11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पूजा चोपड़ा के जन्म पर ससुराल का फरमान: 'मार दो या अनाथालय में छोड़ो', मां नीरा ने सुनाई दर्द भरी दास्तान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पूजा चोपड़ा के जन्म पर ससुराल का फरमान: 'मार दो या अनाथालय में छोड़ो', मां नीरा ने सुनाई दर्द भरी दास्तान

सारांश

पूजा चोपड़ा की माँ नीरा की कहानी सिर्फ एक माँ की नहीं, एक योद्धा की है। बेटी के जन्म पर 'मार दो या अनाथालय में छोड़ो' का फरमान सुनकर वह ₹81 लेकर घर से निकलीं — और उसी बेटी ने एक दिन मिस इंडिया बनकर उनका वादा सच कर दिखाया।

मुख्य बातें

पूजा चोपड़ा की माँ नीरा ने रियलिटी शो 'तुम हो ना — घर की सुपरस्टार' पर ससुराल के दबाव का खुलासा किया।
पूजा के जन्म के 20 दिनों तक नीरा पर रोज़ाना बच्ची को 'खत्म करने' या अनाथ आश्रम में छोड़ने का दबाव बनाया गया।
नीरा ने 21 दिन की पूजा और 7 साल की बड़ी बेटी को लेकर, पर्स में सिर्फ ₹81 के साथ घर छोड़ा।
कोलकाता से मुंबई बिना टिकट पहुँचीं; पाँच सितारा होटल में ₹900 प्रति माह की नौकरी से जीवन शुरू किया।
छह साल की मेहनत के बाद गोवा में ₹6,000 की नौकरी मिली और जीवन पटरी पर आया।
आज मिस इंडिया 2009 पूजा चोपड़ा की सफलता ने नीरा के उस वादे को सच कर दिखाया जो उन्होंने घर छोड़ते वक्त किया था।

मिस इंडिया 2009 और अभिनेत्री पूजा चोपड़ा की माँ नीरा ने खुलासा किया है कि पूजा के जन्म के बाद उन पर ससुराल की ओर से बच्ची को 'खत्म कर देने' या 'अनाथ आश्रम में छोड़ देने' का दबाव बनाया गया था। रियलिटी शो 'तुम हो ना — घर की सुपरस्टार' पर मेजबान राजीव खंडेलवाल के साथ एक भावुक बातचीत में नीरा ने वह पूरा संघर्ष बयान किया, जिसने उन्हें महज ₹81 और दो बेटियों के साथ घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

शादी के शुरुआती साल और बेटे की उम्मीद

नीरा ने बताया कि शादी के शुरुआती वर्षों में ससुराल का माहौल ठीक-ठाक था। जब पहली बेटी हुई, तब भी घर में कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ। लेकिन जब पहली बेटी डेढ़ साल की थी, तब सास को कैंसर हो गया। नीरा ने याद किया, 'मम्मी सब ठीक हो जाएगा ना?' पूछने पर सास ने जवाब दिया था, 'अगर तुम्हारा बेटा हो जाएगा तो माहौल बहुत अच्छा हो जाएगा।' यह वाक्य उस दबाव की शुरुआत थी जो आने वाले वर्षों में और गहरा होता चला गया।

पूजा के जन्म के बाद का दर्दनाक दौर

जब पहली बेटी सात साल की हुई, तब नीरा ने दूसरी बेटी पूजा को जन्म दिया। नीरा ने बताया कि अस्पताल में तीन दिन तक उन्हें देखने कोई नहीं आया, बच्ची के लिए कपड़े तक नहीं थे। सामने के बिस्तर पर एक अधिकारी की पत्नी थी जिसके दूसरे बेटे का जन्म हुआ था — उसी ने अपने बच्चे के कपड़े देकर पूजा को पहनाए।

नीरा ने आगे कहा कि दस दिन बाद पति उन्हें घर लेने आए — बिना किसी खुशी के, बच्ची को उठाया तक नहीं। घर पहुँचते ही ग्यारहवें दिन से उनसे घर का काम शुरू करा दिया गया।

'इसे खत्म कर दो या अनाथ आश्रम में डाल दो'

नीरा ने बताया कि पूजा के जन्म के 20 दिन बाद तक उन पर रोज़ाना दबाव बनाया जाता रहा। उनके शब्दों में, 'हर रोज़ बोलते थे कि इसे खत्म कर दो, या अनाथ आश्रम में डाल दो... अरे, मां हूं, कैसे करूं ऐसा?' यह वह क्षण था जब नीरा ने एक अटल फैसला किया।

21 दिन की नवजात पूजा को गोद में लेकर और सात साल की बड़ी बेटी का हाथ थामकर नीरा ने वह घर हमेशा के लिए छोड़ दिया। जाते वक्त उन्होंने ससुराल वालों से कहा था, 'आप मुझे इस बेटी के लिए निकाल रहे हो ना — एक दिन यह लड़की मुझे गौरवान्वित करेगी।'

₹81 लेकर मुंबई का सफर और नई शुरुआत

नीरा अपने पर्स में केवल ₹81 लेकर कोलकाता से मुंबई आईं — और उन्होंने स्वीकार किया कि बिना टिकट के आना पड़ा। मुंबई में उनके माता-पिता थे, जहाँ उन्होंने शरण ली।

नौकरी की तलाश में वह एक पाँच सितारा होटल पहुँचीं, जहाँ उनकी मुलाकात मिसेज मोना चावला से हुई। नीरा ने सीधे कहा, 'मैम, प्लीज़ मुझे नौकरी दे दो।' चावला ने उनसे पूछा कि केबिन में क्या खराब है — नीरा ने बेझिझक कहा, 'एसी बहुत शोर करता है और कालीन भी साफ नहीं है।' इस ईमानदारी से प्रभावित होकर चावला ने उन्हें अगले ही दिन से काम पर रख लिया। पहली तनख्वाह थी ₹900 प्रति माह।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

नीरा ने बताया कि उन्होंने ₹900 की तनख्वाह में से अपनी माँ को सब कुछ दे दिया, सिर्फ बच्चियों के दूध के लिए थोड़ा रखा। छह साल की मेहनत के बाद उन्हें गोवा में ₹6,000 प्रति माह की नौकरी मिली और जीवन धीरे-धीरे पटरी पर आया।

आज जब पूजा चोपड़ा मिस इंडिया 2009 का खिताब जीत चुकी हैं और बॉलीवुड में स्थापित हैं, नीरा ने कहा, 'अगर जन्म होते हैं बार-बार, तो मैं ऊपर वाले से यहीं माँगूंगी कि जितने जन्म दे, मुझे ये दोनों बेटियाँ वापस देना।' एक माँ की यह दास्तान बताती है कि दृढ़ संकल्प और ममता किसी भी मुश्किल से बड़ी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक सामाजिक मानसिकता की है जो बेटी के जन्म को आज भी 'बोझ' मानती है। यह ऐसे समय में सामने आई है जब 'बेटी बचाओ' जैसे अभियान एक दशक से चल रहे हैं, फिर भी कन्या-भ्रूण हत्या और बेटी-विरोधी पारिवारिक दबाव की घटनाएँ थमी नहीं हैं। पूजा की सफलता एक सुखद अंत है, लेकिन असली सवाल यह है कि जिन माँओं के पास नीरा जैसा साहस या मुंबई में माता-पिता का सहारा नहीं है, उनका क्या होता है। मनोरंजन की चमक के पीछे छिपी यह कहानी एक सामाजिक आईना है जिसे नज़रअंदाज़ करना आसान है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूजा चोपड़ा की माँ नीरा ने क्या खुलासा किया?
नीरा ने बताया कि पूजा के जन्म के बाद ससुराल वाले रोज़ाना उन पर बच्ची को 'खत्म कर देने' या 'अनाथ आश्रम में छोड़ देने' का दबाव बनाते थे। यह सिलसिला पूजा के जन्म के 20 दिनों तक चला, जिसके बाद नीरा ने 21 दिन की बच्ची को लेकर घर छोड़ दिया।
नीरा ने घर छोड़ने के बाद क्या किया?
नीरा केवल ₹81 लेकर कोलकाता से मुंबई आईं, जहाँ उनके माता-पिता रहते थे। मुंबई में उन्होंने एक पाँच सितारा होटल में ₹900 प्रति माह की नौकरी से जीवन नए सिरे से शुरू किया।
नीरा को नौकरी कैसे मिली?
नीरा एक पाँच सितारा होटल में सीधे पहुँचीं और मिसेज मोना चावला से नौकरी माँगी। चावला ने उनसे पूछा कि केबिन में क्या खराब है — नीरा ने ईमानदारी से शोर करते एसी और गंदे कालीन की बात कही, जिससे प्रभावित होकर चावला ने उन्हें अगले दिन से काम पर रख लिया।
पूजा चोपड़ा कौन हैं और उन्होंने क्या हासिल किया?
पूजा चोपड़ा मिस इंडिया 2009 का खिताब जीत चुकी हैं और बॉलीवुड में अभिनेत्री के रूप में स्थापित हैं। उनकी माँ नीरा ने घर छोड़ते वक्त वादा किया था कि एक दिन यह बेटी उन्हें गर्व महसूस कराएगी — जो सच साबित हुआ।
यह खुलासा किस शो पर हुआ?
नीरा ने यह दास्तान रियलिटी शो 'तुम हो ना — घर की सुपरस्टार' पर मेजबान राजीव खंडेलवाल के साथ एक भावुक बातचीत के दौरान साझा की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले