15 अक्टूबर 2026
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फिल्म 'सहिया' पर CBFC को 27 अक्टूबर तक फैसले का निर्देश, बॉम्बे हाईकोर्ट में 2 नवंबर को अगली सुनवाई

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फिल्म 'सहिया' पर CBFC को 27 अक्टूबर तक फैसले का निर्देश, बॉम्बे हाईकोर्ट में 2 नवंबर को अगली सुनवाई

सारांश

झारखंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'सहिया' को मई 2026 में आवेदन के बावजूद अगस्त में प्रमाणपत्र से इनकार मिला। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC को 27 अक्टूबर की डेडलाइन दी है — और 2 नवंबर को अदालत तय करेगी कि क्या फिल्मकारों को इंसाफ मिला।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC को 27 अक्टूबर 2026 तक फिल्म 'सहिया' पर अंतिम प्रमाणन निर्णय लेने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में निर्धारित है।
निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा ने 30 मई 2026 को प्रमाणन के लिए आवेदन किया था; 27 अगस्त 2026 को CBFC ने प्रमाणपत्र देने से इनकार किया।
CBFC ने फिल्म में हिंसा के महिमामंडन और असामाजिक गतिविधियों पर आपत्तियाँ जताई थीं; निर्माता इसे प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की कहानी बताते हैं।
फिल्म में नीरज काबी , शांतनु माहेश्वरी , रिंकू राजगुरु और इश्तियाक खान मुख्य भूमिकाओं में हैं; शूटिंग नेतरहाट, झारखंड में हुई।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को फिल्म 'सहिया' के सेंसर प्रमाणन विवाद में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को 27 अक्टूबर 2026 तक अंतिम निर्णय लेने का स्पष्ट निर्देश दिया। फिल्म के निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा की याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई में यह आदेश आया, और मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को तय की गई है।

अदालत में क्या हुआ

संजय शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश हुए। उनके साथ अधिवक्ता एस.एम. हैदर, अब्दुल तल्हा, मोहम्मद शाज़ और सुरभि ने भी दलीलें रखीं। निर्माता पक्ष ने अदालत के सामने रखा कि 30 मई 2026 को प्रमाणन के लिए आवेदन दाखिल किया गया था, फिर भी पाँच महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है, जिससे फिल्म की रिलीज़ अनिश्चितकाल के लिए लटकी है।

प्रमाणन में देरी की पूरी कहानी

आवेदन के बाद जुलाई 2026 में पहली स्क्रीनिंग हुई और अगस्त 2026 में फिल्म को पुनरीक्षण समिति के सामने रखा गया। 27 अगस्त 2026 को CBFC ने फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। बोर्ड की ओर से आपत्तियाँ उठाई गई थीं कि फिल्म में हिंसा के महिमामंडन और असामाजिक गतिविधियों के दृश्य हैं।

बुधवार की सुनवाई में CBFC के वकील ने अदालत को बताया कि 23 अक्टूबर को फिल्म के लिए रिवाइजिंग कमेटी गठित की जाएगी। इस पर निर्माता पक्ष ने आपत्ति जताई कि महज़ कमेटी की तारीख बताना पर्याप्त नहीं है — कमेटी फिल्म कब देखेगी और निर्णय कब तक देगी, यह स्पष्ट नहीं था। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए CBFC को 27 अक्टूबर की निश्चित समयसीमा दी।

फिल्म क्या है और निर्माता का पक्ष

'सहिया' झारखंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म है, जिसकी कहानी एक नवविवाहित जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म यह दर्शाती है कि संघर्ष और हिंसा के माहौल में आम लोगों के रिश्ते, सपने और रोज़मर्रा की ज़िंदगी किस तरह प्रभावित होती है। शूटिंग झारखंड के नेतरहाट और आसपास के जंगलों व प्राकृतिक स्थलों पर की गई है।

फिल्म में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी, रिंकू राजगुरु और इश्तियाक खान जैसे कलाकार हैं। संजय शर्मा का कहना है कि 'सहिया' हिंसा का समर्थन करने वाली फिल्म नहीं, बल्कि प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की कहानी है। उनके अनुसार, फिल्म को उसकी पूरी कहानी और मूल भाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

आगे क्या होगा

CBFC को अब 27 अक्टूबर 2026 तक 'सहिया' पर अंतिम आदेश जारी करना होगा। यदि बोर्ड इस समयसीमा में निर्णय नहीं लेता या निर्माता उस निर्णय से असंतुष्ट रहते हैं, तो मामला 2 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई के लिए आएगा। गौरतलब है कि यह मामला फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्धता पर व्यापक बहस को एक बार फिर केंद्र में ला रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ महीनों की देरी के बावजूद कोई निश्चित समयसीमा नहीं होती। अदालत को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता है, जो बताता है कि बोर्ड की आंतरिक प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध नहीं है। 'हिंसा के महिमामंडन' जैसे अस्पष्ट आधारों पर प्रमाणपत्र देने से इनकार और फिर उसकी समीक्षा में महीनों की देरी, छोटे और स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए एक सुनियोजित बाधा की तरह काम करती है। असली सवाल यह है कि क्या CBFC सुधार की प्रतीक्षा करती इस व्यवस्था में 27 अक्टूबर की डेडलाइन सिर्फ एक तारीख बनकर रह जाएगी, या यह एक नज़ीर बनेगी।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'सहिया' के सेंसर विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को CBFC को 27 अक्टूबर 2026 तक फिल्म 'सहिया' पर अंतिम प्रमाणन निर्णय लेने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।
CBFC ने 'सहिया' को प्रमाणपत्र देने से क्यों इनकार किया?
CBFC ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म में हिंसा के महिमामंडन और असामाजिक गतिविधियों से जुड़ी आपत्तियाँ उठाते हुए प्रमाणपत्र देने से इनकार किया। हालाँकि निर्माता संजय शर्मा का कहना है कि फिल्म प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की कहानी है और हिंसा का महिमामंडन नहीं करती।
'सहिया' फिल्म की कहानी क्या है और इसमें कौन से कलाकार हैं?
'सहिया' झारखंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म है जो एक नवविवाहित जोड़े की कहानी कहती है, जिनकी ज़िंदगी हिंसा और संघर्ष के माहौल में उलझ जाती है। फिल्म में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी, रिंकू राजगुरु और इश्तियाक खान मुख्य भूमिकाओं में हैं और शूटिंग नेतरहाट के जंगलों में हुई है।
फिल्म 'सहिया' के प्रमाणन में इतनी देरी क्यों हुई?
निर्माता संजय शर्मा ने 30 मई 2026 को प्रमाणन के लिए आवेदन किया था। जुलाई में पहली स्क्रीनिंग, अगस्त में पुनरीक्षण समिति के सामने प्रस्तुति और 27 अगस्त को इनकार के बाद यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचा। पाँच महीने से अधिक की इस देरी पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए निश्चित डेडलाइन दी।
27 अक्टूबर के बाद क्या होगा यदि CBFC फैसला न दे?
यदि CBFC 27 अक्टूबर 2026 तक अंतिम निर्णय नहीं देता, तो मामला 2 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई के लिए आएगा। उस सुनवाई में अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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