शरद केलकर जन्मदिन: हकलाहट से 'बाहुबली' की आवाज तक — ग्वालियर के इस कलाकार की अनोखी यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता और वॉयसओवर आर्टिस्ट शरद केलकर आज 7 अक्टूबर 2026 को अपना 50वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। 7 अक्टूबर 1976 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे केलकर ने बचपन की हकलाहट को पीछे छोड़ते हुए भारतीय मनोरंजन उद्योग में दमदार आवाज और बहुमुखी अभिनय के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी आवाज को देश की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक 'बाहुबली 2' में हिंदी डबिंग के जरिए पहचाना जाता है।
शुरुआती जीवन और संघर्ष
शरद केलकर का जन्म एक मराठी परिवार में हुआ और उनका पालन-पोषण ग्वालियर में हुआ। उनके पिता मध्य प्रदेश सरकार के PWD विभाग में इंजीनियर थे। MBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और मनोरंजन जगत में अपना रास्ता तलाशा।
एक इंटरव्यू में केलकर ने खुलासा किया था कि बचपन में उन्हें हकलाहट के कारण काफी परेशान किया जाता था। उन्होंने कहा था, 'बचपन में हकलाने की वजह से उन्हें बेरहमी से तंग किया जाता था। अब, मैं एक ऐसे पेशे में हूँ जिसमें मुझे अपनी बोलने की कला का इस्तेमाल करना पड़ता है।' उन्होंने यह भी बताया कि हकलाहट से उबरने में उन्हें करीब दो साल लगे, और इस संघर्ष ने उन्हें भीतर से और मज़बूत बनाया।
टेलीविजन से मिली पहचान
2004 में केलकर ने दूरदर्शन पर प्रसारित शो 'आक्रोश' से टेलीविजन में कदम रखा, जिसमें उन्होंने इंस्पेक्टर सचिन कुलकर्णी की भूमिका निभाई। इसके बाद 'सिंदूर तेरे नाम का' और 'सात फेरे' जैसे धारावाहिकों ने उन्हें घर-घर में पहचाना।
2009 में 'बैरी पिया' में ठाकुर दिग्विजय सिंह भदौरिया के किरदार ने उन्हें विशेष ख्याति दिलाई। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें 2010 के गोल्ड अवॉर्ड्स में बेस्ट निगेटिव एक्टर का पुरस्कार मिला। 2011 में 'उतरन' में ग्रे शेड वाले किरदार सात्या को निभाकर उन्होंने साबित किया कि वे हर तरह के रोल में ढल सकते हैं। उन्होंने 'रॉक-एन-रोल फैमिली' और 'पति पत्नी और वो' जैसे शो भी होस्ट किए।
फिल्मी करियर और विस्तार
शरद केलकर का बड़े पर्दे पर आगमन 2013 में निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गोलियों की रासलीला रामलीला' से हुआ, जहाँ उन्होंने एक अधिकार जताने वाले बड़े भाई की भूमिका अदा की। 2014 में मराठी ब्लॉकबस्टर 'लई भारी' में खलनायक संगम के रोल ने उन्हें मराठी सिनेमा का चहेता बना दिया।
बॉलीवुड में उन्होंने 'हाउसफुल 4' में सूर्यभान माइकल भाई के कॉमेडी रोल से दर्शकों को हँसाया, तो 'तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर' में छत्रपति शिवाजी महाराज का दमदार किरदार निभाकर इतिहास को जीवंत किया। उल्लेखनीय है कि इस किरदार की तैयारी के लिए उन्हें केवल चार दिन का समय मिला था, फिर भी उन्होंने महाराज की गरिमा और शौर्य को पर्दे पर बखूबी उतारा। इसके अतिरिक्त, अक्षय कुमार की फिल्म 'लक्ष्मी' में उनके अभिनय को भी सराहा गया।
आवाज का जादू: 'बाहुबली' से हॉलीवुड तक
शरद केलकर की आवाज की यात्रा उनके अभिनय जीवन जितनी ही दिलचस्प है। एक अलग इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब उन्हें आवाज और डबिंग की अहमियत का एहसास हुआ, तो उन्होंने बाकायदा डबिंग की पेशेवर ट्रेनिंग ली। उनका मानना है कि एक कलाकार अपनी डबिंग से अपनी परफॉर्मेंस को नई ऊँचाई भी दे सकता है।
आज वे 'बाहुबली' सीरीज़ की हिंदी डबिंग के अलावा हॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए वॉयसओवर की पहचान बन चुके हैं। केलकर ने हिंदी और मराठी के अलावा तमिल और तेलुगु फिल्मों में भी अभिनय की अपनी छाप छोड़ी है। यह ऐसे समय में और भी प्रेरक लगता है जब उनकी पहचान का आधार वही आवाज है, जिसे एक दशक से अधिक पहले वे खुद ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे।