अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में उठाए पुरानी परंपराओं पर सवाल, 'शनिवार को नाखून क्यों नहीं काटने?'
सारांश
मुख्य बातें
मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने 27 अक्टूबर 2026 को अपने व्यक्तिगत ब्लॉग के ज़रिए पुरानी परंपराओं और प्रचलित अंधविश्वासों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि लोग अक्सर मान्यताओं के पीछे की तर्कसंगतता जाने बिना ही उन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी ढोते चले आ रहे हैं। मुंबई स्थित इस अभिनेता की यह टिप्पणी उनके नियमित ब्लॉग पोस्ट का हिस्सा थी, जिसमें उन्होंने जीवन-दर्शन और बदलते नज़रिए पर भी विचार साझा किए।
ब्लॉग में क्या लिखा बच्चन ने
बच्चन ने अपने ब्लॉग में जीवन के बदलते दौर को बड़े सहज अंदाज़ में व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, 'कभी-कभी मन की करना, कुछ चीजों से दूर रहना। लेकिन जिंदगी में एक ऐसा वक्त भी आता है, जब आप वो सब करना चाहते हैं, जिसे करने से आपको रोका गया है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि समय के साथ व्यक्ति की इच्छाएँ और जीवन को देखने का नज़रिया दोनों बदल जाते हैं।
बच्चन ने यह भी लिखा, 'पहले के समय में बेफिक्र थे और अब फिर से बेफिक्र हो गए, जिंदगी का चक्र पूरा हो गया? दिमाग ये सब क्यों तय करता है?' इस आत्म-मंथन के ज़रिए उन्होंने मानव मन की जटिलता को सरल शब्दों में सामने रखा।
किन परंपराओं पर उठाए सवाल
अमिताभ बच्चन ने 'शनिवार को नाखून न काटने' और 'हरे पत्थर की जगह हरी शॉल रखने' जैसी प्रचलित मान्यताओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए इनके पीछे के तर्क पर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने लिखा, 'शनिवार को नाखून मत काटो, अशुभ होता है — प्रथा चली आ रही है और हमारा डर, एक आज्ञाकारी इंसान के तौर पर उसे मान्यता देता रहता है।'
हरे पत्थर वाली मान्यता पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने पूछा, 'उस बेचारे पत्थर ने क्या बिगाड़ा है आपका और ये हरे रंग की शॉल कैसे लाभदायक हो जाएगी?' यह टिप्पणी तर्कहीन विकल्पों पर उनके व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण को उजागर करती है।
आधुनिक पीढ़ी और बदलती सोच
बच्चन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज की पीढ़ी आँखें मूँदकर किसी भी प्रथा को नहीं अपनाती। उनके अनुसार, युवा पीढ़ी केवल उन्हीं परंपराओं को अपनी दिनचर्या में शामिल करती है जिनका कोई वैज्ञानिक, शारीरिक या मानसिक आधार हो। यह दृष्टिकोण अंधश्रद्धा और विवेकपूर्ण आस्था के बीच की रेखा को रेखांकित करता है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आधुनिक युग में लोग मानसिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कुछ पुरानी प्रथाओं को नए नज़रिए से अपना रहे हैं — बशर्ते उनके पीछे कोई ठोस कारण हो।
बच्चन का ब्लॉग: एक नियमित मंच
गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन अपने ब्लॉग के माध्यम से वर्षों से अपने विचार, जीवन-अनुभव और सामाजिक टिप्पणियाँ साझा करते रहे हैं। यह मंच उनके प्रशंसकों के लिए उनकी व्यक्तिगत सोच तक पहुँचने का एक प्रमुख जरिया बन चुका है। ऐसे समय में जब सोशल मीडिया पर सतहीपन हावी है, उनका चिंतनशील लेखन एक अलग पहचान रखता है।
आने वाले समय में भी उनके ब्लॉग से ऐसी और विचारोत्तेजक टिप्पणियाँ सामने आने की उम्मीद है, जो सामाजिक परंपराओं और आधुनिक जीवनशैली के बीच संवाद को प्रोत्साहित करें।