रेखा के 5 आइकॉनिक डांस: 'उमराव जान' से 'परिणीता' तक, हर परफॉर्मेंस एक मास्टरक्लास
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री रेखा भारतीय सिनेमा की उन विरल प्रतिभाओं में से एक हैं, जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ अपनी नृत्य-शैली से भी हिंदी फिल्मों पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके गाने महज़ परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि कला, भाव और लय का संगम हैं। रेखा के नृत्य में शास्त्रीय परंपरा और फिल्मी अंदाज़ का जो अनूठा समन्वय था, वह उन्हें अपने समकालीनों से सर्वथा अलग करता था।
नृत्य में 'ठहराव' की अनूठी पहचान
रेखा के डांस की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उसमें कोई जल्दबाज़ी नहीं थी। कथक की शालीन मुद्राओं, आँखों के भाव और हाथों के इशारों से वे किसी भी गाने की आत्मा को पर्दे पर उतार देती थीं। यही कारण है कि दशकों बाद भी उनके गाने दर्शकों की स्मृति में उतने ही ताज़ा हैं। यहाँ हम उनके पाँच सबसे चर्चित और यादगार डांस परफॉर्मेंस पर एक नज़र डालते हैं।
इन आँखों की मस्ती — उमराव जान (1981)
निर्देशक मुज़फ़्फ़र अली की कल्ट क्लासिक फिल्म 'उमराव जान' में फिल्माया गया यह गाना आज भी हिंदी सिनेमा के श्रेष्ठतम प्रदर्शनों में गिना जाता है। रेखा ने इसमें कथक-आधारित नृत्य-मुद्राओं का इस्तेमाल करते हुए अवध की नज़ाकत और गरिमा को परदे पर साकार किया। आँखों के भाव, शालीन बैठी हुई कोरियोग्राफी और हर अंग की भाषा ने इस परफॉर्मेंस को अमर बना दिया। इस गाने को आशा भोसले ने अपनी आवाज़ दी थी और संगीत खय्याम का था। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
दिल चीज़ क्या है — उमराव जान (1981)
इसी फिल्म का एक और मणि-कांचन गाना 'दिल चीज़ क्या है' भी रेखा के सर्वोत्तम प्रदर्शनों में शुमार होता है। इस गाने में उन्होंने कथक, हाथों के इशारे और पैरों की थाप को अद्भुत सहजता से एक साथ प्रस्तुत किया। पलकों का झुकना, 'आदाब' करने का अंदाज़ और चेहरे के हाव-भाव — इन सभी ने मिलकर इस परफॉर्मेंस को एक संपूर्ण कलाकृति बना दिया। 'उमराव जान' के दोनों गाने आज भी शास्त्रीय नृत्य और फिल्मी अभिनय के संगम का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।
सलाम-ए-इश्क मेरी जान — मुकद्दर का सिकंदर (1978)
साल 1978 में आई फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' का यह गाना आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और सदाबहार गानों में गिना जाता है। रेखा ने इसमें 'ज़ोहरा बाई' नाम की तवायफ का किरदार निभाया था। गाने में कथक नृत्य की खूबसूरत मुद्राएँ, बैठने और उठने में एक अनूठा ठहराव, और नज़ाकत भरे अभिनय ने इस परफॉर्मेंस को आज भी मास्टरक्लास का दर्जा दिलाया हुआ है।
परदेसिया — मिस्टर नटवरलाल (1979)
फिल्म 'मिस्टर नटवरलाल' का यह सदाबहार गाना रेखा और अमिताभ बच्चन की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री का बेहतरीन नमूना है। बंजारन वेशभूषा में रेखा का नृत्य और उनके साथ अमिताभ की जुगलबंदी दर्शकों के बीच आज भी उतनी ही लोकप्रिय है। इस गाने को लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया था, जबकि संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था। यह गाना आज भी शादियों और त्योहारों में बजाया जाता है।
कैसी पहेली ज़िंदगानी — परिणीता (2005)
निर्देशक प्रदीप सरकार की फिल्म 'परिणीता' में रेखा ने एक विशेष रेट्रो-जैज़ अपीयरेंस दी। करियर में दशकों बाद उन्होंने इस गाने में 1950-60 के दशक के क्लबों की कैबरे और जैज़ धुनों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया, जो पारंपरिक बॉलीवुड शैली से बिल्कुल अलग था। यह परफॉर्मेंस इस बात का प्रमाण है कि रेखा की बहुमुखी प्रतिभा किसी एक शैली की सीमा में नहीं बँधी। उनके ये पाँचों गाने आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बने रहेंगे।