सलीम खान ने फिल्मों पर फतवा देने वालों को दिया था करारा जवाब, इस्लाम की शिक्षाओं पर दिया जोर
सारांश
Key Takeaways
- ईद पर फिल्मों की रिलीज का उद्देश्य पारिवारिक और उत्सव का माहौल बनाना है।
- सलीम खान ने फतवे पर बेबाकी से प्रतिक्रिया दी है।
- इस्लाम में मानवता और प्रेम की बात की गई है।
- सलीम खान के परिवार में हर धर्म का सम्मान होता है।
- उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर फिल्म जगत की नजर है।
मुंबई, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और ईद का इंतजार फिल्म उद्योग के लिए भी एक खास महत्व रखता है। यह प्रथा रही है कि ईद पर रिलीज होने वाली फिल्मों को शानदार ओपनिंग मिलती है। विशेष रूप से, सलमान खान की फिल्मों ने ईद पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है और बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाए हैं।
ईद पर फिल्मों की रिलीज का विचार सामने आया है दिग्गज पटकथा लेखक और सलमान खान के पिता सलीम खान के संदर्भ में, जो वर्तमान में मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। 'शोले', 'दीवार', 'जंजीर', 'डॉन' और 'हाथी मेरे साथी' जैसी हिट फिल्मों के लेखक सलीम खान को हाल ही में माइनर ब्रेन हेमरेज के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी तबीयत की जानकारी मिलते ही हिंदी सिनेमा के कई सितारे उनसे मिलने अस्पताल पहुंच रहे हैं।
सलीम खान अपने स्पष्ट बयानों के लिए जाने जाते हैं। जब भी फिल्मों पर फतवा जारी करने या 'सच्चा मुसलमान' होने के संदर्भ में बहस उठी, उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने उन संगठनों को स्पष्ट जवाब दिया जो फिल्मों पर फतवा जारी करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ईद पर फिल्में क्यों रिलीज की जाती हैं।
एक अवसर पर, सलीम खान ने स्पष्ट किया था कि ईद पर फिल्मों की रिलीज का मकसद किसी भी धार्मिक भावनाओं से टकराव नहीं है, बल्कि त्योहार के उत्सव और पारिवारिक माहौल का हिस्सा बनना है। उनके अनुसार, ईद ऐसा अवसर है जब परिवार एक साथ समय बिताते हैं और सिनेमा मनोरंजन का एक माध्यम बन जाता है।
लेखक ने अपने पुराने इंटरव्यू में कहा था कि अगर हर मुसलमान के फिल्म देखने पर बैन लगा दिया जाए, तो हमारी इंडस्ट्री खुद-ब-खुद ठप हो जाएगी। उन्होंने कहा, "फतवा केवल फिल्म बनाने वालों पर ही क्यों, देखने वालों पर क्यों नहीं? जब से फिल्म इंडस्ट्री बनी है, तब से लोग ईद पर रिलीज के लिए प्रिंट लेकर बैठते हैं। मुसलमान रमजान में फिल्म नहीं देखता, लेकिन ईद पर जो ओपनिंग मिलती है, वह किसी अन्य दिन नहीं मिलती।
वे आगे कहते हैं, "ईद का वीक फिल्म के लिए बहुत महत्वपूर्ण और अद्भुत होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मुसलमान सबसे ज्यादा फिल्में देखते हैं। तो अगर हर फिल्म देखने वाले मुसलमान पर फतवा लगा दिया जाए, तो हमारा काम वैसे ही रुक जाएगा।" लेखक ने इस्लाम की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि इस्लाम में मानवता और प्रेम की बात की गई है, प्रतिशोध की नहीं।
बात करें सलीम खान और सलमान खान की, तो उन्होंने हमेशा कहा है कि उनके घर में हर धर्म का सम्मान किया जाता है। सलमान की मां हिंदू समुदाय से हैं। वे हर साल अपने घर में गणेश चतुर्थी का आयोजन करते हैं और बप्पा की विदाई पर ढोल की थाप पर नृत्य करते हैं।