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रेखा के 5 आइकॉनिक डांस: 'उमराव जान' से 'परिणीता' तक, हर परफॉर्मेंस एक मास्टरक्लास

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रेखा के 5 आइकॉनिक डांस: 'उमराव जान' से 'परिणीता' तक, हर परफॉर्मेंस एक मास्टरक्लास

सारांश

रेखा के ये पाँच गाने सिर्फ फिल्मी परफॉर्मेंस नहीं — ये हिंदी सिनेमा में नृत्य-अभिनय के संगम की जीवंत मिसाल हैं। 'उमराव जान' के कथक से लेकर 'परिणीता' के रेट्रो-जैज़ तक, रेखा ने हर शैली में यह साबित किया कि असली कलाकार किसी एक सीमा में नहीं बँधता।

मुख्य बातें

रेखा के नृत्य में कथक और फिल्मी अंदाज़ का अनूठा समन्वय उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता था।
'उमराव जान' (1981) के दो गाने — 'इन आँखों की मस्ती' और 'दिल चीज़ क्या है' — आज भी हिंदी सिनेमा में कथक प्रदर्शन के श्रेष्ठतम उदाहरण माने जाते हैं; इस फिल्म के लिए रेखा को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था।
'मुकद्दर का सिकंदर' (1978) का 'सलाम-ए-इश्क' गाना रेखा की तवायफ के किरदार और कथक मुद्राओं के लिए आज भी चर्चित है।
'मिस्टर नटवरलाल' का 'परदेसिया' गाना अमिताभ बच्चन के साथ रेखा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री का बेहतरीन नमूना है; संगीत राजेश रोशन ने दिया था।
'परिणीता' (2005) में 1950-60 के दशक की रेट्रो-जैज़ शैली में रेखा का डांस उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है।

अभिनेत्री रेखा भारतीय सिनेमा की उन विरल प्रतिभाओं में से एक हैं, जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ अपनी नृत्य-शैली से भी हिंदी फिल्मों पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके गाने महज़ परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि कला, भाव और लय का संगम हैं। रेखा के नृत्य में शास्त्रीय परंपरा और फिल्मी अंदाज़ का जो अनूठा समन्वय था, वह उन्हें अपने समकालीनों से सर्वथा अलग करता था।

नृत्य में 'ठहराव' की अनूठी पहचान

रेखा के डांस की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उसमें कोई जल्दबाज़ी नहीं थी। कथक की शालीन मुद्राओं, आँखों के भाव और हाथों के इशारों से वे किसी भी गाने की आत्मा को पर्दे पर उतार देती थीं। यही कारण है कि दशकों बाद भी उनके गाने दर्शकों की स्मृति में उतने ही ताज़ा हैं। यहाँ हम उनके पाँच सबसे चर्चित और यादगार डांस परफॉर्मेंस पर एक नज़र डालते हैं।

इन आँखों की मस्ती — उमराव जान (1981)

निर्देशक मुज़फ़्फ़र अली की कल्ट क्लासिक फिल्म 'उमराव जान' में फिल्माया गया यह गाना आज भी हिंदी सिनेमा के श्रेष्ठतम प्रदर्शनों में गिना जाता है। रेखा ने इसमें कथक-आधारित नृत्य-मुद्राओं का इस्तेमाल करते हुए अवध की नज़ाकत और गरिमा को परदे पर साकार किया। आँखों के भाव, शालीन बैठी हुई कोरियोग्राफी और हर अंग की भाषा ने इस परफॉर्मेंस को अमर बना दिया। इस गाने को आशा भोसले ने अपनी आवाज़ दी थी और संगीत खय्याम का था। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।

दिल चीज़ क्या है — उमराव जान (1981)

इसी फिल्म का एक और मणि-कांचन गाना 'दिल चीज़ क्या है' भी रेखा के सर्वोत्तम प्रदर्शनों में शुमार होता है। इस गाने में उन्होंने कथक, हाथों के इशारे और पैरों की थाप को अद्भुत सहजता से एक साथ प्रस्तुत किया। पलकों का झुकना, 'आदाब' करने का अंदाज़ और चेहरे के हाव-भाव — इन सभी ने मिलकर इस परफॉर्मेंस को एक संपूर्ण कलाकृति बना दिया। 'उमराव जान' के दोनों गाने आज भी शास्त्रीय नृत्य और फिल्मी अभिनय के संगम का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।

सलाम-ए-इश्क मेरी जान — मुकद्दर का सिकंदर (1978)

साल 1978 में आई फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' का यह गाना आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और सदाबहार गानों में गिना जाता है। रेखा ने इसमें 'ज़ोहरा बाई' नाम की तवायफ का किरदार निभाया था। गाने में कथक नृत्य की खूबसूरत मुद्राएँ, बैठने और उठने में एक अनूठा ठहराव, और नज़ाकत भरे अभिनय ने इस परफॉर्मेंस को आज भी मास्टरक्लास का दर्जा दिलाया हुआ है।

परदेसिया — मिस्टर नटवरलाल (1979)

फिल्म 'मिस्टर नटवरलाल' का यह सदाबहार गाना रेखा और अमिताभ बच्चन की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री का बेहतरीन नमूना है। बंजारन वेशभूषा में रेखा का नृत्य और उनके साथ अमिताभ की जुगलबंदी दर्शकों के बीच आज भी उतनी ही लोकप्रिय है। इस गाने को लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया था, जबकि संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था। यह गाना आज भी शादियों और त्योहारों में बजाया जाता है।

कैसी पहेली ज़िंदगानी — परिणीता (2005)

निर्देशक प्रदीप सरकार की फिल्म 'परिणीता' में रेखा ने एक विशेष रेट्रो-जैज़ अपीयरेंस दी। करियर में दशकों बाद उन्होंने इस गाने में 1950-60 के दशक के क्लबों की कैबरे और जैज़ धुनों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया, जो पारंपरिक बॉलीवुड शैली से बिल्कुल अलग था। यह परफॉर्मेंस इस बात का प्रमाण है कि रेखा की बहुमुखी प्रतिभा किसी एक शैली की सीमा में नहीं बँधी। उनके ये पाँचों गाने आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बने रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली कहानी उनके अनुशासन और शास्त्रीय तैयारी की है। 'उमराव जान' के लिए उन्होंने जो कथक की बारीकियाँ आत्मसात कीं, वह किसी भी प्रशिक्षित नर्तकी के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि 'परिणीता' में रेट्रो-जैज़ शैली अपनाकर उन्होंने दिखाया कि वे केवल एक युग की नहीं, बल्कि हर युग की कलाकार हैं। मुख्यधारा की चर्चा जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि रेखा के नृत्य की सबसे बड़ी ताकत उनका 'ठहराव' है — एक ऐसी विरासत जो आज की तेज़-रफ़्तार कोरियोग्राफी संस्कृति में और भी दुर्लभ और मूल्यवान हो गई है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेखा का सबसे प्रसिद्ध डांस परफॉर्मेंस कौन सा है?
रेखा का सबसे चर्चित डांस परफॉर्मेंस 1981 की फिल्म 'उमराव जान' के गाने 'इन आँखों की मस्ती' को माना जाता है, जिसमें उन्होंने कथक-आधारित नृत्य और आँखों के भाव से अवध की नज़ाकत को अमर कर दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
'उमराव जान' में रेखा के डांस की क्या खासियत थी?
'उमराव जान' में रेखा ने कथक की शालीन मुद्राओं, हाथों के इशारों और आँखों के भाव के ज़रिए तवायफ़ के किरदार को जीवंत किया। उनके 'दिल चीज़ क्या है' और 'इन आँखों की मस्ती' दोनों गानों में अवध की नज़ाकत और गरिमा को इस तरह उतारा गया जो आज भी कथक-आधारित फिल्मी प्रदर्शन का श्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।
'सलाम-ए-इश्क' गाना किस फिल्म का है और इसमें रेखा ने कौन सा किरदार निभाया?
'सलाम-ए-इश्क मेरी जान' 1978 की फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' का गाना है, जिसमें रेखा ने 'ज़ोहरा बाई' नाम की तवायफ का किरदार निभाया था। इस गाने में उनके कथक नृत्य और ठहरी हुई अभिनय-शैली को आज भी मास्टरक्लास माना जाता है।
'परदेसिया' गाने में रेखा के साथ कौन थे और इसका संगीत किसने दिया था?
'परदेसिया' फिल्म 'मिस्टर नटवरलाल' का गाना है, जिसमें रेखा के साथ अमिताभ बच्चन थे। इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया था और इसका संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था।
'परिणीता' में रेखा का डांस अन्य गानों से अलग क्यों था?
'परिणीता' (2005) में रेखा ने 1950-60 के दशक के क्लबों की कैबरे और जैज़ धुनों पर आधारित रेट्रो-जैज़ शैली में डांस किया, जो उनके पारंपरिक बॉलीवुड या कथक-आधारित अंदाज़ से बिल्कुल अलग था। यह परफॉर्मेंस उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
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