5 अक्टूबर 2026
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रब्बी शेरगिल का बयान: 'पिछले 10 साल में राजनीतिक गाने और फिल्में कहाँ गईं?'

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रब्बी शेरगिल का बयान: 'पिछले 10 साल में राजनीतिक गाने और फिल्में कहाँ गईं?'

सारांश

रब्बी शेरगिल का यह बयान सिर्फ एक गायक की शिकायत नहीं — यह उस व्यापक बदलाव पर सवाल है जो स्ट्रीमिंग और बॉक्स ऑफिस की ज़रूरतों ने भारतीय कला-संगीत पर थोपा है। एक दशक में न राजनीतिक गाने, न साहसी फिल्में — यह खालीपन बड़ी बात कहता है।

मुख्य बातें

गायक रब्बी शेरगिल ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि पिछले 10 साल में कला के लिए जगह और सिकुड़ी है।
उन्होंने सवाल उठाया — पिछले एक दशक में कोई उल्लेखनीय राजनीतिक गाना या फिल्म क्यों नहीं आई?
रब्बी के अनुसार, ''कला का मतलब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और राजनीति पर सवाल उठाना भी है।'' रब्बी की पहचान 'बुल्ला की जाना' जैसे सूफी-रॉक गानों से है, जो पंजाबी संत बुल्ले शाह की कविता पर आधारित है।
यश चोपड़ा की फिल्म 'जब तक है जान' (2012) में रब्बी का गाया 'छल्ला' — संगीत ए.
रहमान , बोल गुलज़ार — खासा चर्चित रहा।

गायक और गीतकार रब्बी शेरगिल ने एक ताज़ा बातचीत में कहा कि पिछले एक दशक में कला ने मनोरंजन के सामने अपनी जगह काफी हद तक खो दी है — और उनके मुताबिक यह स्थिति आज भी बदली नहीं है। 'बुल्ला की जाना', 'तेरे बिन', 'छल्ला' और 'हीर' जैसे कालजयी गानों से पहचाने जाने वाले रब्बी ने यह टिप्पणी 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में की।

कला और मनोरंजन के बीच बढ़ती खाई

रब्बी शेरगिल के अनुसार, करीब एक दशक पहले भी उन्होंने यह चिंता ज़ाहिर की थी कि कला धीरे-धीरे हाशिये पर जा रही है। अब इतने वर्षों बाद भी उनकी राय नहीं बदली। उन्होंने कहा, ''यह काफी हद तक व्यक्तिगत नज़रिए का विषय है। मेरी राय में आज भी कला के लिए जगह कम हुई है।''

उन्होंने श्रोताओं और दर्शकों से दो सीधे सवाल पूछे — क्या उन्होंने पिछले 10 साल में कोई राजनीतिक गाना सुना है और क्या कोई राजनीतिक फिल्म देखी है? रब्बी का मानना है कि इन सवालों का जवाब खुद दर्शक दे सकते हैं।

कला का असली अर्थ क्या है

रब्बी शेरगिल ने जोर देकर कहा, ''कला का मतलब सिर्फ मनोरंजन करना नहीं है। कला समाज, राजनीति और आसपास की ज़िंदगी पर सवाल उठाने का ज़रिया भी है। मुझे लगता है कि कला कुछ हद तक गायब हो गई है।'' उनके इस बयान को उद्योग की मौजूदा दिशा पर एक तीखी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि रब्बी शेरगिल का पूरा संगीत-सफर इसी सोच की देन रहा है — उनके गानों में पंजाबी लोक परंपरा, सूफी दर्शन और रॉक की धाराएँ एक साथ बहती हैं, जो शुद्ध व्यावसायिक संगीत से बिल्कुल अलग है।

बुल्ले शाह से रब्बी तक का सफर

रब्बी शेरगिल का सबसे चर्चित गाना 'बुल्ला की जाना' पंजाबी सूफी संत बुल्ले शाह की काफी कविता पर आधारित है। रब्बी ने इस क्लासिक रचना को आधुनिक संगीत के साथ इस तरह पेश किया कि वह एक पीढ़ी की आवाज़ बन गया। यह गाना आज भी उनकी पहचान का सबसे मज़बूत स्तंभ माना जाता है।

बॉलीवुड में भी रब्बी की छाप गहरी रही है। दिवंगत फिल्ममेकर यश चोपड़ा की 2012 में आई फिल्म 'जब तक है जान' में उन्होंने 'छल्ला' गाया, जिसे संगीत में ए. आर. रहमान ने कंपोज़ किया और बोल गुलज़ार ने लिखे थे। फिल्म में शाहरुख खान, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा मुख्य भूमिकाओं में थे।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

संगीत आलोचकों का कहना है कि रब्बी की चिंता बेबुनियाद नहीं है। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के उदय के बाद से एल्गोरिदम-संचालित सुझाव उन गानों को आगे बढ़ाते हैं जो ज़्यादा 'स्किप' नहीं किए जाते — और इस दौड़ में सामाजिक-राजनीतिक संदेश वाले गाने अक्सर पीछे रह जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी फिल्म उद्योग में बड़े-बजट की 'सेफ' फिल्मों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

आगे की राह

रब्बी शेरगिल ने फिलहाल किसी नई परियोजना का ऐलान तो नहीं किया, लेकिन उनका यह बयान कला और व्यावसायिक मनोरंजन के बीच चल रही बहस को फिर से हवा देता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि नई पीढ़ी के कलाकार इस चुनौती को किस तरह स्वीकार करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब संगीत और सिनेमा सबसे कम 'राजनीतिक' हैं। रब्बी जैसे कलाकार अपवाद बनकर रह गए हैं, नियम नहीं।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रब्बी शेरगिल ने कला और मनोरंजन को लेकर क्या कहा?
रब्बी शेरगिल ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में कला के लिए जगह और कम हुई है और मनोरंजन हावी हो गया है। उनके मुताबिक, कला का असली अर्थ समाज और राजनीति पर सवाल उठाना है — जो आज के गानों और फिल्मों में लगभग गायब है।
रब्बी शेरगिल का सबसे मशहूर गाना कौन सा है?
'बुल्ला की जाना' रब्बी शेरगिल का सबसे चर्चित गाना है, जो पंजाबी सूफी संत बुल्ले शाह की काफी कविता पर आधारित है। इस गाने ने आधुनिक सूफी-रॉक संगीत में रब्बी को एक अलग पहचान दी।
रब्बी शेरगिल ने बॉलीवुड में कौन से गाने गाए हैं?
रब्बी शेरगिल ने 2012 में आई यश चोपड़ा की फिल्म 'जब तक है जान' का गाना 'छल्ला' गाया, जिसे ए. आर. रहमान ने कंपोज़ किया और गुलज़ार ने लिखा। फिल्म में शाहरुख खान, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा थे।
रब्बी शेरगिल किस शैली के संगीत के लिए जाने जाते हैं?
रब्बी शेरगिल पंजाबी लोक, सूफी और रॉक संगीत के अनूठे मेल के लिए जाने जाते हैं। 'बुल्ला की जाना', 'तेरे बिन', 'छल्ला' और 'हीर' उनके सबसे प्रसिद्ध गानों में शामिल हैं।
क्या भारत में राजनीतिक सिनेमा और संगीत वाकई कम हो गया है?
रब्बी शेरगिल के अनुसार, पिछले 10 साल में राजनीतिक गाने और फिल्में लगभग नदारद हो गई हैं। संगीत आलोचकों का कहना है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और बॉक्स ऑफिस के दबाव ने व्यावसायिक सामग्री को प्राथमिकता दी है, जिससे सामाजिक टिप्पणी वाली कला हाशिये पर चली गई है।
राष्ट्र प्रेस
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