क्या टाइपराइटर सेल्समैन से संगीत के शिखर तक पहुंचने वाले केएल को लता और किशोर ने माना 'गुरु'?

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क्या टाइपराइटर सेल्समैन से संगीत के शिखर तक पहुंचने वाले केएल को लता और किशोर ने माना 'गुरु'?

सारांश

कुंदन लाल सहगल का जीवन एक प्रेरणा है, जिन्होंने टाइपराइटर सेल्समैन से लेकर भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बनने का सफर तय किया। लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने उन्हें गुरु मानकर अपने संगीत करियर में उनकी छाप छोड़ी। उनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।

Key Takeaways

  • कुंदन लाल सहगल का सफर प्रेरणादायक है।
  • उन्होंने भारतीय सिनेमा में मेलोडी की नींव रखी।
  • लता और किशोर ने उन्हें अपना गुरु
  • उनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसी है।
  • सादगी में महानता का परिचायक।

मुंबई, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कुंदन लाल सहगल को भारतीय सिनेमा का पहला ‘सुपरस्टार’ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि केएल सहगल के होने से ही फिल्में सुपरहिट हो जाती थीं। आज जब हम संगीत की दुनिया में ‘मेलोडी’ की चर्चा करते हैं, तो उसकी नींव रखने वाले व्यक्ति भी कुंदन लाल सहगल ही थे।

11 अप्रैल 1904 को जम्मू के नवा शहर में जन्मे कुंदन के परिवार में संगीत की कोई पारंपरिक विरासत नहीं थी। उनके पिता तहसीलदार थे, लेकिन मां केसर बाई के भजनों ने बालक कुंदन के भीतर सुरों का बीज बो दिया। सहगल की शिक्षा किसी उस्ताद के घर पर नहीं, बल्कि सूफी संतों की दरगाहों और रामलीला के मंचों पर हुई।

कम ही लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले केएल सहगल ने रेलवे में टाइमकीपर और बाद में टाइपराइटर बेचने वाले सेल्समैन के तौर पर भी काम किया। सेल्समैन की इस नौकरी ने उन्हें पूरे भारत की खाक छानने का अवसर दिया, जिससे उन्होंने अलग-अलग भाषाओं और सुरों को अपने भीतर समाहित कर लिया।

1930 का दशक भारतीय सिनेमा के लिए ‘बोलती फिल्मों’ का एक नया चरण था। सहगल कोलकाता पहुंचे और ‘न्यू थिएटर्स’ के बीएन सरकार ने उनकी आवाज की विशेषता को पहचाना। शुरुआत ‘सहगल कश्मीरी’ नाम से हुई, लेकिन 1935 में आई फिल्म ‘देवदास’ ने इतिहास रच दिया।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘देवदास’ को सहगल ने अपनी आवाज और अभिनय से अमर कर दिया। ‘बालम आए बसो मोरे मन में’ जैसे गीतों ने उन्हें हर घर की पहचान बना दिया। वह दौर ऐसा था कि लोग ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स सिर्फ इसलिए खरीदते थे क्योंकि उन पर सहगल का नाम होता था।

केएल सहगल की आवाज में एक खास प्रकार की ‘नोजल टोन’ थी। शास्त्रीय संगीत के दिग्गज उस्ताद फैयाज खान ने जब उन्हें गाते सुना, तो वे दंग रह गए।

सहगल ने मिर्जा गालिब की गजलों को जो आत्मा दी, वह आज भी मील का पत्थर है। ‘नुक्ताचीं है गमे-दिल’ या ‘आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक’ सुनकर ऐसा लगता है मानो गालिब ने ये शब्द सहगल की आवाज के लिए ही लिखे थे।

कुंदन लाल सहगल के व्यक्तित्व से जुड़ी एक और बात उनकी शराब की लत भी थी। वह अक्सर रिकॉर्डिंग से पहले शराब मांगते थे, जिसे वह कोड वर्ड में ‘काली पांच’ (एक खास पेग) कहते थे। दिग्गज संगीतकार नौशाद ने फिल्म ‘शाहजहां’ (1946) के दौरान उन्हें बिना शराब पिए ‘जब दिल ही टूट गया’ गाने के लिए राजी किया। जब सहगल ने वह गाना सुना, तो खुद भावुक हो गए और माना कि उनकी आवाज बिना नशे के कहीं ज्यादा साफ और दर्दभरी थी।

अफसोस, यह समझ आने तक बहुत देर हो चुकी थी। शराब ने उनके लिवर को खराब कर दिया था। 18 जनवरी 1947 को, जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था, यह सुरों का शहंशाह दुनिया को अलविदा कह गया।

लता मंगेशकर केएल सहगल को अपना गुरु मानती थीं। किशोर कुमार ने जीवन भर सहगल के गीतों को किसी फिल्म में ‘रीमेक’ करने से इसलिए मना किया क्योंकि वह उन्हें ‘गुरु’ मानते थे।

आज भी जालंधर का ‘केएल सहगल मेमोरियल हॉल’ उनकी यादों को संजोए खड़ा है। कुंदन लाल सहगल एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने सादगी में महानता खोजी। उन्होंने गज़ल को महफिलों से निकालकर आम आदमी की जुबां तक पहुंचाया। आज भी जब कहीं पुरानी यादों का जिक्र होता है, सहगल की वह आवाज कानों में रस घोल देती है, ‘दुख के अब दिन बीतत नाही...’

Point of View

NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

कुंदन लाल सहगल कौन थे?
कुंदन लाल सहगल भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार माने जाते हैं, जिन्होंने अपनी आवाज और अभिनय से फिल्म उद्योग को नई दिशा दी।
क्या सहगल ने शराब की लत के कारण अपनी आवाज खो दी?
हां, सहगल की शराब की लत ने उनके स्वास्थ्य को प्रभावित किया, जिसके कारण उनकी आवाज में कमी आई।
केएल सहगल का सबसे प्रसिद्ध गाना कौन सा है?
सहगल का सबसे प्रसिद्ध गाना ‘बालम आए बसो मोरे मन में’ है, जो आज भी लोगों के दिलों में बसा है।
लता मंगेशकर ने सहगल को क्यों गुरु माना?
लता मंगेशकर ने सहगल को अपने गुरु माना क्योंकि उनके संगीत ने उनकी कला को बेहद प्रभावित किया।
क्या सहगल की कहानी प्रेरणादायक है?
बिल्कुल! सहगल की कहानी हमें यह सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद सपनों को साकार किया जा सकता है।
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