5 अक्टूबर 2026
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संजय दत्त के 'भारत में शांति नहीं' बयान पर सियासी बवाल, कांग्रेस ने समर्थन किया, BJP ने बोला हमला

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संजय दत्त के 'भारत में शांति नहीं' बयान पर सियासी बवाल, कांग्रेस ने समर्थन किया, BJP ने बोला हमला

सारांश

गांधी जयंती पर एक टॉक शो में 'भारत में पहले जैसी शांति नहीं' कहने वाले संजय दत्त के बयान ने सियासी आग भड़का दी। कांग्रेस ने हथियार बनाया, BJP ने 'पाकिस्तान जाओ' कह दिया, और दत्त को सफाई देनी पड़ी — एक शो की क्लिप बड़े राजनीतिक दांव में बदल गई।

मुख्य बातें

संजय दत्त ने टॉक शो 'शेखर टूनाइट' में कहा कि उन्हें भारत में 'पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती।' महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने बयान का समर्थन करते हुए BJP शासन पर सुरक्षा विफलता का आरोप लगाया।
BJP नेता परिणय फुके ने कहा — 'अगर भारत में शांति नहीं मिल रही तो पाकिस्तान चले जाएं।' शिवसेना (UBT) के आनंद दुबे ने दत्त के बयान से असहमति जताते हुए राजनीतिकरण पर आपत्ति जताई।
संजय दत्त ने सोशल मीडिया पर सफाई दी, बयान को 'मुन्नाभाई' की गांधीगिरी से प्रेरित और संदर्भ से बाहर बताया।

अभिनेता संजय दत्त के 'भारत में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती' वाले बयान को लेकर 5 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक विवाद गहरा गया, जब महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने इस टिप्पणी का खुलकर समर्थन किया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता परिणय फुके ने पलटवार करते हुए संजय दत्त को 'पाकिस्तान चले जाने' की नसीहत दे डाली। यह विवाद टॉक शो 'शेखर टूनाइट' की एक क्लिप के वायरल होने के बाद भड़का, जिसमें दत्त ने देश में 'उस पुरानी शांति' की वापसी के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की थी।

संजय दत्त ने क्या कहा था

शो में बातचीत के दौरान संजय दत्त ने कहा था, 'इस देश के लोग बहुत प्यारे हैं। यहां शांति होनी चाहिए। मुझे अब हमारे देश में वो शांति महसूस नहीं होती। हम भारतीय बड़े दिल वाले और मेहमाननवाज होते हैं। हमने बहुत कुछ दिया है और हमें हमेशा ऐसा ही रहना चाहिए। मैं भगवान शिव से प्रार्थना करता हूं कि वो दिन जल्द वापस आए।' यह टॉक शो गांधी जयंती के मौके पर रिकॉर्ड हुआ था। बाद में इस बातचीत का एक अंश सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैलने लगा और लोगों ने इसे मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी के रूप में व्याख्यायित करना शुरू कर दिया।

कांग्रेस का समर्थन

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने बिना देर किए संजय दत्त के बयान की पुष्टि की। उन्होंने कहा, 'संजय दत्त ने बिल्कुल सच कहा है। BJP के शासन में दिनदहाड़े हत्याएं हो रही हैं और लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। संजय दत्त ने बयान के जरिए केंद्र सरकार और BJP शासित राज्य सरकारों को अवगत कराया है। सरकारों को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए और देश व राज्यों में बढ़ रही गुंडई को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।' पटोले की यह प्रतिक्रिया महाराष्ट्र की राजनीतिक नब्ज को भी बयान करती है, जहां महाविकास अघाड़ी और महायुति के बीच खींचतान जारी है।

BJP का पलटवार

BJP नेता परिणय फुके ने तीखे लहजे में जवाब देते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि संजय दत्त अपना होश खो चुके हैं, और शायद उन्हें पाकिस्तान या यरवदा जेल में शांति महसूस हो रही है। उनकी उम्र को देखते हुए, मुझे लगता है कि उन्हें अब आराम करना चाहिए और शांति पाने के लिए चार धाम यात्रा करनी चाहिए। अगर उन्हें यहां भारत में शांति नहीं मिल रही है, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।' फुके की इस टिप्पणी ने भी सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी।

शिवसेना (UBT) की असहमति

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस मामले में संतुलित लेकिन असहमत रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि संजय दत्त का बयान सही नहीं है। पूरे देश को पता है कि भारत में शांति है और देश बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है।' दुबे ने यह भी जोड़ा कि 'हर मुद्दे पर राजनीति करना ठीक नहीं है' और सभी को मिलकर देश को आगे ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) कांग्रेस की सहयोगी होते हुए भी इस मुद्दे पर अलग राह पर दिखी।

संजय दत्त की सफाई

विवाद बढ़ने पर संजय दत्त ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सफाई दी। उन्होंने लिखा, 'मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना, उनका अपमान करना या उनका अनादर करना मेरा मकसद कभी नहीं रहा है। मेरी टिप्पणियां एक स्क्रिप्टेड बातचीत के संदर्भ में की गई थीं, जिसका मकसद मजाकिया माहौल बनाना था। इसके पीछे की भावना 'मुन्नाभाई' की 'गांधीगिरी' की उस सोच से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य प्रेम, एकजुटता और सद्भावना का संदेश देना था। दुर्भाग्यवश, मेरी बातों को उस मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया।' यह पहला मौका नहीं है जब किसी फिल्मी हस्ती के बयान को राजनीतिक रंग मिला हो — बॉलीवुड और राजनीति का यह टकराव समय-समय पर उठता रहता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई पक्ष इस मामले को और आगे ले जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक दलों ने इसे अपने-अपने आख्यान में फिट कर लिया — यह दर्शाता है कि चुनावी माहौल में हर सार्वजनिक उक्ति कितनी जल्दी 'एजेंडा सामग्री' बन जाती है। BJP का 'पाकिस्तान जाओ' वाला जवाब भी उतना ही विवादास्पद है जितना खुद वह बयान जिस पर वह पलटवार कर रही थी। शिवसेना (UBT) का कांग्रेस से अलग रुख बताता है कि महाविकास अघाड़ी के भीतर भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या एक कलाकार की निजी भावना पर इस तरह का राजनीतिक हमला उचित है, या यह उस बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा है जहां असहमति को 'देशद्रोह' के करीब रखकर देखा जाता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय दत्त ने 'भारत में शांति नहीं' वाली बात कहां और कब कही?
संजय दत्त ने यह बात शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टूनाइट' में गांधी जयंती के मौके पर कही थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें भारत में 'पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती' और भगवान शिव से प्रार्थना की कि वो दिन जल्द वापस आएं।
कांग्रेस ने संजय दत्त के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने बयान का समर्थन किया और कहा कि दत्त ने 'बिल्कुल सच कहा है।' उन्होंने BJP शासन में दिनदहाड़े हत्याओं और बढ़ती असुरक्षा का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से कार्रवाई की माँग की।
BJP ने संजय दत्त के बयान का जवाब कैसे दिया?
BJP नेता परिणय फुके ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि संजय दत्त को 'चार धाम यात्रा' करनी चाहिए और यदि भारत में शांति न मिले तो पाकिस्तान चले जाएं। उन्होंने यरवदा जेल का भी उल्लेख किया, जो दत्त की पूर्व सज़ा की ओर संकेत था।
संजय दत्त ने विवाद बढ़ने पर क्या सफाई दी?
दत्त ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उनका बयान 'मुन्नाभाई' की गांधीगिरी की भावना से प्रेरित था और इसका मकसद प्रेम व सद्भावना का संदेश देना था। उन्होंने कहा कि उनकी बातें संदर्भ से बाहर समझी गईं और किसी को ठेस पहुंचाना उनका इरादा नहीं था।
शिवसेना (UBT) का इस विवाद में क्या रुख रहा?
शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने संजय दत्त के बयान से असहमति जताई और कहा कि भारत में शांति है। उन्होंने हर मुद्दे पर राजनीति करने को भी अनुचित बताया, जो कांग्रेस के रुख से अलग था।
राष्ट्र प्रेस
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