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रूप कुमार राठौड़: 'संदेशे आते हैं' से 'तुझ में रब दिखता है' तक, देशभक्ति और रोमांस दोनों के अनूठे स्वर

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रूप कुमार राठौड़: 'संदेशे आते हैं' से 'तुझ में रब दिखता है' तक, देशभक्ति और रोमांस दोनों के अनूठे स्वर

सारांश

तबला वादन से शुरू हुई रूप कुमार राठौड़ की यात्रा 'संदेशे आते हैं' की भावुक देशभक्ति से होते हुए 'तुझ में रब दिखता है' की कोमल रोमांटिकता तक पहुँची। हजार से अधिक गीत, दस भाषाएँ और 2021 का राष्ट्रीय संगीत पुरस्कार — यह सफर बताता है कि असली आवाज़ें किसी एक खाँचे में नहीं समातीं।

मुख्य बातें

रूप कुमार राठौड़ का जन्म 10 जून को मुंबई में हुआ; पिता पंडित चतुर्भुज राठौड़ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार थे।
फिल्म 'बॉर्डर' के गीत 'संदेशे आते हैं' ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई; यह गीत आज भी देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है।
रोमांटिक गीत 'तुझ में रब दिखता है' उनके करियर का सबसे चर्चित प्रेम-गीत बना।
उन्होंने हिंदी सहित 10 से अधिक भाषाओं में 1,000 से अधिक गीत गाए।
2021 में उन्हें लोकमत सुर ज्योत्स्ना राष्ट्रीय संगीत पुरस्कार और विशेष 'आइकन' सम्मान से नवाज़ा गया।

हिंदी फिल्म संगीत में रूप कुमार राठौड़ उन विरले गायकों में शुमार हैं, जिन्होंने एक साथ देशभक्ति के जोश और प्रेम की कोमलता को अपनी आवाज़ में पिरोया। 10 जून को मुंबई में जन्मे रूप कुमार ने अपने करियर में हजार से अधिक गीत गाए और हिंदी सहित दस से अधिक भाषाओं में अपनी गायकी का लोहा मनवाया। फिल्म 'बॉर्डर' के गीत 'संदेशे आते हैं' ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और आज भी यह गीत देशभक्ति की धरोहर माना जाता है।

संगीत की विरासत और शुरुआती सफर

रूप कुमार राठौड़ के पिता पंडित चतुर्भुज राठौड़ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित कलाकार थे। घर में बचपन से ही सुरों का वातावरण था, जिसने रूप कुमार को कम उम्र में ही संगीत की राह पर ला खड़ा किया। उन्होंने अपनी यात्रा तबला वादन से शुरू की और कई गज़ल गायकों के साथ संगत करते हुए धीरे-धीरे अपनी आवाज़ को तराशा।

1990 के दशक में उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। शुरुआती वर्षों में उन्होंने कई फिल्मों में पार्श्वगायन किया, लेकिन उनकी असली पहचान बनी 1997 में आई फिल्म 'बॉर्डर' से।

'बॉर्डर' ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान

फिल्म 'बॉर्डर' का गीत 'संदेशे आते हैं' भारतीय सिनेमा के सबसे भावुक देशभक्ति गीतों में से एक है। इस गीत में सैनिकों की घर के प्रति तड़प और परिवार की प्रतीक्षा को रूप कुमार ने जिस सादगी और गहराई से गाया, वह श्रोताओं की आँखें आज भी नम कर देता है। इसी फिल्म का गीत 'तो चलूं' भी दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा।

गौरतलब है कि देशभक्ति गीतों में रूप कुमार का योगदान यहीं तक सीमित नहीं रहा। 'जिंदगी मौत न बन जाए', 'खुश रहना' और 'कंधों से मिलते हैं कंधे' जैसे गीतों ने भी राष्ट्रप्रेम की भावना को नई ऊँचाई दी।

रोमांटिक गीतों में भी अमिट छाप

देशभक्ति के साथ-साथ रूप कुमार ने रोमांटिक गीतों में भी अपनी अलग दुनिया बनाई। उनका गाया 'तुझ में रब दिखता है' उनके करियर का सबसे चर्चित रोमांटिक गीत बना, जिसने लाखों श्रोताओं के दिलों में स्थायी जगह बनाई। इसके अलावा 'मौला मेरे मौला', 'तेरे लिए', 'दिल को तुमसे प्यार हुआ' और 'ओ सैयां' जैसे गीतों ने भी उनकी आवाज़ को हर घर तक पहुँचाया।

बहुभाषी गायकी और संगीत निर्देशन

रूप कुमार राठौड़ ने हिंदी के अलावा गुजराती, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, असमिया, उड़िया, नेपाली, भोजपुरी और कन्नड़ सहित अनेक भाषाओं में गायकी की। उनके नाम हजार से अधिक गीत दर्ज हैं — एक ऐसी उपलब्धि जो उन्हें भारतीय संगीत के सबसे बहुमुखी कलाकारों की पंक्ति में खड़ा करती है।

गायकी के अतिरिक्त उन्होंने संगीत निर्देशन में भी हाथ आज़माया। अपनी पत्नी सोनाली राठौड़ के साथ उन्होंने कई गज़ल और सूफी शोज़ किए, जिन्होंने संगीत प्रेमियों के बीच अलग पहचान बनाई।

सम्मान और पुरस्कार

भारतीय संगीत में उनके बहुमूल्य योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें 2021 में प्रतिष्ठित लोकमत सुर ज्योत्स्ना राष्ट्रीय संगीत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी समारोह में उन्हें विशेष 'आइकन' सम्मान भी प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उनके दशकों के संगीत-समर्पण की स्वीकृति है। रूप कुमार राठौड़ की आवाज़ आने वाली पीढ़ियों को भी देशप्रेम और मोहब्बत के सुरों में भिगोती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह केवल धुन की नहीं, आवाज़ की ताकत है। यह भी उल्लेखनीय है कि तबला वादक से पार्श्वगायक और फिर संगीत निर्देशक तक का उनका सफर उस पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा की देन है जो आज के प्लेबैक उद्योग में दुर्लभ होती जा रही है। मुख्यधारा की चर्चा अक्सर उनके चुनिंदा हिट गीतों तक सिमट जाती है, जबकि दस भाषाओं में हजार से अधिक गीतों का उनका योगदान भारतीय क्षेत्रीय संगीत की दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूप कुमार राठौड़ कौन हैं और उन्हें किस गीत से पहचान मिली?
रूप कुमार राठौड़ मुंबई में जन्मे हिंदी फिल्म पार्श्वगायक हैं, जिन्हें 1997 की फिल्म 'बॉर्डर' के गीत 'संदेशे आते हैं' से राष्ट्रीय पहचान मिली। उन्होंने हिंदी सहित दस से अधिक भाषाओं में एक हजार से अधिक गीत गाए हैं।
रूप कुमार राठौड़ के सबसे लोकप्रिय गीत कौन-से हैं?
उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में देशभक्ति की श्रेणी में 'संदेशे आते हैं', 'तो चलूं', 'कंधों से मिलते हैं कंधे' और रोमांटिक श्रेणी में 'तुझ में रब दिखता है', 'मौला मेरे मौला', 'तेरे लिए' और 'ओ सैयां' शामिल हैं।
रूप कुमार राठौड़ का संगीत करियर कैसे शुरू हुआ?
उनके पिता पंडित चतुर्भुज राठौड़ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कलाकार थे, जिससे घर में संगीत का माहौल था। रूप कुमार ने तबला वादन से शुरुआत की और गज़ल गायकों के साथ संगत करते हुए 1990 के दशक में फिल्मी पार्श्वगायन में कदम रखा।
रूप कुमार राठौड़ को कौन-से पुरस्कार मिले हैं?
उन्हें 2021 में लोकमत सुर ज्योत्स्ना राष्ट्रीय संगीत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी समारोह में उन्हें विशेष 'आइकन' सम्मान भी दिया गया, जो भारतीय संगीत में उनके दीर्घकालिक योगदान की मान्यता है।
क्या रूप कुमार राठौड़ ने हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में भी गाया है?
हाँ, उन्होंने हिंदी के अलावा गुजराती, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, असमिया, उड़िया, नेपाली, भोजपुरी और कन्नड़ सहित कई भाषाओं में गीत गाए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी सोनाली राठौड़ के साथ गज़ल और सूफी शोज़ भी किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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