रियंका के पिता कैप्टन डॉ. अशोक चोपड़ा चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें, क्योंकि उस समय उनके प्री-बोर्ड एग्जाम नज़दीक थे। सेना की पृष्ठभूमि वाले परिवार में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी।
'शैंपेन के साथ बात करूँगी' — यह किस संदर्भ में कहा गया?
डॉ. मधु चोपड़ा ने प्रियंका को समझाया कि जब पिता घर आएँ तो माहौल अच्छा रखें। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह शैंपेन के साथ पिता से इस विषय पर बात करेंगी — यानी सही समय और सही माहौल में बात रखने की रणनीति अपनाई।
प्रियंका चोपड़ा ने मिस इंडिया और मिस वर्ल्ड कब जीता?
प्रियंका चोपड़ा ने साल 2000 में मिस इंडिया वर्ल्ड का खिताब जीता और उसी वर्ष मिस वर्ल्ड का ताज भी अपने नाम किया। उस समय वह 17-18 वर्ष की थीं।
प्रियंका चोपड़ा की आत्मकथा का नाम क्या है?
प्रियंका चोपड़ा की आत्मकथा का नाम 'अभी बाकी है सफर' है, जिसमें उन्होंने अपनी ज़िंदगी के कई अनसुने किस्से, जिसमें मिस इंडिया की यात्रा भी शामिल है, साझा किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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