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'तू ही रे दिल में' में वृंदा बनीं प्रियांशी यादव: 'यह किरदार मेरी सीमाओं से आगे ले गया'

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'तू ही रे दिल में' में वृंदा बनीं प्रियांशी यादव: 'यह किरदार मेरी सीमाओं से आगे ले गया'

सारांश

प्रियांशी यादव का कहना है कि वृंदा — उनका जी टीवी के नए शो 'तू ही रे दिल में' का किरदार — उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण रोल है। धैर्य, चुप्पी और अटूट आस्था से बना यह किरदार उन्हें एक कलाकार के रूप में नई ऊँचाई पर ले गया है। शो 15 जून से जी टीवी पर प्रसारित होगा।

मुख्य बातें

प्रियांशी यादव जी टीवी के शो 'तू ही रे दिल में' में वृंदा का किरदार निभाएंगी।
शो का प्रसारण 15 जून से जी टीवी पर हर दिन शाम 7 बजे होगा।
प्रियांशी ने वृंदा को अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण किरदारों में से एक बताया।
वृंदा का व्यक्तित्व धैर्य, चुप्पी और ईश्वर पर गहरे विश्वास पर आधारित है।
शो की कहानी तीन लोगों के जीवन, भावनाओं और रिश्तों के इर्द-गिर्द है।

अभिनेत्री प्रियांशी यादव जी टीवी के आगामी शो 'तू ही रे दिल में' में वृंदा का किरदार निभाने जा रही हैं, जिसका प्रसारण 15 जून से हर दिन शाम 7 बजे शुरू होगा। शो की शुरुआत से पहले प्रियांशी ने खुलकर बताया कि वृंदा उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण किरदारों में से एक है — एक ऐसी स्त्री जो विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और आस्था का दामन नहीं छोड़ती।

वृंदा का किरदार क्यों है अलग

प्रियांशी के अनुसार, जब उन्हें यह भूमिका ऑफर हुई, तभी उन्होंने भाँप लिया था कि यह कोई साधारण चरित्र नहीं है। उन्होंने कहा, 'वृंदा की सोच, उसका व्यवहार और जीवन को देखने का नज़रिया — सब कुछ बेहद अलग है।' यही विशिष्टता उन्हें पहले दिन से इस किरदार की ओर खींचती रही और हर दिन उन्हें वृंदा की दुनिया और भावनाओं के अनुरूप खुद को नए सिरे से तैयार करना पड़ता है।

शो की कहानी और भावनात्मक गहराई

'तू ही रे दिल में' तीन लोगों के जीवन, उनकी भावनाओं और आपसी रिश्तों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। अभिनेत्री का मानना है कि यही त्रिकोण इस शो की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि कहानी और किरदार दोनों में दर्शकों को भावनात्मक रूप से बाँधने की क्षमता है।

चुप्पी और धैर्य — वृंदा की पहचान

प्रियांशी ने स्वीकार किया कि कई बार उन्हें लगता है कि वृंदा को अपने हक़ के लिए आवाज़ उठानी चाहिए। लेकिन जब भी वृंदा पर अन्याय होता है, वह विरोध के बजाय चुप्पी और धैर्य का रास्ता चुनती है। उन्होंने कहा, 'यही बात उसे भीड़ से अलग करती है — उसकी शांति उसकी कमज़ोरी नहीं, उसकी पहचान है।'

आस्था और विश्वास — वृंदा की आंतरिक शक्ति

वृंदा का ईश्वर पर गहरा विश्वास उसकी आंतरिक शक्ति का स्रोत है। प्रियांशी बताती हैं कि वृंदा मानती है — जीवन में जो भी घटित होता है, उसके पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है। परिस्थितियाँ चाहे जितनी कठिन हों, उसका भरोसा अडिग रहता है। यह आस्था ही उसे हर संकट में टिके रहने की ताक़त देती है।

अभिनेत्री के लिए एक कलाकार के रूप में सीख

प्रियांशी ने माना कि वास्तविक जीवन में उनकी प्रतिक्रियाएँ वृंदा से कई मामलों में बिल्कुल भिन्न होतीं। लेकिन एक कलाकार के तौर पर यही अंतर इस किरदार को उनके लिए और अधिक रोचक बनाता है। उन्होंने कहा कि वृंदा ने उन्हें अपनी सीमाओं से परे जाकर अभिनय करने का अवसर दिया — यह अनुभव उनके करियर में एक नया अध्याय जोड़ता है। पूरी टीम — अभिनेताओं से लेकर तकनीशियनों तक — की मेहनत की उन्होंने सराहना की और उम्मीद जताई कि दर्शक वृंदा की कहानी से दिल से जुड़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रियांशी यादव का यह दावा कि वृंदा की चुप्पी कमज़ोरी नहीं बल्कि पहचान है — यह एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण फ़र्क है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या शो इस चरित्र को 'बेचारी' की छवि से बचा पाता है, या फिर वृंदा भी उसी लंबी कतार में शामिल हो जाती है जहाँ धैर्यशील स्त्रियाँ टीआरपी के लिए सिर्फ़ सहती हैं। जी टीवी की शाम 7 बजे की स्लॉट पर यह शो कितना टिकता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'तू ही रे दिल में' शो कब और कहाँ प्रसारित होगा?
यह शो 15 जून से जी टीवी पर हर दिन शाम 7 बजे प्रसारित होगा।
प्रियांशी यादव इस शो में कौन-सा किरदार निभा रही हैं?
प्रियांशी यादव 'तू ही रे दिल में' में वृंदा का किरदार निभा रही हैं, जिसे उन्होंने अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण रोल में से एक बताया है।
वृंदा का किरदार क्या खास बनाता है?
वृंदा एक ऐसी महिला है जो अन्याय होने पर भी विरोध के बजाय धैर्य और चुप्पी का रास्ता चुनती है। ईश्वर पर उसका अटूट विश्वास और जीवन को एक विशेष नज़रिये से देखने की उसकी क्षमता उसे बाकी किरदारों से अलग करती है।
'तू ही रे दिल में' की कहानी किस पर आधारित है?
शो की कहानी तीन लोगों के जीवन, उनकी भावनाओं और आपसी रिश्तों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। प्रियांशी के अनुसार यही त्रिकोण शो की सबसे बड़ी ताकत है।
प्रियांशी यादव के लिए यह किरदार निभाना कैसा अनुभव रहा?
प्रियांशी ने बताया कि वृंदा की भावनाओं को समझना और उसके व्यक्तित्व के प्रति ईमानदार रहना उनके लिए एक सीखने वाला अनुभव रहा है। इस किरदार ने उन्हें एक कलाकार के रूप में अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने का अवसर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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